बुरहानपुर। नगर पालिका परिषद नेपानगर की पीआईसी बैठक अब सियासी बवाल में बदल गई है। खास बात यह है कि विरोध विपक्ष ने नहीं, बल्कि खुद सत्तारूढ़ दल की महिला पार्षदों ने ही अपनी अध्यक्ष भारती विनोद पाटिल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बैठक में रखे गए 20 प्रस्तावों को लेकर उठे विवाद ने नपा की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल महिला पार्षदों का आरोप है कि पीआईसी बैठक में एजेंडे के 20 बिंदुओं में से सिर्फ वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट ही सर्वसम्मति से पास हुआ, जबकि शेष 19 प्रस्तावों पर न चर्चा हुई, न सहमति बनी। इसके बावजूद अध्यक्ष द्वारा सभी प्रस्ताव पारित होने का दावा करना विवाद की जड़ बन गया है।
जल्दबाजी में एजेंडा पास कराने की कोशिश?
पार्षद योगिता पाटिल ने आरोप लगाया कि बैठक में एजेंडे को जल्दबाजी में पारित कराने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में पहले ही खरीदी कर ली गई और बाद में रेट स्वीकृति के प्रस्ताव लाए गए—जो पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सीएमओ के रवैये पर भी बवाल
पार्षदों ने सीएमओ मोहन सिंह अलावा पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि जब फाइलें मांगी गईं तो सीएमओ ने “फालतू बातें मत करो” जैसा गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के सम्मान के खिलाफ है।
महिला पार्षदों की एकजुटता, पहले भी कर चुकीं विरोध
यह पहला मौका नहीं है जब महिला पार्षदों ने विरोध जताया हो। इससे पहले भी वे अध्यक्ष और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के खिलाफ 10 दिन तक धरने पर बैठ चुकी हैं। तब दबाव के बाद उनके वार्डों में विकास कार्य शुरू हुए थे।
फाइलें नहीं, तो चर्चा कैसे?
पार्षद वर्षा ठाकरे ने खुलासा किया कि बैठक में केवल तीसरे बिंदु तक ही चर्चा हो सकी। इसके बाद जरूरी फाइलें उपलब्ध नहीं होने के कारण आगे के मुद्दों पर चर्चा ही नहीं हो पाई, जिससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह और गहरा गया।
दो टूक: विकास के खिलाफ नहीं, मनमानी के खिलाफ
महिला पार्षदों—अनीशा पटेल, सपना पटेल, वर्षा ठाकरे समेत अन्य ने साफ कहा कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन अपारदर्शी और मनमानी कार्यशैली किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं। उन्होंने मांग की कि शेष 19 प्रस्तावों को अगली बैठक में पूरी पारदर्शिता के साथ दोबारा रखा जाए और सभी फाइलें पार्षदों के सामने प्रस्तुत हों।
अध्यक्ष vs पार्षद—बयानबाजी से बढ़ा टकराव
विवाद तब और तेज हो गया जब नपा अध्यक्ष भारती विनोद पाटिल ने दावा किया कि बजट और सभी प्रस्ताव पास हो चुके हैं। वहीं महिला पार्षदों ने इसे “गलत बयानबाजी” बताते हुए कहा कि उन्होंने केवल बजट पर सहमति दी थी, प्रस्तावों पर नहीं।
राजनीतिक मायने: अंदरूनी कलह से विकास पर असर?
नपा की इस अंदरूनी कलह ने यह साफ कर दिया है कि सत्ता पक्ष के भीतर ही मतभेद गहराते जा रहे हैं। यदि स्थिति जल्द नहीं सुलझी, तो इसका सीधा असर शहर के विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों पर पड़ सकता है।