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संघ @100 संगोष्ठी : समाज के विकास में जाति भेद सबसे बड़ी बाधा है- प्रवीण गुप्त

- प्रबुद्धजन संगोष्ठी में राष्ट्र सर्वोपरि का मंत्र गूंजा, समरसता और पंच परिवर्तन से नए भारत का आह्वान

बुरहानपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की “100 वर्ष की संघ यात्रा” के अंतर्गत आयोजित प्रबुद्धजन संगोष्ठी में रविवार को शहर वैचारिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। स्व. परमानंदजी गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में हुए इस गरिमामय आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में शामिल हुए, जहां राष्ट्र, समाज और संस्कृति को लेकर गहन चिंतन और स्पष्ट संदेश सामने आए।

दरअसल कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संपर्क प्रमुख प्रवीण गुप्त उपस्थित रहे। ऋषी पोद्दार ने पुस्तक परिचय, अनिल वानखेड़े ने अतिथि परिचय और प्रशांत श्रॉफ ने कार्यक्रम की भूमिका रखी।

संघ को समझना है तो निकट आना होगा

प्रथम सत्र में प्रश्नोत्तर के दौरान मुख्य वक्ता प्रवीण गुप्त ने स्पष्ट कहा संघ को समझना है तो उसके कार्यों के करीब आना होगा। समाज के विकास में जाति भेद सबसे बड़ी बाधा है। समरसता और एकता के बिना समाज का उत्थान संभव नहीं। यह बयान सीधे तौर पर समाज में व्याप्त विभाजनकारी सोच पर तीखा प्रहार माना जा रहा है।

100 साल की यात्रा: संघर्ष से निर्माण तक

द्वितीय सत्र में प्रवीण गुप्त ने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के जीवन प्रसंगों और संगठन की स्थापना के इतिहास को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया संघ की 100 वर्ष की यात्रा संघर्ष और समर्पण से भरी रही है। संगठन ने व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का मार्ग अपनाया। हर स्वयंसेवक में नेशन फर्स्ट– राष्ट्र सर्वोपरि का भाव विकसित करना ही लक्ष्य है।

पंच परिवर्तन से बदलाव का रोडमैप

अपने उद्बोधन में श्री गुप्त ने समाज परिवर्तन के लिए स्पष्ट एजेंडा रखा- स्वदेशी अपनाना, नागरिक कर्तव्यों का पालन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन। उन्होंने कहा कि इन पांच आधारों पर समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है और यही नए भारत की दिशा तय करेगा।

हर वर्ग से राष्ट्र कार्य में भागीदारी का आह्वान

मुख्य वक्ता श्री गुप्त ने समाज के हर वर्ग को जोड़ते हुए कहा अपनी-अपनी भूमिका निभाते हुए राष्ट्र कार्य में सक्रिय सहभागिता जरूरी है। संगठन से जुड़कर समाज और राष्ट्र के लिए योगदान देना समय की मांग है। कार्यक्रम का संचालन पुष्पेन्द्र कापडे ने किया।

अब युवाओं की बारी, कल होगा अंतिम सत्र

कार्यक्रम के अंतिम दिन 6 अप्रैल को “प्रमुख युवा जन गोष्ठी” आयोजित होगी। मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्र प्रचारक प्रेम शंकर जी उपस्थित रहेंगे। शाम 5:30 बजे गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में कार्यक्रम शुरू होगा

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