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50 साल पुराने कुएं पर कब्जे की कोशिश से डोंगरगांव में बवाल, जेसीबी पर पथराव—कार क्षतिग्रस्त

- कुएं में यूरिया डालने का आरोप, 500 परिवारों का जलस्रोत बंद करने पर भड़के ग्रामीण

बुरहानपुर। जिले के ग्राम डोंगरगांव में करीब 50 साल पुराने सार्वजनिक उपयोग के कुएं को बंद करने की कोशिश ने मंगलवार को उग्र रूप ले लिया। कुएं को मिट्टी से भरने पहुंची जेसीबी पर आक्रोशित ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। इस दौरान जेसीबी के कांच फूट गए, वहीं एक कार को धक्का लगने से वह नाली में जा गिरी। घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया। सूचना पर शाहपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात है।

Sadaiv Newsगांव के अधिवक्ता एवं रहवासी शेर सिंह पवार ने बताया कि यह कुआं पिछले 40–50 वर्षों से ग्रामीणों के निस्तार उपयोग में है और इसका उल्लेख सरकारी रिकॉर्ड में भी है। इसके बावजूद खेत मालिक द्वारा बिना किसी न्यायालयीन आदेश कुएं को पूरी तरह बंद कराने की कोशिश की गई, जिससे विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों के अनुसार यह कुआं खेत मालिक यशवंत चौकसे और प्रवीण चौकसे की माता के नाम दर्ज खेत में स्थित है, लेकिन वर्षों से पूरा गांव इसी पानी पर निर्भर है।

कुएं में यूरिया डालने का गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुएं में मिट्टी डालने के साथ-साथ यूरिया भी डाला गया, ताकि कोई भी पानी उपयोग न कर सके। इससे गांव में भारी आक्रोश फैल गया। गांव की आबादी करीब 1200 है और लगभग 500 परिवार इसी जलस्रोत पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 8 दिनों से पानी का संकट बना हुआ है।

ग्रामीण महिला बसंती बाई ने कहा, 50 साल से इसी कुएं का पानी पी रहे हैं। अब अचानक बंद कर दिया गया। ऊपर से यूरिया डाल दिया गया, अब पानी ज़हर बन गया है। ग्रामीणों का दावा है कि इस मामले में 8 दिन पहले थाने में शिकायत दी गई थी, लेकिन समाधान नहीं हुआ। मंगलवार को जब जेसीबी से कुआं भरने की कोशिश की गई तो आक्रोश फूट पड़ा और मामला हिंसक हो गया।

पुलिस बोली—पानी के सैंपल लिए, जांच के बाद होगी कार्रवाई

शाहपुर थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने बताया कि ग्रामीण लंबे समय से इस कुएं का उपयोग कर रहे थे और खसरा रिकॉर्ड में भी निस्तार उपयोग दर्ज है। विवाद के दौरान जेसीबी क्षतिग्रस्त हुई और एक कार नाली में गिरी। उन्होंने बताया कि कुएं में यूरिया डालने की शिकायत पर पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य है और दोनों पक्षों में समन्वय कराने का प्रयास किया जा रहा है।

खेत मालिक का दावा—साजिश के तहत हुआ बवाल

खेत मालिक राजेंद्र चौकसे ने आरोप लगाया कि घटना के पीछे कुछ लोगों की साजिश है। उन्होंने कहा कि जेसीबी तोड़ी गई और कार को जानबूझकर पलटाया गया। उनका कहना है कि उन्होंने ग्रामीणों को अपने खर्च से नया बोर कराने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन ग्रामीण पुराने कुएं पर ही अड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब गांव में नल-जल योजना के तहत घर-घर पानी पहुंच रहा है, फिर भी विवाद खड़ा किया गया। उन्होंने मामले में केस दर्ज कराने की बात कही है।

सबसे बड़ा सवाल—कानून से ऊपर कौन?

यह पूरा मामला कई सवाल खड़े करता है— क्या दशकों से गांव के निस्तार में उपयोग हो रहे जलस्रोत को बिना कोर्ट आदेश बंद किया जा सकता है? कुएं में यूरिया डालना क्या जल प्रदूषण और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं? अगर रिकॉर्ड में निस्तार दर्ज है, तो कार्रवाई से पहले प्रशासन ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? फिलहाल पुलिस जांच जारी है, लेकिन डोंगरगांव की यह घटना जल अधिकार, प्रशासनिक लापरवाही और ग्रामीण आक्रोश का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।

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