बुरहानपुर। शहर के अंडा बाजार क्षेत्र में संचालित ग्लोबल हॉस्पिटल की जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। जिस अस्पताल में पहले निरीक्षण के दौरान कई कमियां मिलने पर पंजीयन और लाइसेंस एक महीने के लिए अस्थायी रूप से निरस्त कर दिया गया था, उसी अस्पताल की दोबारा जांच रविवार को महज 10 मिनट में पूरी कर ली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि निरीक्षण के दौरान अस्पताल में चार मरीज भर्ती मिले, लेकिन मौके पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। ऑपरेशन थिएटर (ओटी) तो उपलब्ध था, लेकिन आईसीयू नहीं मिला।
इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कम समय में निरीक्षण पूरा कर पंचनामा तैयार कर लिया। जांच इतनी जल्दी समाप्त होने के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप भी सामने आए हैं। दरअसल उक्त राजनीतिक व्यक्ति अपने रसूक के दम पर अन्य बंद पड़े हॉस्पिटल को भी चालू करवाने के लिए दबाव बना रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अस्पताल की व्यवस्थाओं का पर्याप्त सत्यापन किया गया या निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया?
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पहले कमियां मिलीं तो एक महीने के लिए रोका संचालन, अब दोबारा जांच में भी सामने आईं खामियां
ग्लोबल हॉस्पिटल में पूर्व में किए गए निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग को कई कमियां मिली थीं। इन्हें गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. आरके वर्मा ने अस्पताल का पंजीयन और लाइसेंस एक महीने के लिए अस्थायी रूप से निरस्त कर दिया था। अस्पताल प्रबंधन को इस अवधि में निर्धारित कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद अस्पताल संचालक ने 10 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर दावा किया कि पूर्व में बताई गई सभी कमियां दूर कर ली गई हैं। इसी दावे की वास्तविक स्थिति जांचने के लिए सीएमएचओ ने चार सदस्यीय समिति गठित की। समिति में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खकनार के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. पुष्पेंद्र जामले, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सारोला के चिकित्सा अधिकारी डॉ. नबील अहमद खान, सीएमएचओ कार्यालय के स्थापना शाखा प्रभारी योगेश गोस्वामी और बीईई गौरव श्रीवास को शामिल किया गया। रविवार दोपहर टीम ग्लोबल हॉस्पिटल पहुंची। यहां निरीक्षण के दौरान ऐसी स्थिति सामने आई, जिसने अस्पताल प्रबंधन के सभी कमियां दूर करने के दावे पर सवाल खड़े कर दिए।
चार मरीजों का इलाज चल रहा था, लेकिन अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं मिला
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल में चार मरीज भर्ती मिले। हालांकि, मौके पर कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था। अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर भूषण बोरनार ने टीम को बताया कि मोबाइल पर चिकित्सकीय परामर्श लेकर मरीजों का उपचार किया जाता है। यही तथ्य अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। यदि भर्ती मरीज की हालत अचानक बिगड़ जाए तो उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता कौन उपलब्ध कराएगा? अस्पताल में भर्ती मरीजों की नियमित निगरानी किस चिकित्सक की जिम्मेदारी है? आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल में क्या व्यवस्था की गई है? इन सवालों के जवाब अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षित हैं। मोबाइल पर चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था किन परिस्थितियों में अपनाई जा रही थी और क्या वह भर्ती मरीजों की उपचार संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप थी, इसका भी परीक्षण जरूरी है।
ऑपरेशन थिएटर मौजूद, लेकिन आईसीयू नहीं; पंचनामे में दर्ज हुई स्थिति
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि ग्लोबल हॉस्पिटल में ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध है, लेकिन आईसीयू की सुविधा नहीं है। अस्पताल में पैथोलॉजी संचालित मिली। इसके अलावा एक बीडीएस चिकित्सक भी अस्पताल में पाए गए और उनके पास मशीनें उपलब्ध थीं। टीम ने निरीक्षण के दौरान तैयार पंचनामे में चार मरीज भर्ती होने, मौके पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने, मोबाइल पर चिकित्सकीय परामर्श लेकर उपचार किए जाने और आईसीयू की अनुपलब्धता का उल्लेख किया। अब सवाल यह है कि पूर्व में जिन कमियों के आधार पर अस्पताल का पंजीयन और लाइसेंस अस्थायी रूप से निरस्त किया गया था, उनमें से कितनी कमियां वास्तव में दूर हुई हैं? आईसीयू की सुविधा अस्पताल की स्वीकृत सेवाओं और पंजीयन की शर्तों के तहत अनिवार्य थी या नहीं, यह संबंधित दस्तावेजों की जांच से स्पष्ट होगा। इसी तरह भर्ती मरीजों के उपचार के लिए चिकित्सकों की उपलब्धता और अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं का भी निर्धारित मानकों के आधार पर परीक्षण होना चाहिए।
राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों के बीच 10 मिनट में जांच खत्म, आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों?
इस पूरे मामले में सबसे अधिक सवाल स्वास्थ्य विभाग की जांच की अवधि को लेकर उठ रहे हैं। अस्पताल की पूर्व में पाई गई कमियों का सत्यापन करने पहुंची चार सदस्यीय टीम ने महज 10 मिनट में निरीक्षण पूरा कर लिया। जांच इतनी जल्दी समाप्त होने के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, अब तक किसी राजनीतिक व्यक्ति का नाम, हस्तक्षेप का ठोस प्रमाण या जांच प्रभावित होने की पुष्टि करने वाला आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिर भी जांच की अवधि को लेकर सवाल अपनी जगह हैं। क्या टीम ने पूर्व में जारी नोटिस में दर्ज प्रत्येक कमी का मौके पर सत्यापन किया? क्या भर्ती मरीजों के उपचार संबंधी रिकॉर्ड, चिकित्सकों की उपलब्धता और अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्थाओं की जांच की गई? क्या अस्पताल प्रबंधन के दावों का दस्तावेजों के आधार पर मिलान किया गया? इन सवालों का जवाब निरीक्षण रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा। राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए भी जरूरी है कि स्वास्थ्य विभाग जांच की पूरी प्रक्रिया और उसके निष्कर्ष स्पष्ट करे। यदि निरीक्षण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ है तो विभाग को यह बताना चाहिए कि इतने कम समय में किन-किन व्यवस्थाओं का सत्यापन किया गया।
पंचनामे में कमियां, संचालक का दावा—सब कुछ दुरुस्त
एक ओर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पंचनामे में डॉक्टर की अनुपलब्धता और आईसीयू नहीं होने की स्थिति दर्ज की है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल संचालक डॉ. आफाक उद्दीन का दावा है कि सभी कमियां दूर कर ली गई हैं। संचालक ने कहा, “आज जांच करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से टीम आई थी। जो कमियां थीं, उन्हें हमारे द्वारा पूरा कर लिया गया है। अभी कोई कमी नहीं पाई गई। सभी कमियां पूरी हो चुकी हैं।” अस्पताल संचालक के इस दावे और निरीक्षण के दौरान दर्ज तथ्यों के बीच अंतर है। अब स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट करना होगा कि अस्पताल में पाई गई वर्तमान स्थिति पंजीयन की निर्धारित शर्तों और मरीजों की सुरक्षा संबंधी मानकों के अनुरूप है या नहीं।
अब सीएमएचओ की रिपोर्ट और अगले निर्णय पर नजर
चार सदस्यीय जांच समिति अपनी रिपोर्ट सीएमएचओ डॉ. आरके वर्मा को सौंपेगी। इसके बाद अस्पताल के संचालन और पंजीयन को लेकर आगामी निर्णय लिया जाएगा। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के सामने दो महत्वपूर्ण विषय हैं। पहला, अस्पताल में पूर्व में पाई गई कमियों का वास्तविक निराकरण हुआ है या नहीं। दूसरा, रविवार को महज 10 मिनट में पूरी हुई जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप थी या नहीं। सबसे बड़ा सवाल: जिस अस्पताल में निरीक्षण के समय चार मरीज भर्ती मिले, लेकिन डॉक्टर उपलब्ध नहीं था, वहां मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी? स्वास्थ्य विभाग को अब यह भी स्पष्ट करना होगा कि पंचनामे में दर्ज तथ्यों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
ग्लोबल हॉस्पिटल की जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाला निर्णय ही स्पष्ट करेगा कि अस्पताल की व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों पर खरी उतरती हैं या अभी और सुधार की आवश्यकता है।



