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बहादरपुर सूत मिल गेट पर मजदूरों की ‘उम्मीदों की अर्थी’: 28 साल से पेंशन-ग्रेच्युटी के इंतजार में मजदूर

- 15 दिन में फैसला नहीं तो भोपाल घेराव की चेतावनी

On: May 1, 2026 4:30 PM
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बुरहानपुर। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर जहां देशभर में मजदूरों के सम्मान और अधिकारों की बातें हो रही थीं, वहीं बुरहानपुर में मजदूरों का दर्द सड़क पर उतर आया। बहादरपुर सूत मिल के मुख्य गेट पर बुरहानपुर मजदूर यूनियन ने अनोखा और भावनात्मक प्रदर्शन करते हुए मजदूरों की ‘उम्मीदों की अर्थी’ निकाली। यह प्रदर्शन यूनियन अध्यक्ष ठाकुर प्रियांक सिंह के नेतृत्व में किया गया।

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बहादरपुर सूत मिल के मुख्य गेट पर मजदूरों ने ‘उम्मीदों की अर्थी’ निकालकर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने नारेबाजी करते हुए शासन-प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया। मजदूरों का कहना था कि बहादरपुर सूत मिल बंद हुए करीब 28 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी सैकड़ों मजदूर अपनी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य बकाया फंड के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

जवानी से बुढ़ापे तक इंतजार, फिर भी नहीं मिला हक

बहादरपुर सूत मिल वर्ष 1998-99 में बंद हुई थी। मिल बंद होने के बाद से मजदूर लगातार अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि जिन हाथों ने वर्षों तक मिल को चलाया, उन्हीं हाथों को आज अपने ही हक के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

यूनियन अध्यक्ष ठाकुर प्रियांक सिंह ने कहा कि यह अर्थी सिर्फ प्रतीक नहीं है, बल्कि उन मजदूरों की आवाज है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन मिल में खपा दिया और बकाया राशि मिलने से पहले ही गरीबी व बीमारी से दुनिया छोड़ दी। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन की फाइलों में मजदूरों का भविष्य दबकर दम तोड़ चुका है।

प्रियांक सिंह बोले- 28 साल का लंबा इंतजार, अब तो जागो सरकार

प्रियांक सिंह ने कहा कि बहादरपुर सूत मिल के मजदूर 28 वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। कई मजदूरों की उम्र अब ढल चुकी है। कुछ मजदूर इस उम्मीद में दुनिया से चले गए कि एक दिन उनका हक मिलेगा, लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि मजदूरों की पेंशन, ग्रेच्युटी और फंड की राशि केवल आर्थिक मामला नहीं है, बल्कि यह मजदूर परिवारों के सम्मान, जीवन और भविष्य से जुड़ा सवाल है।

हुकुमचंद मिल जैसा न्याय बुरहानपुर को क्यों नहीं?

प्रदर्शन के दौरान यूनियन ने इंदौर की हुकुमचंद मिल का उदाहरण देते हुए सरकार से सवाल किया। प्रियांक सिंह ने कहा कि जब इंदौर की हुकुमचंद मिल के मजदूरों को करोड़ों रुपए का भुगतान किया जा सकता है, तो बुरहानपुर के मजदूरों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग तत्काल दखल दे। मिल की जमीन का निस्तारण कर मजदूरों के बकाया करीब 56 करोड़ रुपए ब्याज सहित भुगतान किए जाएं।

प्रशासन की संवेदनहीनता के खिलाफ बिगुल: विनोद लौंढे

प्रदर्शन में शामिल विनोद लौंढे ने कहा कि प्रशासन मजदूरों के अधिकारों को कुचल रहा है। उन्होंने कहा कि आज का यह अर्थी प्रदर्शन प्रशासन की संवेदनहीनता के खिलाफ बिगुल है। मजदूर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस आदेश और भुगतान चाहते हैं।

15 दिन में आदेश नहीं तो भोपाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव

प्रदर्शन के अंत में बुरहानपुर मजदूर यूनियन ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर बहादरपुर सूत मिल मजदूरों के बकाये को लेकर कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ, तो मजदूर राजधानी भोपाल कूच करेंगे। यूनियन ने कहा कि मजदूर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और अपने हक की लड़ाई को और तेज करेंगे। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने ‘मजदूर एकता जिंदाबाद’ और ‘हमारा हक हमें दो’ के नारे लगाए, जिससे मिल परिसर गूंज उठा।

इस अवसर पर मुकेश अरुण, श्रीराम मेढे, शेख सत्तार, शेख रहमान, कैलाश पहलवान, सैयद कादिर, केशव तायड़े, विनोद लौंढे, मुकेश पवार सहित यूनियन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पीड़ित मजदूर मौजूद रहे।

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