बुरहानपुर। शाहपुर रेंज के जंगलों में पिछले 9 दिनों से वन विभाग एक बेहद संवेदनशील और गोपनीय मिशन पर काम कर रहा था। मिशन था—मां को खो चुके दो मासूम तेंदुआ शावकों को सुरक्षित ढूंढ निकालना। आखिरकार वन विभाग की मेहनत रंग लाई और ड्रोन, नाइट विजन कैमरे, ट्रैप कैमरों तथा लगातार जंगल सर्चिंग की मदद से दोनों 4 माह के अनाथ शावकों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। अब दोनों शावकों को राष्ट्रीय वन विहार भोपाल के रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया गया है, जहां वे बालिग होने तक विशेषज्ञ निगरानी में रहेंगे। पूरे अभियान में बुरहानपुर डीएफओ विद्याभूषण सिंह ने व्यक्तिगत रुचि लेते हुए लगातार मॉनिटरिंग की। वन विभाग की टीम ने शाहपुर रेंज के घने जंगलों, खेतों और संभावित मूवमेंट वाले क्षेत्रों में लगातार 9 दिनों तक हाईटेक सर्च ऑपरेशन चलाया।
दरअसल, 9 मई 2026 को शाहपुर रेंज के राजस्व ग्राम नागोनी स्थित एक केले के खेत में एक मादा तेंदुए का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पशु चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम कराने के बाद एसओपी के तहत अंतिम संस्कार की कार्रवाई की गई। इसी दौरान ग्रामीणों और वन अमले को जानकारी मिली कि मृत मादा तेंदुए के साथ दो छोटे शावक भी देखे गए थे। इससे वन विभाग की चिंता बढ़ गई, क्योंकि मां के बिना इतने छोटे शावकों का जंगल में जिंदा रह पाना बेहद मुश्किल माना जाता है।
डीएफओ ने खुद संभाली मॉनिटरिंग, जंगल में शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ विद्याभूषण सिंह ने तत्काल शाहपुर रेंजर और विशेष टीम को अलर्ट मोड पर लगाया। 9 मई से लगातार जंगल में गोपनीय तरीके से सर्चिंग शुरू की गई। टीम ने न केवल जंगलों में पैदल गश्त की, बल्कि आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया। ड्रोन कैमरों से ऊपर से निगरानी रखी गई, जबकि रात में मूवमेंट पकड़ने के लिए नाइट विजन कैमरों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा वन विभाग द्वारा पहले से लगाए गए ट्रैप कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। कई दिनों तक कोई स्पष्ट लोकेशन नहीं मिलने से टीम की चिंता बढ़ती रही, लेकिन ऑपरेशन जारी रखा गया।
ट्रैप कैमरे में दिखी हलचल, फिर लगाया गया पिंजरा
लगातार निगरानी के दौरान एक स्थान पर शावकों की मूवमेंट नजर आने के बाद वन विभाग ने वहां रणनीतिक तरीके से पिंजरा लगाया। वन अमले की मेहनत आखिरकार सफल हुई और 17 मई को पहला शावक पिंजरे में सुरक्षित पहुंच गया। इसके अगले ही दिन 18 मई को दूसरा शावक भी उसी क्षेत्र में लगाए गए पिंजरे में आ गया। दोनों शावकों को तत्काल सुरक्षित निकालकर पशु चिकित्सकों की टीम के पास ले जाया गया, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच में दोनों शावक स्वस्थ पाए गए। उनकी उम्र करीब 4-4 माह बताई गई है।
भोपाल रेस्क्यू सेंटर में होगी विशेष देखभाल
रेस्क्यू के बाद बुरहानपुर एसडीओ अजय सागर और वन विभाग की टीम दोनों शावकों को राष्ट्रीय वन विहार भोपाल के रेस्क्यू सेंटर लेकर पहुंची। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों और वन्यजीव विशेषज्ञों की निगरानी में उनकी देखभाल की जाएगी। डीएफओ विद्याभूषण सिंह ने बताया कि मां की मौत के बाद दोनों शावक जंगल में अकेले भटक रहे थे। ऐसे में उन्हें प्राकृतिक परिस्थितियों में छोड़ना सुरक्षित नहीं था। लोगों से मिली सूचना, ट्रैप कैमरों और तकनीकी निगरानी की मदद से दोनों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। उन्होंने बताया कि बालिग होने के बाद दोनों शावकों को फिर से जंगल में छोड़ा जाएगा।
वन विभाग की कार्रवाई की हो रही सराहना
वन विभाग द्वारा चलाए गए इस हाईटेक और संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन की जिलेभर में सराहना हो रही है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो दोनों शावकों की जान खतरे में पड़ सकती थी। आधुनिक तकनीक और सतत मॉनिटरिंग के जरिए वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण की एक मजबूत मिसाल पेश की है।