बुरहानपुर। गरीब और पात्र परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन की गुणवत्ता पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नेपानगर क्षेत्र के ग्राम घाघरला की कंट्रोल दुकान पर गुरुवार को वितरण के लिए पहुंचे चावल के बोरे खोले गए तो उनमें से तेज दुर्गंध, कीड़े और ईल्लियां निकलने लगीं। चावल की हालत देखकर राशन लेने पहुंचे ग्रामीण आक्रोशित हो गए। ग्रामीणों ने मौके पर ही नाराजगी जताते हुए कहा कि यह अनाज इंसानों के खाने योग्य नहीं है। ऐसा राशन बांटना गरीबों के स्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़ है।
हालांकि मामला सामने आते ही खराब चावल का वितरण रोक दिया गया। कुछ हितग्राहियों को दुकान पर पहले से उपलब्ध पुराने चावल का वितरण किया गया, जबकि आपूर्ति निगम के माध्यम से आया खराब चावल वापस भेज दिया गया। इसके बाद नया माल बुलाने की बात कही गई है।
बोरे खोले तो चावल से उठी बदबू, दानों में दिखीं मरी हुई ईल्लियां
जानकारी के अनुसार गुरुवार को ग्राम घाघरला की राशन दुकान पर चावल वितरण की तैयारी की जा रही थी। राशन मिलने की सूचना पर ग्रामीण भी दुकान पर पहुंचे थे। इसी दौरान जब चावल के कट्टे खोले गए तो उनमें से बदबू आने लगी। चावल के दाने टूटे हुए थे और उनमें कीड़े व मरी हुई ईल्लियां साफ दिखाई दे रही थीं। यह देखकर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी राशन गरीब परिवारों के जीवनयापन का सहारा है। यदि उसी राशन में कीड़े और दुर्गंध होगी तो गरीब परिवार आखिर क्या खाएंगे। ग्रामीणों ने मौके पर विरोध दर्ज कराते हुए खराब चावल बांटने का विरोध किया।
ग्रामीण बोले—ऐसा अनाज खाने से बीमारी फैल सकती है
ग्रामीणों का कहना है कि घाघरला की कंट्रोल दुकान पर आया चावल खाने योग्य नहीं था। उसमें बदबू थी, दाने टूटे हुए थे और ईल्लियां दिखाई दे रही थीं। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसा अनाज यदि लोगों के घरों तक पहुंच जाता तो बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में भेजे जाने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता की गंभीरता से जांच नहीं की जाती। उनका कहना है कि कई बार ग्रामीण खराब राशन की शिकायत नहीं कर पाते, लेकिन इस बार चावल की स्थिति इतनी खराब थी कि विरोध करना पड़ा।
खराब चावल किसी को नहीं बांटा गया, माल लौटाया
मामले की जानकारी लगने के बाद खराब चावल का वितरण रोक दिया गया। बताया जा रहा है कि दुकान पर पहले से मौजूद पुराने चावल का कुछ हितग्राहियों को वितरण किया गया, जबकि खराब चावल को अलग रख दिया गया। बाद में वाहन बुलाकर खराब माल आपूर्ति निगम को वापस भेज दिया गया। राशन दुकान संचालक चरण सिंह राठौड़ ने बताया कि आठ-दस कट्टे खोलकर देखे गए थे। चावल खराब निकला। उसमें दुर्गंध और कीड़े दिखाई दे रहे थे। इसलिए वह माल किसी भी हितग्राही को वितरित नहीं किया गया। दोपहर में गाड़ी आई और खराब माल वापस कर दिया गया।
खाद्य अधिकारी बोलीं—सूचना मिलते ही आपूर्ति निगम से बात की
जिला खाद्य अधिकारी अर्चना नागपुरे ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि घाघरला की राशन दुकान पर खराब चावल आया है। सूचना मिलते ही तत्काल आपूर्ति निगम से बात की गई। सेल्समैन ने भी वह माल किसी को वितरित नहीं किया था। पूरा माल आपूर्ति निगम को वापस भेज दिया गया है और उसकी जगह फ्रेश माल बुलवाया गया है। अधिकारियों के अनुसार खराब चावल हितग्राहियों को बांटा नहीं गया। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि सवाल यह है कि खराब चावल दुकान तक पहुंचा कैसे। यदि समय रहते ग्रामीणों और दुकान स्तर पर इसकी पहचान नहीं होती तो यही चावल लोगों के घरों तक पहुंच सकता था।
ग्रामीणों ने कहा—सिर्फ माल वापस करने से काम नहीं चलेगा
घाघरला के ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जिस स्तर का चावल गांव की राशन दुकान तक पहुंचा, उससे आपूर्ति व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आती है। ग्रामीणों ने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि गोदाम से निकलने से पहले चावल की गुणवत्ता जांच हुई थी या नहीं। यदि जांच हुई थी तो खराब माल आगे कैसे भेज दिया गया। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में घटिया स्तर का माल भेजा जाना गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की कि आपूर्ति निगम के माध्यम से भेजे गए खाद्यान्न की दूसरी कंट्रोल दुकानों पर भी जांच कराई जाए, ताकि कहीं और भी खराब राशन तो नहीं पहुंचा है, इसकी पुष्टि हो सके।
पोर्टेबिलिटी राशन नहीं आने से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ी
खराब चावल के मामले के साथ ही इस बार कंट्रोल दुकानों पर पोर्टेबिलिटी राशन नहीं आने से भी उपभोक्ता परेशान हैं। सामान्य रूप से पोर्टेबिलिटी सुविधा के तहत कोई भी पात्र हितग्राही किसी भी कंट्रोल दुकान से राशन ले सकता है, भले ही उसका राशन कार्ड किसी दूसरी दुकान से जुड़ा हो। लेकिन इस बार मई-जून का आवंटन केवल संबंधित कंट्रोल दुकान के निर्धारित राशन कार्डों के आधार पर आया है। इससे दूसरे क्षेत्र से जुड़े उपभोक्ताओं को राशन लेने में परेशानी हो रही है। कई हितग्राही दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अगले महीने से यह समस्या नहीं रहेगी।
बड़ा सवाल—गोदाम से दुकान तक गुणवत्ता जांच कहां फेल हुई?
घाघरला की घटना ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गरीब परिवारों तक पहुंचने वाला राशन कई स्तरों से होकर कंट्रोल दुकान तक आता है। ऐसे में यदि दुकान पर पहुंचे चावल में दुर्गंध, कीड़े और ईल्लियां निकलती हैं तो यह केवल एक दुकान का मामला नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति व्यवस्था की जांच का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि गरीबों की थाली में जाने वाले अनाज की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। प्रशासन को इस मामले में जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी भी कंट्रोल दुकान पर इस तरह का खराब राशन न पहुंचे।
ग्रामीणों की मांग—जांच हो, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो
घाघरला के लोगों ने साफ कहा है कि खराब चावल वापस भेजना समाधान नहीं है। असली कार्रवाई तब मानी जाएगी, जब यह पता चले कि खराब चावल किस स्तर से पास होकर दुकान तक पहुंचा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि राशन गरीबों का अधिकार है, एहसान नहीं। इसलिए उन्हें साफ, सुरक्षित और खाने योग्य अनाज मिलना चाहिए।