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वन सुधार के नाम पर फर्जीवाड़ा! बिना काम कराए निकाले लाखों, दो वनपाल निलंबित

- भावसा के चौकी प्रभारी और चौंडी के बीट प्रभारी ने काम कराए बिना ही पैसा निकाला

  • जांच के बाद डीएफओ ने दोनों को किया सस्पेंड

बुरहानपुर। वन विभाग में “वन सुधार” योजना के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। जांच में खुलासा हुआ कि विभाग के ही दो वनपालों ने बिना काम कराए लाखों रुपए के बिल पास करवा लिए। डीएफओ विद्याभूषण सिंह ने दोनों को तत्काल निलंबित कर सख्त कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, वन मंडल सामान्य बुरहानपुर के शाहपुर परिक्षेत्र के तहत आने वाली भावसा चौकी और दक्षिण चौंडी बीट में वन सुधार कार्यों में भारी अनियमितताएं मिलीं। निरीक्षण के दौरान कक्ष क्रमांक 421 में वन सुधार के नाम पर एक भी कार्य नहीं मिला, जबकि ₹1.57 लाख रुपए के बिल और फर्जी प्रमाणपत्र जमा करवा दिए गए थे। डीएफओ के अनुसार यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। इतना ही नहीं, कक्ष क्रमांक 422 में पौधारोपण योजना के तहत सुरक्षा कार्यों में भी लापरवाही और फर्जीवाड़ा सामने आया।

कैसे किया गया फर्जीवाड़ा

“एनपीवी बिगड़े वनों का सुधार योजना” (वर्ष 2024–25) के तहत कैम्पा मद से किए जाने वाले कार्यों में बिना काम किए फर्जी बिल लगाकर भुगतान कराया गया। निरीक्षण में पाया गया कि काम के नाम पर सिर्फ कागज तैयार किए गए — भावसा चौकी प्रभारी योगेश महाजन ने बिना कार्य कराए ₹1.57 लाख का भुगतान दिखाया। वहीं दक्षिण चौंडी बीट प्रभारी नारायण पाटिल ने भी इसी तरह ₹1.57 लाख 415 रुपए के फर्जी बिल प्रस्तुत किए। दोनों जगह वन क्षेत्र में अवैध टप्पर (झोपड़ी) भी पाए गए, जो पौधारोपण सुरक्षा कार्यों में घोर लापरवाही का प्रमाण हैं।

डीएफओ ने दिखाई सख्ती, कहा — अब किसी को नहीं बख्शा जाएगा

डीएफओ विद्याभूषण सिंह ने मामले की जांच के बाद तत्काल दोनों वनपालों को निलंबित कर दिया। योगेश महाजन, चौकी प्रभारी भावसा का मुख्यालय अब वन परिक्षेत्र नावरा तय किया गया है। नारायण पाटिल, बीट प्रभारी दक्षिण चौंडी का मुख्यालय वन परिक्षेत्र धूलकोट रखा गया है। डीएफओ ने कहा विभाग में पारदर्शिता जरूरी है। बिना काम कराए सरकारी धन का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अन्य रेंजों की भी जांच की जाएगी।

पहली बार विभाग के अंदर हुई खुली कार्रवाई

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, अब तक ऐसे मामले दबा दिए जाते थे, लेकिन इस बार डीएफओ ने सीधे एक्शन लेकर मिसाल कायम की है। कर्मचारियों में हड़कंप है और अन्य परिक्षेत्रों में भी निर्माण और सुधार कार्यों की जांच की मांग उठने लगी है।

वन सुधार की आड़ में भ्रष्टाचार – सवालों के घेरे में विभाग

बिगड़े वनों के सुधार योजना का उद्देश्य वन क्षेत्र का विकास और पर्यावरण संरक्षण है। लेकिन इसी योजना में कागजी काम के जरिए धन निकालना इस मिशन की साख पर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि इसी तरह योजनाओं का धन फर्जी बिलों में निकलता रहा तो वन विकास की जमीनी हकीकत कभी सुधरेगी नहीं।

अब निगाहें आगे की जांच पर

इस कार्रवाई के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या सिर्फ दो वनपाल ही दोषी हैं, या ऊपरी स्तर तक मिलीभगत रही है? सूत्रों के मुताबिक डीएफओ ने अन्य रेंजों में भी ऑडिट और भौतिक सत्यापन की तैयारी शुरू कर दी है।

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