बुरहानपुर। भीषण गर्मी के बीच बुरहानपुर जिले में जल संकट ने अब गंभीर रूप लेना शुरू कर दिया है। शहर से लेकर ग्रामीण और आदिवासी अंचलों तक पानी की किल्लत साफ दिखाई देने लगी है। हालात यह हैं कि जिले के 44 डेम में से अब सिर्फ 4 डेम में पानी बचा है, जबकि 409 हैंडपंप बंद पड़े हैं। जलावर्धन योजना और जल जीवन मिशन में हुई लापरवाही अब लोगों की परेशानी बनकर सामने आ रही है।
हालांकि प्रशासन और नगर निगम ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्थाएं शुरू कर दी हैं, जिससे स्थिति को बड़ी त्रासदी बनने से पहले कुछ हद तक नियंत्रित किया गया है। नगर निगम ने संभावित जल संकट से निपटने के लिए ट्यूबवेल सुधार, पाइपलाइन मरम्मत और अन्य जल प्रबंधन कार्यों के लिए करीब 91 लाख रुपए के टेंडर जारी किए हैं।
पुराने ट्यूबवेल चालू, कुओं से सप्लाई; फिर भी कई क्षेत्रों में संकट
नगर निगम के जल प्रभारी अशोक पाटिल ने बताया कि शहर में जल प्रदाय व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। जिन क्षेत्रों में पानी की ज्यादा समस्या थी, वहां पुराने ट्यूबवेल दोबारा चालू किए गए हैं। चिंचाला वार्ड में कुओं से भी पानी सप्लाई की जा रही है। इसके बावजूद उपनगर लालबाग की गांधी कॉलोनी और गुलाबगंज क्षेत्र में लोगों को अब भी पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि हफीज मंसूरी ने बताया कि वार्ड में फिलहाल टैंकरों के माध्यम से पानी सप्लाई किया जा रहा है।
धूलकोट-बोरी के आदिवासी अंचलों में हालात चिंताजनक
शहर के साथ-साथ जिले के आदिवासी क्षेत्र धूलकोट, बोरी और आसपास के इलाकों में भी पेयजल संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था प्रभावित है। लोगों का आरोप है कि पीएचई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पीएचई के जिला समन्वयक राजेश ठाकुर के अनुसार जिले में कुल 2389 हैंडपंप हैं, जिनमें से 409 हैंडपंप बंद हैं। वहीं जिले में 553 नलकूप हैं, जिनमें से 10 नलकूप बंद पड़े हैं। गर्मी बढ़ने के साथ भूजल स्तर नीचे जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में संकट और बढ़ने की आशंका है।
44 डेम में सिर्फ भावसा, मोतियादेव, धामनगांव और साजनी में पानी
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री बीएल मंडलोई ने बताया कि जिले में कुल 44 डेम हैं। इनमें से भीषण गर्मी के इस दौर में केवल भावसा, मोतियादेव, धामनगांव और साजनी डेम में ही पानी शेष बचा है। बाकी डेम सूख चुके हैं या उनमें उपयोग लायक पानी नहीं बचा है।
जल स्रोतों के तेजी से सूखने और तापमान लगातार बढ़ने से आने वाले दिनों में जल संकट और गंभीर हो सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने शहर, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में नियमित पेयजल आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।