बुरहानपुर। शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली ताप्ती नदी अब संकट के गहरे साए में नजर आ रही है। बुधवार सुबह राजघाट पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब यहां रोजाना मछलियों को दाना डालने आने वाले लोगों ने नदी में सैकड़ों मछलियों को मृत अवस्था में तैरते देखा। देखते ही देखते यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
मृत मछलियों का यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि शहर की पर्यावरणीय स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गया है।
तापमान का ‘अटैक’: 5 दिन में 7 डिग्री उछाल, 41°C पर अटका पारा
बुरहानपुर में पिछले कुछ दिनों में तापमान ने अचानक खतरनाक रफ्तार पकड़ी है— 10 अप्रैल: 34°C / 21°C, 11 अप्रैल: 37°C / 24°C, 12 अप्रैल: 39°C / 24°C, 13-15 अप्रैल: 41°C / 23-24°C लगातार 41 डिग्री सेल्सियस की तपिश ने नदी के पानी में ऑक्सीजन लेवल घटा दिया, जिससे मछलियों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति “फिश किल फेनोमेना” की ओर इशारा करती है।
ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा…
राजघाट पर वर्षों से मछलियों की सेवा कर रहे राजकुमार चंदवानी ने बताया मैं कई सालों से यहां आता हूं, लेकिन आज जो देखा वह बेहद दर्दनाक था। सैकड़ों मछलियां मरी हुई थीं। नदी में गंदगी बढ़ती जा रही है, कोई ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि लोगों की लापरवाही भी बड़ी वजह है, क्योंकि नदी में कचरा और अपशिष्ट लगातार डाला जा रहा है।
आयुक्त बोले—टीम भेजकर जांच कराते हैं
मामले के सामने आने के बाद नगर निगम हरकत में आया। निगमायुक्त संदीप श्रीवास्तव ने कहा हम टीम को मौके पर भेज रहे हैं। मछलियों की मौत के असली कारणों की जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, सवाल यह है कि जब नदी में गंदगी लंबे समय से बढ़ रही थी, तब तक प्रशासन क्यों चुप रहा?
गंदगी + गर्मी = मौत का कॉम्बिनेशन
ताप्ती नदी की हालत पहले से ही खराब बताई जा रही है— शहर का सीवेज और कचरा सीधे नदी में गिर रहा है। नियमित सफाई और निगरानी का अभाव। गर्मी में जलस्तर कम और पानी गर्म होने से ऑक्सीजन घट रही। इन सभी कारणों ने मिलकर जलीय जीवन के लिए घातक स्थिति पैदा कर दी है।
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
- क्या नगर निगम की लापरवाही?
- क्या लोगों की असंवेदनशीलता?
- या फिर जल संरक्षण को लेकर गंभीरता की कमी?
ताप्ती नदी में मछलियों की मौत ने इन सभी सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है।
अब नहीं संभले तो देर हो जाएगी
पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यदि अभी भी सफाई, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ताप्ती नदी का पारिस्थितिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।