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हत्या का केस पलटा: शिवानी जिंदा मिली, 24 दिन जेल में रहे पिता-भाई को मिली जमानत; महाराष्ट्र पुलिस की जांच पर उठे गंभीर सवाल

जिंदा बेटी, जेल में पिता-भाई: 24 दिन बाद खुली ‘हत्या’ की कहानी, अब जली लाश बनी सबसे बड़ा राज

बुरहानपुर। कहानी की शुरुआत एक बेटी की गुमशुदगी से हुई। फिर महाराष्ट्र में एक जली हुई सिरकटी लाश मिली। पुलिस ने शव को उसी लापता बेटी का मान लिया। पिता और भाई पर हत्या का केस दर्ज हुआ और दोनों को जेल भेज दिया गया। लेकिन 24 दिन बाद पूरी कहानी फिल्मी मोड़ पर आकर पलट गई। जिस बेटी की हत्या मानकर पिता और भाई को बुलढाणा जेल भेजा गया था, वही शिवानी कलमेकर जिंदा घर लौट आई।

शनिवार को महाराष्ट्र की जलगांव कोर्ट से शिवानी के पिता बापूराव कलमेकर और भाई अजय कलमेकर को जमानत मिल गई। दोनों 24 दिनों से बुलढाणा जेल में बंद थे। घर लौटने के बाद उन्होंने किसी पर आरोप लगाने के बजाय कहा—मराठी समझ नहीं आ रही थी, इसलिए हमने खुद जुर्म स्वीकार कर लिया।

22 अप्रैल को लापता हुई शिवानी, 1 मई को दर्ज हुई गुमशुदगी

खकनार थाना क्षेत्र के ग्राम खड़की निवासी आदिवासी युवती शिवानी 22 अप्रैल को अचानक लापता हो गई थी। परिजन ने गांव, रिश्तेदारी और आसपास के क्षेत्रों में तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद 1 मई को खकनार थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि शिवानी के साथ क्षेत्र का एक युवक भी लापता था और वह उसके साथ रह रही थी। मामला गुमशुदगी का था, लेकिन इसी बीच महाराष्ट्र से आई एक सूचना ने पूरी जांच की दिशा बदल दी।

महाराष्ट्र में मिली जली सिरकटी लाश, पुलिस ने शिवानी मान लिया

गुमशुदगी दर्ज होने के कुछ दिन बाद महाराष्ट्र के जलगांव जामोद क्षेत्र में एक युवती की जली हुई और सिर कटी लाश मिली। शव की हालत ऐसी थी कि पहचान करना मुश्किल था। महाराष्ट्र पुलिस ने सीसीटीएनएस पर दर्ज ऑनलाइन गुमशुदगी रिकॉर्ड खंगाले और बुरहानपुर के खकनार क्षेत्र से लापता शिवानी की जानकारी सामने आई। इसके बाद जलगांव जामोद पुलिस बुरहानपुर पहुंची। खकनार थाने से जानकारी जुटाई गई और फिर महाराष्ट्र पुलिस ने दावा किया कि बरामद शव शिवानी का है। इसी दावे ने पिता और भाई की जिंदगी को जेल की सलाखों तक पहुंचा दिया।

पिता-भाई पर हत्या का केस, दोनों भेजे गए बुलढाणा जेल

महाराष्ट्र पुलिस ने शिवानी के पिता बापूराव और भाई अजय को हिरासत में लिया। पूछताछ हुई। इसके बाद दोनों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को बुलढाणा जेल भेज दिया गया। परिवार पर बेटी की हत्या का आरोप लगा। गांव में बदनामी शुरू हुई और पिता-बेटा 24 दिनों तक जेल में बंद रहे। इस बीच शिवानी को कहीं से यह जानकारी मिली कि उसकी कथित हत्या के मामले में उसके पिता और भाई जेल में हैं। इसके बाद उसने परिजन से संपर्क किया। यहीं से कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट सामने आया—शिवानी जिंदा थी।

थंब इंप्रेशन और आधार से हुई पहचान, पुलिस भी चौंकी

शिवानी के सामने आने के बाद खकनार पुलिस ने उसकी पहचान की पुष्टि के लिए आधार कार्ड और थंब इंप्रेशन से जांच की। जांच में स्पष्ट हुआ कि युवती वास्तव में शिवानी ही है। परिजनों के सामने पहचान पंचनामा भी बनाया गया। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस शिवानी और उससे जुड़े युवक को अपने साथ जलगांव जामोद ले गई। शुक्रवार को शिवानी घर लौट आई और शनिवार को उसके पिता व भाई को जमानत मिल गई।

पिता बोले—टॉर्चर नहीं किया, मराठी समझ नहीं आई

जेल से बाहर आने के बाद बापूराव कलमेकर और उनके बेटे अजय ने मीडिया से कहा कि वे किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहते। बापूराव ने कहा कि पहले ही परिवार की बदनामी हो चुकी है। पूछताछ के दौरान पुलिस मराठी में बात कर रही थी, जो उन्हें समझ नहीं आ रही थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद ही जुर्म स्वीकार कर लिया था। बापूराव ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र पुलिस ने उनके साथ कोई खराब व्यवहार या टॉर्चर नहीं किया। उन्होंने कहा—हमने कुबूल किया, इसलिए गलती हमारी थी। बेटे अजय ने भी पिता की बात को सही बताया।

अब सवालों की लंबी कतार: वह लाश किसकी थी?

शिवानी के जिंदा मिलने के बाद पूरे केस की सबसे बड़ी गुत्थी अब भी बाकी है। जलगांव जामोद में मिली जली हुई और सिर कटी लाश आखिर किसकी थी? यदि वह शिवानी नहीं थी, तो उस युवती की पहचान क्या है? क्या उसकी हत्या हुई? क्या किसी अन्य परिवार की बेटी अब भी लापता है? महाराष्ट्र पुलिस अब इन सवालों की जांच में जुटी है। बताया जा रहा है कि मामले में जांच से जुड़े कुछ पुलिस अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।

24 दिन की जेल, परिवार पर जिंदगीभर का दाग

शिवानी के घर लौटने और पिता-भाई को जमानत मिलने के बाद कानूनी राहत जरूर मिली है, लेकिन 24 दिन की जेल और बेटी की हत्या के आरोप का दाग परिवार के लिए गहरा सदमा है। यह मामला पुलिस जांच की संवेदनशीलता, शव की पहचान की प्रक्रिया और भाषा न समझ पाने वाले आरोपियों से पूछताछ जैसे गंभीर सवाल भी खड़े करता है। फिलहाल शिवानी जिंदा है, पिता-भाई जेल से बाहर हैं, लेकिन जलगांव जामोद की जली सिरकटी लाश अब भी इंसाफ की सबसे बड़ी पहेली बनकर सामने खड़ी है। जब तक उस शव की असली पहचान नहीं हो जाती, यह कहानी अधूरी रहेगी।

ये भी पढ़े- जिसे मृत बताकर पिता-भाई को जेल भेजा, वही शिवानी जिंदा मिली: महाराष्ट्र पुलिस की जांच पर बड़ा सवाल

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