Homeबुरहानपुरटीईटी पर बगावत! ‘काला कानून’ बताकर सड़कों...

टीईटी पर बगावत! ‘काला कानून’ बताकर सड़कों पर उतरे शिक्षक, बाइक रैली से सरकार को दी खुली चुनौती

जिलेभर के शिक्षक-कर्मचारी संगठनों का उग्र प्रदर्शन, डेढ़ लाख शिक्षकों पर असर का दावा; 18 अप्रैल को भोपाल में महाआंदोलन

बुरहानपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर प्रदेशभर में पनप रहा आक्रोश अब बुरहानपुर की सड़कों पर फूट पड़ा है। बुधवार को जिले के शिक्षक और कर्मचारी संगठन एकजुट होकर बाइक रैली के रूप में खुलकर विरोध में उतर आए। हाथों में तख्तियां, मुंह पर नारे और दिल में आक्रोश- टीईटी काला कानून है के उद्घोष के साथ यह रैली शहरभर में चर्चा का केंद्र बन गई।

Sadaiv News
बुरहानपुर में बाइक रैली से गूंजा शहर

दोपहर 3 बजे पुराने तहसील कार्यालय से शुरू हुई यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों—कमल टॉकीज रोड, गांधी चौक, सुभाष चौक, इकबाल चौक, जय स्तंभ, शनवारा और सिंधी बस्ती से गुजरते हुए सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंची। रैली के दौरान शिक्षकों का गुस्सा साफ नजर आया—हर चौराहे पर नारेबाजी और प्रदर्शन ने प्रशासन तक सीधा संदेश पहुंचाया।

कलेक्टर कार्यालय पर घेराव जैसा माहौल, सौंपा ज्ञापन
Sadaiv News
काला कानून कहकर TET का विरोध—शिक्षकों ने दिखाई ताकत

करीब एक घंटे के प्रदर्शन के बाद रैली कलेक्टर कार्यालय पहुंची, जहां डिप्टी कलेक्टर राजेश पाटीदार को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्पष्ट मांग रखी गई। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त की जाए। शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना नियुक्ति की पहली तारीख से की जाए। शिक्षकों ने चेताया कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और उग्र होगा।

टीईटी नहीं, शिक्षकों पर थोपे गया बोझ

संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय संयोजक ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने आक्रामक अंदाज में कहा टीईटी एक काला कानून है, इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए। पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों पर यह अनावश्यक बोझ है। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले से प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं, जो वर्षों से सेवा दे रहे हैं और अब अचानक नई अनिवार्यता के दबाव में आ गए हैं।

संगठनों की एकजुटता, आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन

इस प्रदर्शन में जिला संयुक्त शिक्षा मोर्चा के साथ-साथ कई कर्मचारी और शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। डॉ. अशफाक खान, धर्मेंद्र चौकसे, अनिल बाविस्कर, राजेश साल्वे, संतोष निंभोरे, विजय राठौड़, जितेंद्र शर्मा, किशोर यादव, भानु दास बंगाली, प्रमोद सातव सहित दर्जनों पदाधिकारी और सैकड़ों शिक्षक इस आंदोलन का हिस्सा बने।

अब आंदोलन का अगला चरण तय

शिक्षकों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यह विरोध केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन और 18 अप्रैल को भोपाल में प्रदेशव्यापी बड़ा आंदोलन। यानी आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा गरमाने वाला है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भड़की चिंगारी

दरअसल, सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि देशभर के जूनियर हाईस्कूल स्तर तक के सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इसी फैसले के बाद देशभर में विरोध शुरू हुआ, और अब बुरहानपुर में यह आंदोलन खुलकर सामने आ गया है।

जमीनी हकीकत बनाम सरकारी आदेश

शिक्षकों का तर्क है कि वे वर्षों से सेवा दे रहे हैं। पहले से चयनित और कार्यरत हैं, अचानक नई परीक्षा की अनिवार्यता अनुचित है। उनका कहना है कि यह फैसला न केवल असंगत है, बल्कि शिक्षकों के मनोबल को भी तोड़ रहा है।

अब नहीं रुकेगा आंदोलन

बुरहानपुर की सड़कों पर उतरे शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि अब यह लड़ाई लंबी चलेगी। मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और उग्र होगा। यह चेतावनी प्रशासन और सरकार दोनों के लिए साफ संकेत है।

spot_img
spot_img
spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles