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चैत्र नवरात्रि में बेटियों के नाम भविष्य सुरक्षित करने की अनोखी परंपरा: हर साल 2 कन्याओं के नाम ₹5- ₹5 हजार की एफडी

- 11 साल से शनि मंदिर परिसर में माताजी की स्थापना, 9 साल से लगातार चल रही सामाजिक पहल; अब तक 18 बालिकाओं को मिला लाभ

बुरहानपुर। चैत्र नवरात्रि में जहां शहरभर में देवी आराधना, घट स्थापना और धार्मिक अनुष्ठानों की धूम है, वहीं शनि मंदिर क्षेत्र में एक ऐसी परंपरा भी लगातार निभाई जा रही है जिसने धार्मिक आयोजन को सामाजिक सरोकार से जोड़कर अलग पहचान बना ली है। श्री सार्वजनिक मां चैत्र महारानी उत्सव समिति द्वारा हर साल माता की स्थापना के साथ दो कन्याओं के नाम ₹5- ₹5 हजार की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) कराई जाती है, ताकि बालिग होने पर उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके। यही वजह है कि समिति की यह पहल अब नवरात्रि के आयोजनों के बीच एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है।

Sadaiv News
शनि मंदिर के पास माँ दुर्गा की स्थापना की गई

समिति पिछले 11 वर्षों से शनि मंदिर के पास चैत्र नवरात्रि पर माताजी की स्थापना कर रही है, लेकिन पिछले 9 वर्षों से इस धार्मिक आयोजन को बेटी संरक्षण और सम्मान की सोच से जोड़ते हुए हर साल दो बालिकाओं को आर्थिक सहायता देने की परंपरा शुरू की गई, जो आज भी लगातार जारी है।

लकी ड्रॉ से चयन, हर साल 20 से 25 आवेदन पहुंचते हैं

समिति के सदस्यों के अनुसार यह योजना पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित की जाती है। हर वर्ष पात्र बालिकाओं के आवेदन मंगाए जाते हैं, जिनमें सामान्यतः 20 से 25 आवेदन प्राप्त होते हैं। इसके बाद सार्वजनिक रूप से लकी ड्रॉ सिस्टम से दो नाम निकाले जाते हैं और दोनों बालिकाओं के नाम पर पांच-पांच हजार रुपए की एफडी कराई जाती है। समिति का कहना है कि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार का पक्षपात न हो, इसलिए ड्रॉ पद्धति अपनाई जाती है। चयनित बालिकाओं को यह राशि तत्काल नहीं दी जाती, बल्कि बैंक में जमा कराई जाती है ताकि बालिग होने पर उन्हें एकमुश्त राशि के रूप में लाभ मिल सके।

अब तक 18 बेटियों का भविष्य सुरक्षित करने की पहल

समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले 9 वर्षों में 18 बालिकाओं के नाम एफडी कराई जा चुकी है। हर साल दो बालिकाओं को इसका लाभ मिलता है। इस पहल को धार्मिक मंच से सामाजिक संदेश देने का माध्यम माना जा रहा है। समिति का स्पष्ट कहना है कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ केवल सरकारी नारा नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी भी है। इसी सोच के तहत छोटी राशि से शुरुआत कर बालिकाओं के भविष्य को सम्मानजनक आधार देने की कोशिश की जा रही है।

लाडली लक्ष्मी योजना से प्रेरित स्थानीय मॉडल

यह योजना लाड़ली लक्ष्मी योजना की भावना से प्रेरित बताई जा रही है। समिति स्थानीय स्तर पर उसी सोच को आगे बढ़ा रही है, ताकि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक संदेश जाए। इस वर्ष भी योजना के तहत 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच जन्मी बालिकाओं को पात्र माना गया है। समिति ने अभिभावकों से आवेदन आमंत्रित किए हैं।

पिछले साल मेरी बेटी का नाम निकला था: अभिभावक ने बताया अनुभव

स्थानीय निवासी ललित शाह ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी बेटी का नाम लकी ड्रॉ में निकला था और समिति द्वारा उसके नाम पर पांच हजार रुपए की एफडी कराई गई थी। उन्होंने कहा कि यह राशि भले छोटी लगे, लेकिन समाज में बेटियों के प्रति सम्मान का संदेश बहुत बड़ा है।

25 मार्च तक आवेदन, 26 मार्च रात 9 बजे खुलेगा ड्रॉ

समिति ने इस वर्ष के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। पात्र अभिभावकों को बालिका के जन्म प्रमाण पत्र की छायाप्रति समिति के पास जमा करनी होगी।  आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि: 25 मार्च 2026। लकी ड्रॉ की तारीख: 26 मार्च 2026, रात 9 बजे। समिति सदस्यों के अनुसार चयन सार्वजनिक रूप से किया जाएगा ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे।

नवरात्रि में भक्ति के साथ सामाजिक चेतना का संदेश

जहां अधिकांश स्थानों पर नवरात्रि आयोजन पूजा-पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित रहते हैं, वहीं शनि मंदिर क्षेत्र की यह पहल इस मायने में अलग है कि यहां धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है।

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