बुरहानपुर। जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं सुधारने और संसाधनों की कमी दूर करने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन शनिवार को पोस्टमार्टम व्यवस्था की हकीकत फिर सामने आ गई। अस्पताल में एक साथ चार शव पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम प्रक्रिया में देरी हो गई। नतीजा यह रहा कि मृतकों के परिजन घंटों तक अस्पताल में परेशान होते रहे। पुलिसकर्मी भी पंचनामा और कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों का इंतजार करते नजर आए।
दरअसल शनिवार सुबह जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम को लेकर अव्यवस्था की स्थिति बन गई। ग्रामीण क्षेत्रों से आए परिजन सुबह से ही अपने मृत परिजनों का पोस्टमार्टम कराने के लिए अस्पताल में मौजूद थे, लेकिन डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो सकी। इससे परिजनों में नाराजगी और परेशानी दोनों देखने को मिली।
लालबाग लक्ष्मी माता नगर निवासी योगेश दिनकर पाटील के परिजनों ने बताया कि योगेश को उपचार के दौरान डॉक्टरों ने मृत घोषित किया था। शव शुक्रवार शाम करीब 5 बजे जिला अस्पताल लाया गया था। परिजनों का कहना है कि उन्हें शनिवार सुबह 8 बजे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल बुलाया गया था, लेकिन सुबह 11.20 बजे तक भी प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। परिजन अस्पताल परिसर में घंटों तक इंतजार करते रहे। उनका कहना था कि ऐसे समय में परिवार पहले से ही गहरे दुख में रहता है, ऊपर से पोस्टमार्टम में देरी से मानसिक परेशानी और बढ़ जाती है।
धूलकोट-बोरी से आए परिजन भी हुए परेशान
इसी तरह कमलखेड़ा अंबा फाटा, धूलकोट-बोरी निवासी सकाराम मूल सिंह के परिजनों को भी पोस्टमार्टम के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। जानकारी के अनुसार सकाराम ने अज्ञात कारणों से फांसी लगा ली थी। ग्रामीण क्षेत्र से आए परिजन सुबह से अस्पताल में मौजूद थे, लेकिन पोस्टमार्टम में देरी के कारण उन्हें भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इन दो मामलों के अलावा जिला अस्पताल में दो लावारिस शव भी रखे हुए थे। उनका पोस्टमार्टम भी समय पर नहीं हो पाया। एक साथ चार शव आने से पोस्टमार्टम कक्ष के बाहर इंतजार बढ़ता गया और व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।
डॉक्टरों की कमी से बार-बार बनती है समस्या
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। संसाधन बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसका सीधा असर मरीजों, परिजनों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर पड़ रहा है। पोस्टमार्टम जैसे संवेदनशील मामलों में देरी से परिजनों की पीड़ा और बढ़ जाती है। शनिवार का मामला इसी अव्यवस्था का उदाहरण रहा। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया के लिए अलग से समयबद्ध व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को घंटों परेशान न होना पड़े।
सिविल सर्जन बोले- डॉक्टर राउंड पर थे, इसलिए विलंब हुआ
मामले में सिविल सर्जन डॉ. दर्पण टोके ने कहा कि डॉक्टर राउंड पर थे, इसलिए कुछ देर हुई। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे तक सभी पोस्टमार्टम करवा दिए गए थे। एक साथ चार शव आने के कारण भी प्रक्रिया में अधिक समय लगा।