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मप्र आबकारी आयुक्त को नकली और मिलावटी शराब बेचने की शिकायत 

जिला आबकारी अधिकारी बोले- बस स्टैंड और आलमगंज की शराब दुकान से जांच में कुछ नहीं निकला बुरहानपुर। शहर में बस स्टैंड और आमलगंज स्थित शराब दुकान से नकली और मिलावटी शराब बेचे जाने की शिकायत मप्र आबकारी आयुक्त ग्वालियर से की गई। जिसमें कहा गया कि यहां नकली शराब बिक रही है। ग्वालियर से […]

  • जिला आबकारी अधिकारी बोले- बस स्टैंड और आलमगंज की शराब दुकान से जांच में कुछ नहीं निकला

बुरहानपुर। शहर में बस स्टैंड और आमलगंज स्थित शराब दुकान से नकली और मिलावटी शराब बेचे जाने की शिकायत मप्र आबकारी आयुक्त ग्वालियर से की गई। जिसमें कहा गया कि यहां नकली शराब बिक रही है। ग्वालियर से पत्र आने के बाद जिला आबकारी अधिकारी ने जांच कराई, लेकिन जांच के बाद उनका कहना है कि ऐसा कुछ पाया नहीं गया। नकली शराब बेचा जाना संभव भी नहीं है।
शिकायतकर्ता धर्मेंद्र सिंह निवासी गायत्री कॉलोनी बुरहानपुर ने कहा-24 मई को बुरहानपुर के शनवारा बस स्टैंड स्थित शासकीय मदिरा दुकान से एक ब्लैंडर प्राइट की बॉटल जिसकी एमआरपी 1395 है खरीदी। मुझसे दुकान पर मौजूद सेल्समैन द्वारा 600 रूपए में दी गई। जिसमें सेवन करने के तत्काल बाद मुझे घबराहट और चक्कर की शिकायत हुई। जांच पड़ताल की तो पता चला यहां सबसे कम रेट में शराब मिलती है। ब्लैंडर प्राइट के टेस्ट में भी परिवर्तन महसूस हुआ। मुझे शंका हुई। जिसके बाद मेरे द्वारा शहर की सभी प्रमुख दुकानों से ब्लैंडर की बॉटल खरीदी गई। बॉटल के ढक्कन पर लगा क्यूआर कोड स्कैन कर मंदिरा बॉटल के बैच नंबर की जांच पड़ताल की गई। जो प्रमाणित पाए गए। आखिर में शनवारा बस स्टैंड स्थित शराब दुकान से ब्लैंडर की एक बॉटल खरीदी जिसके क्यूआर कोड का जब मेरे द्वारा स्कैन किया गया तो मेरी शंका यकीन में बदल गई। उसकी बॉटल पर स्कैन करने पर ई-आबकारी पोर्टल पर रायल स्टेज 180 एमएल का विवरण दर्शाया गया। जबकि मेरे द्वारा 750 एमएल की बॉटल क्रय की गई थी जिससे शंका की पुष्टि हुई। स्थिति शराब ठेकेदार द्वारा फर्जीवाड़ा किया जाना पाया गया। मेरे द्वारा शाम में फिर 4 बजकर 10 मिनट पर एक और बॉटल खरीदी गई। इसकी पुष्टि सीसीटीवी से की जा सकती है। दोनों दुकानों की जांच कराई जाए।
विभाग ने कराई जांच, कुछ नहीं निकला
आबकारी आयुक्त ग्वालियर से पत्र आने के बाद स्थानीय स्तर पर अमला दो दिन पहले दुकानों पर जांच के लिए पहुंचा, लेकिन अफसरों का कहना है कि ऐसी कोई स्थिति नजर नहीं आई। इसके बाद शराब ठेकेदार को क्लीन चिट मिल गई। वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता का कहना है कि मैंने न सिर्फ दो दुकानों से माल खरीदा, बल्कि इसके बाद अन्य जगह भी उसे प्रमाणित करने के लिए बॉटल खरीदी गई, लेकिन इसके बाद भी अफसर यह बात मानने को तैयार नहीं है कि इसमें धांधली हो रही है। शिकायकर्ता का कहना है कि मैं जांच से संतुष्ट नहीं हूं।
वर्जन-
नकली शराब होना संभव ही नहीं, चेक कराया कुछ नहीं निकला
– शिकायत सामने आई थी। उपर से पत्र आया था। इसके बाद चेकिंग कराई। नकली संभव नहीं है। इसलिए चेक कराया गया। ऐसा कुछ नहीं निकला।
-वीरेंद्र धाकड़, जिला आबकारी अधिकारी, बुरहानपुर

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