बुरहानपुर। सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर एक सेवानिवृत्त प्राचार्य और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश हुआ है। फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाकर घोटाले, चरित्र हनन और जान से मारने की धमकी देने वाले मामले में सायबर सेल और थाना लालबाग पुलिस की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
पूर्व प्राचार्य ने एसपी और सायबर सेल से की थी शिकायत
दरअसल मामला अर्जुन नगर, लालबाग निवासी पुरूषोत्तम उर्फ राम कदम (64) से जुड़ा है, जो सेवानिवृत्त प्राचार्य होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक और सायबर सेल को दिए आवेदन में बताया कि “Satish Bhawsar” नाम की फेसबुक आईडी से उनके खिलाफ खुलेआम झूठे, अपमानजनक और धमकी भरे आरोप लगाए जा रहे हैं। फेसबुक पोस्ट में गंभीर आरोप लगाया गए। इतना ही नहीं, पोस्ट में शिकायतकर्ता के चरित्र पर भी उंगली उठाई गई और जान से मारने तक की बात लिखी गई।
आरएसएस कार्यालय निर्माण को लेकर फैलाया गया झूठ
शिकायतकर्ता ने बताया कि पोस्ट में प्रत्यक्ष इशारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लक्ष्मीनगर स्थित कार्यालय भवन के निर्माण को लेकर किया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि उनका उस भवन के निर्माण या आर्थिक लेन-देन से कोई सीधा संबंध नहीं रहा। न तो उन्होंने कभी राशि का लेन-देन किया और न ही ठेकेदार या निर्माण सामग्री से उनका कोई वास्ता रहा।
सायबर जांच में फर्जी फेसबुक आईडी का भंडाफोड़
मामले की गंभीरता को देखते हुए सायबर सेल ने तकनीकी जांच की। जांच में सामने आया कि “Satish Bhawsar” नाम की फेसबुक आईडी पूरी तरह फर्जी है। इस आईडी को चलाने के लिए जिस मोबाइल नंबर का उपयोग किया जा रहा था, वह देवांश पिता किरण सूर्यवंशी, निवासी शिवाजीनगर लालबाग के नाम से पंजीकृत पाया गया।
पूछताछ में आरोपी ने कबूली साजिश
सायबर सेल और पुलिस द्वारा पूछताछ किए जाने पर आरोपी देवांश ने स्वीकार किया कि उसी ने फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर पोस्ट डाले। आरोपी ने यह भी खुलासा किया कि यह पूरा कृत्य उसने नरेंद्र पिता किशन जाधव, निवासी प्रगति नगर बुरहानपुर के कहने पर किया था, जिसका उद्देश्य शिकायतकर्ता पुरूषोत्तम उर्फ राम कदम की सामाजिक और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना था। शिकायतकर्ता द्वारा आमने-सामने पूछताछ करने पर भी आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया।
अभद्र भाषा और धमकी से बढ़ा मामला
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने आपत्तिजनक और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। इसके साथ ही जान से मारने जैसी धमकी देकर मानसिक दबाव बनाने का प्रयास किया गया, जिससे शिकायतकर्ता की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका उत्पन्न हुई।
इन धाराओं में दर्ज हुआ अपराध
पूरी जांच के बाद पुलिस ने आरोपी देवांश सूर्यवंशी के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66(C), भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223, 351(3) और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में ले लिया है।
पुलिस का सख्त संदेश
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर किसी की छवि खराब करना गंभीर और दंडनीय अपराध है। तकनीक के दौर में ऐसे मामलों में आरोपी बच नहीं सकते। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।