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मुख्यमंत्री के बुरहानपुर प्रवास का असर: टेक्सटाइल हब की दौड़ में बुरहानपुर-खरगोन को मिली नई पहचान

अर्चना चिटनिस बोलीं—भोपाल में बनी वस्त्र निर्यात रणनीति निमाड़ के औद्योगिक भविष्य को देगी नई रफ्तार, किसानों-युवाओं और छोटे उद्यमियों को मिलेगा लाभ

On: May 8, 2026 7:55 PM
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बुरहानपुर-खरगोन को मिली नई औद्योगिक पहचान, टेक्सटाइल हब बनेगा निमाड़

बुरहानपुर।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बुरहानपुर प्रवास के बाद प्रदेश सरकार ने वस्त्र उद्योग क्षेत्र को लेकर जो राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार की है, उसमें बुरहानपुर और खरगोन को विशेष महत्व दिया गया है। इसे निमाड़ क्षेत्र के औद्योगिक भविष्य के लिए बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। विधायक, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अर्चना चिटनिस ने इस निर्णय को बुरहानपुर-खरगोन की औद्योगिक पहचान को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक अवसर बताया है।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बुरहानपुर प्रवास केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह क्षेत्र के उद्योगपतियों, उद्यमियों और स्थानीय हितधारकों से सीधा संवाद स्थापित करने का गंभीर प्रयास था। मुख्यमंत्री ने बुरहानपुर की वास्तविक औद्योगिक जरूरतों, स्थानीय समस्याओं और भविष्य की संभावनाओं को समझा। इसी संवाद और जमीनी फीडबैक का परिणाम है कि भोपाल में तैयार वस्त्र निर्यात रणनीति में बुरहानपुर और खरगोन को प्राथमिकता के साथ शामिल किया गया है।

2030 तक 5 अरब डॉलर वस्त्र निर्यात का लक्ष्य

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 5 अरब अमेरिकी डॉलर के वस्त्र निर्यात लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। यह केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश को वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने वाला रोडमैप है। इस रणनीति में बुरहानपुर को आकांक्षी जिला और खरगोन को चैंपियन जिला के रूप में विकसित करने का निर्णय निमाड़ क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता पर सरकार के भरोसे को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि बुरहानपुर और निमाड़ क्षेत्र सदियों से कपास, वस्त्र और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, विशेषकर कपास उत्पादन, वस्त्र उद्योग के लिए मजबूत आधार तैयार करती है। अब राज्य सरकार की नई नीति के तहत उत्पादन, प्रसंस्करण, डिजाइन, मूल्य संवर्धन और निर्यात की पूरी श्रृंखला को एकीकृत रूप से विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय उद्योगों को केवल प्रदेश या देश में ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।

कपास से कपड़ा और कपड़े से निर्यात तक बनेगी मजबूत श्रृंखला

नई रणनीति के तहत बुरहानपुर और खरगोन जैसे जिलों में कपास उत्पादन से लेकर कपड़ा निर्माण, प्रोसेसिंग, डिजाइनिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर जोर रहेगा। इसका सीधा लाभ किसानों, बुनकरों, लघु उद्योगों, प्रोसेसिंग यूनिटों, व्यापारियों और निर्यातकों को मिलेगा। स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार, आधुनिक तकनीक और निर्यात की सुविधा मिलने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उद्योग, कौशल विकास और वैश्विक बाजार को एक साथ जोड़कर काम कर रही है। वस्त्र उद्योग क्षेत्र में एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने, नए निर्यातकों को तैयार करने, आधुनिक परिवहन और लॉजिस्टिक व्यवस्था विकसित करने तथा साझा सुविधा केंद्र स्थापित करने जैसी योजनाएं प्रदेश को टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करेंगी।

मुख्यमंत्री से उद्योगपतियों का संवाद बना नीति का आधार

श्रीमती चिटनिस ने बताया कि बुरहानपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से प्रत्यक्ष संवाद किया था। इस दौरान क्षेत्र की औद्योगिक समस्याओं और जरूरतों पर गंभीर चर्चा हुई। श्रमिक उपलब्धता, ऊर्जा आपूर्ति, सौर ऊर्जा की संभावनाएं, औद्योगिक मार्गों का विकास, अनुदान व्यवस्था, निवेश प्रोत्साहन और निर्यात सुविधा जैसे विषय प्रमुखता से उठे थे। भोपाल में तैयार नीति में इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए बुरहानपुर और खरगोन को विशेष स्थान दिया गया है।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय इस बात का संकेत है कि प्रदेश सरकार अब बड़े औद्योगिक केंद्रों के साथ-साथ क्षेत्रीय क्षमता वाले जिलों को भी समान महत्व दे रही है। बुरहानपुर और खरगोन को विशेष फोकस में लाने से निमाड़ क्षेत्र की पुरानी औद्योगिक और व्यापारिक पहचान को आधुनिक स्वरूप मिलेगा।

युवाओं को रोजगार, किसानों को बेहतर दाम और उद्यमियों को नए अवसर

विधायक चिटनिस ने कहा कि वस्त्र उद्योग की यह कार्ययोजना बुरहानपुर और खरगोन के लिए बहुआयामी लाभ लेकर आएगी। इससे किसानों को कपास और अन्य कृषि उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार के अवसर मिलेंगे। छोटे और मध्यम उद्यमियों को नई तकनीक, बाजार और निर्यात से जुड़ने का मौका मिलेगा।

उन्होंने कहा कि यदि उत्पादन से निर्यात तक की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर मजबूत होती है, तो इससे पलायन कम होगा और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा। साथ ही महिलाओं, कारीगरों, बुनकरों और छोटे व्यापारियों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे। बुरहानपुर में पहले से मौजूद वस्त्र परंपरा को आधुनिक औद्योगिक ढांचे से जोड़कर यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

11 जिलों पर फोकस, बुरहानपुर आकांक्षी और खरगोन चैंपियन जिला

प्रदेश में टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 11 जिलों को चिन्हित किया गया है। इनमें सीहोर, रायसेन, धार, इंदौर, खरगोन, उज्जैन और भोपाल को चैंपियन जिले के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं जबलपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और बुरहानपुर को आकांक्षी जिले के रूप में शामिल किया गया है।

इन जिलों में उत्पादन, प्रोसेसिंग, डिजाइन, लॉजिस्टिक, बाजार संपर्क और निर्यात गतिविधियों को एकीकृत रूप से विकसित करने की रणनीति बनाई गई है। सरकार का उद्देश्य यह है कि प्रदेश के पारंपरिक वस्त्र क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक, कौशल विकास, निवेश और निर्यात सुविधाओं से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाए।

औद्योगिक मानचित्र पर मजबूत होगी निमाड़ की पहचान

श्रीमती अर्चना चिटनिस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व, उद्योगोन्मुख सोच और विकास के प्रति प्रतिबद्धता के कारण बुरहानपुर और खरगोन जैसे क्षेत्र मध्यप्रदेश के औद्योगिक मानचित्र पर नई और मजबूत पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह नीति निमाड़ क्षेत्र के लिए केवल उद्योग का अवसर नहीं, बल्कि रोजगार, कृषि, व्यापार और निर्यात को जोड़ने वाला विकास मॉडल है।

चिटनिस ने कहा कि आने वाले समय में बुरहानपुर और खरगोन वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में प्रदेश के प्रमुख केंद्रों के रूप में उभर सकते हैं। सरकार की यह पहल स्थानीय संसाधनों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में मजबूत कदम है।

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