बुरहानपुर। किसानों को उर्वरक वितरण में अब मनमानी और गड़बड़ी पर सीधा प्रहार हुआ है। 1 अप्रैल से जिले में खाद वितरण पूरी तरह ‘ई-विकास प्रणाली’ से होगा। यानी अब बिना डिजिटल एंट्री के उर्वरक मिलना संभव नहीं होगा।
कलेक्टर हर्ष सिंह के मार्गदर्शन में लागू की जा रही इस नई व्यवस्था को लेकर कृषि विभाग ने कमर कस ली है। कृषि उपज मंडी के केला नीलामी सभागृह में आयोजित प्रशिक्षण में विक्रेताओं को स्पष्ट कर दिया गया।अब हर बोरी खाद सिस्टम से ही निकलेगी, गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
उपसंचालक कृषि एम.एस. देवके ने प्रशिक्षण में पूरी प्रक्रिया समझाई। किसान की जानकारी ऑनलाइन दर्ज होगी। फसल के अनुसार उर्वरक की अनुशंसा तय होगी। उसी आधार पर टार्गेटेड वितरण किया जाएगा।हर ट्रांजैक्शन का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा। मतलब साफ—अब न ज्यादा मिलेगा, न कम… जितनी जरूरत, उतना ही खाद।
कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन
अब तक जिले में उर्वरक वितरण को लेकर कई शिकायतें सामने आती रही हैं जरूरतमंद किसान को खाद नहीं मिलना। अधिक दाम वसूलना और स्टॉक छिपाकर कालाबाजारी करना। नई प्रणाली इन सभी गड़बड़ियों पर सीधा ब्रेक लगाएगी। हर बिक्री रिकॉर्ड में रहेगी, इसलिए अनियमितता पकड़ी भी जाएगी और रोकी भी जाएगी।
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
नई व्यवस्था से किसानों को कई स्तर पर राहत मिलेगी। फसल के अनुसार वैज्ञानिक उर्वरक, समय पर और सटीक मात्रा में सप्लाई। लाइन और भटकाव से छुटकारा। साथ ही उत्पादन बढ़ाने में मदद यानी अब खेती भी होगी डेटा बेस्ड और स्मार्ट।
प्रशिक्षण में जुटा पूरा अमला
प्रशिक्षण कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी प्रताप सिंह जमरे, एसएडीओ राम पाटिल, जिला विपणन अधिकारी संदीप इंगले, कृषि विस्तार अधिकारी जे.एस. चौहान सहित बड़ी संख्या में विक्रेता मौजूद रहे। सभी को साफ निर्देश “1 अप्रैल से नई व्यवस्था में कोई ढिलाई नहीं चलेगी।”
प्रशासन का सख्त संदेश
- पारदर्शिता से समझौता नहीं
- सिस्टम से बाहर कोई लेन-देन नहीं
- गड़बड़ी पर सीधी कार्रवाई
ग्राउंड इम्पैक्ट क्या होगा? (विश्लेषण)
- जिले में उर्वरक वितरण होगा पूरी तरह कंट्रोल्ड और ट्रैक्ड
- किसानों का भरोसा बढ़ेगा
- कृषि उत्पादन में गुणात्मक सुधार
- सरकारी योजनाओं का रियल इम्पैक्ट दिखेगा