बुरहानपुर। विकास की रफ्तार देने वाली सड़क अगर लोगों की जान पर बन आए तो सवाल उठना लाज़िमी है। सिंधी बस्ती से लोनी स्थित मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र सीमा तक 54.13 करोड़ रुपये की लागत से बन रही 8.65 किलोमीटर लंबी सीमेंट कांक्रीट सड़क इन दिनों लोगों में राहत से ज्यादा चिंता का कारण बन गई है। सड़क निर्माण के लिए 5 से 7 फीट गहरे गड्ढे तो खोद दिए गए हैं, लेकिन बारिश के बीच सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे। ऐसे में हर गुजरते वाहन के साथ एक ही सवाल उठ रहा है—अगर पानी से भरे इन गड्ढों में कोई वाहन उतर गया तो जिम्मेदार कौन होगा?
यह सड़क केवल बुरहानपुर की नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण लाइफलाइन है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन, ट्रक, बसें और दोपहिया वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भरने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
निर्देश दिए गए… लेकिन जमीन पर नहीं दिखे इंतजाम
8 जुलाई को विधायक अर्चना चिटनीस ने अधिकारियों के साथ निर्माणाधीन सड़क का निरीक्षण किया था। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि निर्माण कार्य के दौरान डायवर्जन प्लान, बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, रात्रिकालीन रिफ्लेक्टर और वैकल्पिक मार्ग जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएं, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। लेकिन मौके की स्थिति अलग कहानी बयां कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कहीं-कहीं केवल बोरियां और पतले लोहे के एंगल रख दिए गए हैं। बारिश और रात के समय यह व्यवस्था किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
एक लेन बंद, दूसरी पर पूरा ट्रैफिक… रोज लग रहा जाम
निर्माण कार्य के चलते सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह खोद दिया गया है, जबकि दूसरे हिस्से से दोनों दिशाओं का यातायात संचालित किया जा रहा है। नतीजा—लगातार जाम, फिसलन और जोखिम। सबसे अधिक परेशानी उन वाहन चालकों को हो रही है, जो पहली बार इस मार्ग से गुजरते हैं और उन्हें सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं होता। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर गया तो दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाएगी। उनका सवाल है कि जब मानसून चरम पर है, तब इतने गहरे गड्ढे खोदकर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
भविष्य की बड़ी परियोजना, लेकिन वर्तमान में बढ़ी चिंता
यह परियोजना पूरी होने के बाद सिंधी बस्ती से कलेक्टर कार्यालय तक 14 मीटर चौड़ा फोरलेन और कलेक्टर कार्यालय से लोनी सीमा तक 7 मीटर चौड़ा टू-लेन सीमेंट कांक्रीट मार्ग तैयार होगा। इसके साथ तीन नई सहित 11 पुलियाएं और चार नए बॉक्स कल्वर्ट भी बनाए जाएंगे। इससे बुरहानपुर और महाराष्ट्र के बीच व्यापार, उद्योग, कृषि और आवागमन को नई गति मिलेगी।
एनएच का काम, पीडब्ल्यूडी ने किया स्पष्ट
लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर अश्विनी सोनरिश ने बताया कि यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) विभाग द्वारा कराई जा रही है और निर्माण की जिम्मेदारी भी उसी विभाग की है।
सबसे बड़ा सवाल… हादसे के बाद जागेंगे जिम्मेदार?
हर विकास परियोजना का उद्देश्य जनता को सुविधा देना होता है, लेकिन यदि निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों से समझौता किया जाए तो वही परियोजना खतरे का कारण बन जाती है। करोड़ों रुपये की इस सड़क से भविष्य में सफर आसान होगा, लेकिन फिलहाल लोगों की मांग सिर्फ इतनी है कि निर्माण कार्य के साथ सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जाए, ताकि विकास की यह राह किसी परिवार के लिए हादसे की वजह न बन जाए।