बुरहानपुर। खंडवा जिले में मस्जिद में बिना सूचना बिहार से आए इमाम को ठहराने पर दर्ज केस ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई को संविधान के आर्टिकल 19 का उल्लंघन बताया था। अब खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी हमेशा जातिगत राजनीति करते हैं और कानून पर सवाल उठाकर लोगों को गुमराह करते हैं।
यह है पूरा मामला
दरअसल खंडवा के खारकलां गांव की मस्जिद में सदर हाजी हनीफ खान ने बिहार निवासी अख्तर रजा (35) को ठहराया था। जिला दंडाधिकारी के आदेशों के अनुसार धारा 144 लागू होने की स्थिति में बाहरी व्यक्ति के ठहरने की सूचना थाने को देना अनिवार्य था। नियम तोड़े जाने पर पुलिस ने 9 सितंबर को सदर और इमाम दोनों पर धारा 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना) के तहत केस दर्ज किया।
ओवैसी का बयान
रविवार को ओवैसी ने मजलिस के सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो पोस्ट कर कहा खंडवा पुलिस ने मस्जिद में बिहार से आए इमाम को ठहराने पर केस दर्ज कर लिया। क्या खंडवा एसपी को आर्टिकल 19 नहीं पढ़ना चाहिए? हर भारतीय को देश में कहीं भी आने-जाने और रहने की आज़ादी है।
सांसद का जवाब
बुरहानपुर में पीएम मोदी के जन्मदिन कार्यक्रम की बैठक के बाद सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने मीडिया से कहा— प्रशासन ने सोच-समझकर कार्रवाई की होगी। ओवैसी हमेशा जातिगत राजनीति करते हैं और अपना मकसद साधते हैं। अगर एफआईआर गलत दर्ज हुई है तो कोर्ट का रास्ता खुला है। वहां साक्ष्य रखकर इसे खारिज कराया जा सकता है।
पुलिस की सफाई
खंडवा एसपी मनोज कुमार राय ने कहा— धारा 144 लागू होने पर बाहरी व्यक्तियों की जानकारी थाने को देना अनिवार्य है। यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन लोग इसका पालन नहीं करते। इसलिए कार्रवाई की गई।
सियासी तकरार तेज़
यह मुद्दा अब केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। ओवैसी ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया तो वहीं सांसद पाटील ने इसे प्रशासनिक निर्णय और कानून-व्यवस्था का मामला करार दिया। आने वाले दिनों में यह मामला संसदीय राजनीति बनाम अल्पसंख्यक राजनीति के रूप में और तूल पकड़ सकता है।