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जल संकट की दहलीज: पारसडोह बांध से छोड़ा गया पानी 4-5 दिन में पहुंचेगा बसाड़ एनीकट; अर्चना चिटनीस बोलीं— समय रहते निर्णय नहीं होता तो हालात हो सकते थे भयावह

- कलेक्टर कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में जनप्रतिनिधियों-अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा, आगामी कार्ययोजना को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए

बुरहानपुर। भीषण गर्मी, लगातार गिरते जलस्तर और सूखते एनीकट के बीच बुरहानपुर एक बड़े जल संकट की दहलीज पर पहुंच चुका था। हालात इतने गंभीर थे कि बसाड़ स्थित ताप्ती एनीकट में शहर के लिए महज 10 दिन का पानी ही शेष बचा था। यदि समय रहते शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधि सक्रिय नहीं होते तो आने वाले दिनों में शहर में पानी को लेकर हाहाकार मच सकता था।

शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय के त्वरित हस्तक्षेप, जिला प्रशासन की तत्परता और नगर निगम की वैकल्पिक तैयारियों से फिलहाल शहर को बड़े जल संकट से राहत मिली है। बैठक में सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, महापौर माधुरी अतुल पटेल, कलेक्टर हर्ष सिंह, जिला पंचायत सीईओ सृजन वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने,  निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

8 मई को सामने आई थी ‘अलार्मिंग’ स्थिति

अर्चना चिटनीस ने बताया कि 8 मई को नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन ने उन्हें अवगत कराया था कि बसाड़ एनीकट का जलस्तर तेजी से गिर रहा है और उपलब्ध पानी सिर्फ 10 दिन की जलापूर्ति के लिए पर्याप्त है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसी दिन जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को अलर्ट किया गया। कलेक्टर द्वारा प्रमुख सचिव जल संसाधन विभाग को अर्द्धशासकीय पत्र भेजकर बैतूल जिले के पारसडोह बांध से तत्काल पानी छोड़ने का आग्रह किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए जल संसाधन विभाग को आवश्यक निर्देश दिए और 8 मई की रात 10 बजे पारसडोह बांध से नियंत्रित रूप से पानी छोड़ा गया।

घोघरा घाट तक पहुंचा पानी, अब बसाड़ एनीकट की ओर बढ़ रहा बहाव

प्रशासन के अनुसार छोड़ा गया पानी शुक्रवार रात तक घोघरा घाट तक पहुंच चुका है। वर्तमान में जल प्रवाह ग्राम देड़तलाई से लगभग 80-90 किलोमीटर दूर बताया गया है और अगले 4 से 5 दिनों में इसके बसाड़ एनीकट तक पहुंचने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि पानी पहुंचते ही शहर की पेयजल व्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी और जलापूर्ति का दबाव कम होगा।

एक साथ कई मोर्चों पर काम, तब जाकर मिली राहत

संकट को देखते हुए प्रशासन ने समानांतर वैकल्पिक जल व्यवस्थाएं भी शुरू कर दी हैं। दैयत एनीकट और नेपानगर एनीकट के गेट खोलकर पानी छोड़ा गया है। उतावली-1 संपवेल शुरू कर दो टंकियों को भरा जा रहा है। शाहदरा क्षेत्र के नलकूपों से लालबाग इलाके में जलापूर्ति की जा रही है। इसके अलावा कई वार्डों में स्थानीय बोर और नलकूप भी चालू किए गए हैं ताकि नागरिकों को पेयजल संकट से राहत मिल सके।

पुल निर्माण के अस्थायी बांध बने संकट की बड़ी वजह

अर्चना चिटनीस ने कहा कि बसाड़ एनीकट के ऊपरी हिस्से में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और रेलवे द्वारा पुल निर्माण कार्यों के लिए बनाए गए अस्थायी बांध भी इस संकट की प्रमुख वजह बने। इन अस्थायी संरचनाओं के कारण एनीकट में अपेक्षित जल संग्रहण नहीं हो सका और जलस्तर तेजी से घट गया। उन्होंने बताया कि एनएचएआई को अस्थायी बांध हटाने के निर्देश दिए जा चुके हैं और रेलवे को भी कार्रवाई के लिए कहा गया है। संबंधित एजेंसियों ने युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है।

यह सिर्फ संकट नहीं, चेतावनी है

अर्चना चिटनीस ने नागरिकों से पानी बचाने की अपील करते हुए कहा कि यह स्थिति पूरे समाज के लिए चेतावनी है। आने वाले वर्षों में जल संकट और गंभीर हो सकता है, इसलिए अब जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि जनभागीदारी का अभियान बनाना होगा। उन्होंने कहा कि पानी का दुरुपयोग रोकना, वर्षा जल संरक्षण और जिम्मेदार उपभोग अब हर नागरिक की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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