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राशन पर तकनीकी संकट: सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने संसद में पूछा—ऑफलाइन चलेगा या नहीं अन्न मित्र ऐप?

नेट नहीं, तो राशन कैसे?’ सांसद ने उठाया डिजिटल सिस्टम का मुद्दा

  • प्रधानमंत्री मोदीजी की सरकार में गरीब कल्याण सर्वोपरि

बुरहानपुर। खंडवा लोकसभा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने संसद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और उससे जुड़े डिजिटल सिस्टम का मुद्दा उठाकर आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों की बड़ी परेशानी को राष्ट्रीय मंच पर रख दिया। उन्होंने साफ कहा कि गरीबों के लिए बनाई गई योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी, जब हर पात्र हितग्राही तक समय पर, बिना बाधा और बिना तकनीकी रुकावट के राशन पहुंचे।

Sadaiv News
संसद में राशन पर ज्ञानेश्वर पाटील का बड़ा सवाल

सांसद ने सदन में खंडवा लोकसभा क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य और दूरस्थ इलाकों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि यहां आज भी इंटरनेट कनेक्टिविटी बड़ी समस्या है। ऐसे में यदि राशन व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल सिस्टम पर निर्भर रहेगी, तो जमीनी स्तर पर हितग्राहियों को परेशानी उठानी पड़ेगी।

सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री श्रीमती निमुबेन जयंतीभाई बांभनिया से पूछा कि जिन क्षेत्रों में नेटवर्क नहीं आता, वहां अन्न मित्र ऐप ऑफलाइन मोड में काम करेगा या नहीं। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों की परिस्थितियां शहरों जैसी नहीं हैं, इसलिए डिजिटल सिस्टम को भी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से ढालना जरूरी है।

उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि राशन दुकानों में निरीक्षण और जीयो-ट्रैकिंग के लिए यदि ऐप लागू किया गया है, तो क्या सरकार राशन दुकान संचालकों और फील्ड अधिकारियों को इसका प्रशिक्षण देने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करेगी। सांसद ने साफ किया कि बिना प्रशिक्षण के नया सिस्टम लागू करना कई जगहों पर भ्रम और परेशानी बढ़ा सकता है।

72 घंटे में शिकायत निवारण की मांग

सांसद श्री पाटील ने अन्न सहायता प्लेटफॉर्म पर दर्ज होने वाली शिकायतों के समयबद्ध निराकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की कि खंडवा लोकसभा के दूरस्थ और जरूरतमंद क्षेत्रों में दर्ज शिकायतों का 72 घंटे के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि गरीब परिवारों को राशन के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का असली मतलब तभी है, जब अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ बिना रुकावट पहुंचे।

केंद्रीय मंत्री ने दिया यह जवाब

इस पर केंद्रीय राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभनिया ने कहा कि केंद्र सरकार पीडीएस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा रहा है तथा समय-समय पर आवश्यक सुधार भी किए जा रहे हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार राशन वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने और लाभार्थियों तक सुविधा पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

सांसद बोले- गरीब कल्याण सर्वोपरि

सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीब कल्याण, पारदर्शिता और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि 80 करोड़ गरीबों की चिंता यदि किसी सरकार ने की है, तो वह मोदी सरकार है। खंडवा लोकसभा क्षेत्र के आदिवासी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हर पात्र हितग्राही को समय पर राशन मिले, इसके लिए वे लगातार प्रयासरत हैं।

मुद्दा तकनीक का नहीं, गरीब के हक का है

संसद में उठाया गया यह सवाल केवल ऐप, नेटवर्क या डिजिटल सिस्टम का नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के हक का है जो राशन व्यवस्था पर निर्भर हैं। आदिवासी क्षेत्रों की समस्या को संसद में उठाकर सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने यह संदेश दिया है कि जमीन की सच्चाई से कटकर कोई भी सिस्टम सफल नहीं हो सकता।

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