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लोखंडिया के मोती माता मंदिर में कलश स्थापना के साथ पंच कुंडीय यज्ञ का आयोजन 

तीन दिवसीय सत्संग के साथ राजस्थान के प्रसिद्ध कलाकार मोइनुद्दीन, मथरूम मनचला का भजन संध्या का आयोज कार्यक्रम में प्लास्टिक पर प्रतिबंध, तांबे-पीतल के लोटे से होगा पानी वितरण डोईफोड़िया। ग्राम लोखंडिया के स्वंयम्भू मोती माता मंदिर परिसर में कलश स्थापना एवं तीन दिवसीय पंचकुंडीय देवी यज्ञ का आयोजन सोमवार सुबह से भव्य कलश यात्रा […]

डोईफोड़िया। ग्राम लोखंडिया के स्वंयम्भू मोती माता मंदिर परिसर में कलश स्थापना एवं तीन दिवसीय पंचकुंडीय देवी यज्ञ का आयोजन सोमवार सुबह से भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू होगा। जिसको लेकर मोती माता मंदिर ट्रस्ट समिति की तैयारी पूर्ण हो गई है। सोमवार शाम 6 बजे से तीन दिवसीय देवी भागवत सत्संग का आयोजन होंगा। जिसमें कथाकार राष्ट्रीय संत श्री लक्ष्मण चैतन्य बापू जी के कृपा पात्र शिष्य संत श्री सुखदेव चैतन्य बापूजी होंगे।
मोती माता ट्रस्ट अध्यक्ष लक्ष्मण झामु पवार ने बताया कार्यक्रम के प्रथम दिवस सोमवार को सुबह 8 बजे से मंडल देवता स्थापना,अग्नि स्थापना,101 कन्याओ द्वारा कलश यात्रा निकाली जाएगी। दूसरे दिन मंगलवार को स्थापित देवताओ का पूजन अभिषेक एवं हवन पुष्पाधिवास, शय्याधिवास होंगा। बुधवार को स्थापित देवता पूजन, कलश प्रतिष्ठा, नवचंडी, पूर्ण आहुति होने के बाद महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम के समापन पर भजन संध्या
कार्यक्रम की संयोजक विजय देवराम राठौड़ ने बताया कि 30 अप्रैल को भजन संध्या में राजस्थान के प्रसिद्ध भजन गायक मोइनुद्दीन मनचला एवं मथरूम मनचला माता की भक्ति गीतों से अपनी प्रस्तुति देंगे।
पंच कुंडीय देवी महायज्ञ के लिए कुटिया और यज्ञ कुंड तैयार, लागत 1 लाख
मोती माता मंदिर के ट्रस्ट सदस्य ईश्वर जाधव ने बताया पंच कुंडीय देवी महायज्ञ के लिए कुटिया और यज्ञ कुंड तैयार करने के 1 महीने का समय लगा जिसमें बांस, लकड़ी, घास, चंदन की लकड़ी, टट्टे, गाय के गोबर से लेपन किया गया।
कुटिया 25 फिट चौड़ी और 25 फिट लंबी है। जिसे जिले के एवं राजस्थान के कारागिरो ने तैयार किया है।
कार्यक्रम में प्लास्टिक पर प्रतिबंध तांबे एवं पीतल के लोटे से पानी होगा वितरण
मोती माता मंदिर ट्रस्ट समिति ने कार्यक्रम में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया गया है। कथा स्थल पर किसी भी प्रकार की प्लास्टिक की वस्तु का उपयोग नही होंगा। श्रद्धालुओं के लिए 200 तांबे-पीतल के लोटे की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को प्लास्टिक ना उपयोग करने के लिए प्रेरित करेंगे।

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