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पहाड़ों से पानी ढोता नादियामाल… विकास के दावों की जमीनी सच्चाई बेनकाब

— 250 परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित, सड़क-बिजली-स्कूल तक नहीं… उबल रहा आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

बुरहानपुर। जिले की नेपानगर तहसील का नादियामाल गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। ग्राम पंचायत बाकड़ी के अंतर्गत आने वाला यह गांव शासन के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। यहां रहने वाले करीब 200 से 250 परिवार आज भी पानी, सड़क, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

पानी के लिए पहाड़ चढ़ना—हर दिन की मजबूरी
Sadaiv News
नादियामाल में पानी के लिए रोज संघर्ष

नादियामाल में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। गांव में पेयजल का कोई स्थायी स्रोत नहीं है, जिसके चलते ग्रामीणों को रोजाना पहाड़ी क्षेत्रों से पानी लाना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ रही है, घंटों पैदल चलकर पानी लाना उनकी दिनचर्या बन चुका है। बरसात के दिनों में यह सफर और खतरनाक हो जाता है। फिसलन भरे रास्तों पर हादसों का खतरा बना रहता है, फिर भी पानी की मजबूरी उन्हें जान जोखिम में डालने पर मजबूर कर रही है।

सड़क नहीं तो ‘जिंदगी ठप’—गांव पूरी तरह कटा

गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। बारिश में नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं और नादियामाल का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस तक गांव नहीं पहुंच पाती। गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति किसी खतरे से कम नहीं है। कई बार समय पर इलाज न मिलने से जान जाने का खतरा बना रहता है।

अंधेरे में गांव, भविष्य पर ‘ब्लैकआउट’

नादियामाल में बिजली की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं सुरक्षा के लिहाज से भी हालात चिंताजनक हैं। डिजिटल युग में जहां गांव-गांव इंटरनेट और स्मार्ट क्लास की बात हो रही है, वहीं नादियामाल के बच्चे आज भी रोशनी के लिए तरस रहे हैं।

न आंगनवाड़ी, न स्कूल—‘शिक्षा से वंचित बचपन’

गांव में न तो आंगनवाड़ी केंद्र है और न ही कोई प्राथमिक या माध्यमिक विद्यालय। इस कारण बच्चों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है या फिर दूर-दराज के गांवों तक जोखिम उठाकर जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन की योजनाएं सिर्फ कागजों में नजर आती हैं, जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं पहुंचा।

वर्षों की अनदेखी, अब फूटा आक्रोश

रविवार को गांव में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला—समाधान नहीं। अब ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों की सीधी मांग—अब ‘एक्शन’ चाहिए

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  • नादियामाल का तत्काल सर्वे कराया जाए
  • पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाए
  • सड़क निर्माण कार्य प्राथमिकता से शुरू हो
  • बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए
  • आंगनवाड़ी व स्कूल की स्थापना की जाए
  • स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए
सिस्टम की हकीकत!

नादियामाल की यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की हकीकत है जहां विकास के दावे जमीनी स्तर पर दम तोड़ते नजर आते हैं। अब बड़ा सवाल- क्या प्रशासन जागेगा या फिर ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर उतरकर ‘आंदोलन’ की शक्ल लेगा?

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