Homeबुरहानपुरकंडम बसें सड़क पर, ‘जांच’ सिर्फ दिखावा!...

कंडम बसें सड़क पर, ‘जांच’ सिर्फ दिखावा! स्कूल बसों पर सख्ती, लेकिन असली खतरा नजरअंदाज

86 स्कूल बसों की जांच में नहीं मिली एक भी खामी, बिना बीमा-फिटनेस दौड़ रहीं दर्जनों बसें फिर भी कार्रवाई शून्य

बुरहानपुर। जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन की दोहरी कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक तरफ निजी स्कूलों की बसों पर बार-बार जांच अभियान चलाकर सख्ती का दिखावा किया जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर सड़कों पर दौड़ रहीं कंडम और अनफिट बसों पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

Sadaiv News
बुरहानपुर में स्कूल बसों की जांच के दौरान अधिकारी

शनिवार को कलेक्टर हर्ष सिंह के निर्देश पर जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के निजी स्कूलों की 86 बसों की जांच की। इस दौरान बसों के फायर उपकरण तक चेक किए गए और सुप्रीम कोर्ट व माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 18 सुरक्षा मानकों की जानकारी संचालकों को दी गई।

जांच हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं!

जांच टीम में सिटी मजिस्ट्रेट राजेश पाटीदार, तहसीलदार प्रवीण ओहरिया, नीतू मंडलोई, दिनेश भेवंदिया और परिवहन विभाग के अधिकारी शामिल रहे। नेहरू मांटेसरी, अर्वाचीन इंडिया स्कूल, मेक्रो विजन एकेडमी सहित कुल 86 बसों की जांच में परमिट, बीमा, फिटनेस, पीयूसी, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी जांच में एक भी बस में खामी नहीं पाई गई और न ही किसी पर कार्रवाई की गई। इससे पूरे अभियान की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सड़कों पर कंडम बसों का खतरा बरकरार

हकीकत यह है कि जिले में बड़ी संख्या में ऐसी बसें संचालित हो रही हैं जो या तो अनफिट हैं या बिना बीमा के दौड़ रही हैं। इनमें कई बसें तो इतनी जर्जर हालत में हैं कि उन्हें सड़कों पर चलाना सीधे तौर पर यात्रियों की जान जोखिम में डालना है। इसके बावजूद परिवहन विभाग की ओर से इन बसों के खिलाफ कोई नियमित अभियान या ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।

हादसे के बाद ही जागता है सिस्टम

जिले में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच केवल बड़े हादसों के बाद ही क्यों होती है? ग्रामीण क्षेत्रों और लंबी दूरी की बसों की हालत लंबे समय से खराब बनी हुई है, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

छुट्टियों से पहले ‘औपचारिकता’?

स्कूलों में जल्द ही गर्मी की छुट्टियां लगने वाली हैं। ऐसे में प्रशासन ने स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि छुट्टियों के दौरान सभी कमियां दूर कर ली जाएं। लेकिन जिस तरह से बिना किसी कार्रवाई के जांच पूरी कर ली गई, उसे लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह अभियान सिर्फ ‘औपचारिकता’ बनकर रह गया?

नियम सख्त, अमल ढीला

स्कूल संचालकों को सुप्रीम कोर्ट और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के मापदंडों से अवगत कराते हुए 18 बिंदुओं की सख्त गाइडलाइन तय कर रखी है। फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य, फायर सेफ्टी उपकरण, जीपीएस और सीसीटीवी, प्रशिक्षित ड्राइवर और हेल्पर। लेकिन जब जांच में ही सब ‘ठीक’ बता दिया जाए, तो नियमों का क्या मतलब?

बस की नियमित और निष्पक्ष जांच जरुरी

स्कूल बसों पर सख्ती जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है सड़कों पर दौड़ रहीं हर बस की नियमित और निष्पक्ष जांच। जब तक कंडम और अनफिट बसों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे अभियान केवल कागजों में ही सुरक्षा सुनिश्चित करते रहेंगे।

 

spot_img
spot_img
spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles