बुरहानपुर। जिले में पाड़ों की टक्कर पर प्रशासन की सख्त मनाही के बावजूद, रविवार को ग्राम बोदरली में फिर वही नजारा देखने को मिला। सुबह से ही मैदान में पाड़ों के गरजने और टकराने की आवाजें गूंज उठीं। भीड़ इतनी थी कि सड़क तक लोग खड़े होकर मुकाबला देखने लगे। अनुमान है कि हजारों की संख्या में लोग इस अवैध आयोजन को देखने पहुंचे।
रविवार सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुआ यह आयोजन देर शाम तक चलता रहा। 50 से अधिक पाड़ा मालिक अपने-अपने जानवरों को सजा-धजा कर लाए थे। स्थानीय लोग इसे परंपरा और मनोरंजन बताते हैं, जबकि प्रशासन इसे पशु क्रूरता मानते हुए हर साल कार्रवाई करता है। इस बार भी भीड़ का जोश इतना बढ़ा कि शाम तक दर्जनों राउंड की टक्करें हुईं कहीं सींग टूटीं, कहीं चोटें आईं, तो कहीं मालिकों में झड़पें भी देखने को मिलीं।
पुलिस ने पहुंचकर रोका आयोजन, 5 पर एफआईआर
शाहपुर थाना पुलिस को जैसे ही सूचना मिली, टीम मौके पर पहुंची। जांच के बाद पुलिस ने आयोजन समिति के 5 जिम्मेदार लोगों पर मामला दर्ज किया है। इनमें शामिल हैं: सुधीर पिता रामराव पाटील, कैलाश पिता नारायण पाटील, अर्जुन पिता हरि चौहान, मदन सिंह पिता पूरा चौहान, पिनेश पिता हेमराज चौहान सभी आरोपी ग्राम बोदरली निवासी बताए जा रहे हैं।
मेला लगाने की अनुमति थी, टक्कर की नहीं
जानकारी के मुताबिक, समिति ने सीता बलड़ी मैदान, बोदरली में मेला आयोजन की अनुमति ली थी।
समय तय था सुबह 10 से रात 10 बजे तक लेकिन मेले की आड़ में पाड़ों की टक्कर कराई गई। यह कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट के 24 अक्टूबर 2025 के आदेश का खुला उल्लंघन था।
किन धाराओं में हुआ केस दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 223, 125, 3-5 बीएनएस और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(1)(घ) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है जानवरों को लड़ाना न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि अमानवीय भी।
दीपावली पर भी हुई थी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब बुरहानपुर में पाड़ों की टक्कर विवादों में आई हो। कुछ ही दिन पहले दीपावली के पड़वे पर शाहपुर में भी ऐसा आयोजन हुआ था, जिसमें पुलिस ने पांच लोगों पर केस दर्ज किया था। फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा रुकने का नाम नहीं ले रही।