Homeअपराध30 हजार के इनामी हत्यारे हुसन सिंह...

30 हजार के इनामी हत्यारे हुसन सिंह की गिरफ्तारी: डेढ़ साल पुराने ‘अंधे कत्ल’ का बड़ा खुलासा

— मजदूर को शराब पिलाकर गला घोंटा, पहचान मिटाने पेट्रोल डालकर जलाया

बुरहानपुर। थाना लालबाग पुलिस ने 25 मई 2024 को कुंडी भंडारा क्षेत्र में मिले अधजले शव से जुड़े डेढ़ साल पुराने अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाते हुए 30,000 रुपये के इनामी और अत्यंत शातिर किलर हुसन सिंह (निवासी आगरा, यूपी) को आगरा से गिरफ्तार कर लिया। हत्या की इस वारदात ने पुलिस को शुरुआत से ही उलझाया हुआ था, लेकिन लगातार तकनीकी खोज, कई राज्यों में दबिश और महीनों की रणनीतिक जांच के बाद आरोपी पकड़ में आ सका। मामले का खुलासा खुद एसपी देवेंद्र पाटीदार ने रविवार शाम 5 बजे लालबाग थाने पर आयोजित पत्रकार वार्ता में किया। इस दौरान सीएसपी गौरव पाटिल, टीआई अमित जादौन सहित पुलिस टाइम मौजूद रही। यह पूरा मामला अपनी प्लानिंग, क्रूरता और पहचान छिपाने की साजिश के कारण जिले की सबसे जटिल फाइलों में से एक माना जा रहा है।

अंधे कत्ल की कहानी: शराब, लालच और पहचान मिटाने की साजिश

एसपी देवेन्द्र पाटीदार ने बताया 25 मई 2024 को कुंडी भंडारा क्षेत्र में अधजला शव मिला, जिसकी जेब में हुसन सिंह का आधार कार्ड, दस्तावेज और मोबाइल नंबर मिला। पुलिस को पहली नजर में यही लगा कि मृतक हुसन सिंह है। पर जब परिजनों से पूछताछ हुई, तो पिता गंगाराम और प्रद्युम्न ने शव को अपना बेटा बताने से साफ इंकार कर दिया।

आगे की जांच में सामने आया कि हुसन सिंह, पूर्व पेरा कमांडो, आगरा निवासी,  वर्तमान में पनवेल में अपने पार्टनर गणेश शर्मा के साथ होटल चलाता था। दोनों ने मिलकर महाराष्ट्र के मनमाड से एक नशे में धुत मजदूर को काम और मजदूरी का लालच देकर बुरहानपुर लाया। खेत पहुंचने के बाद शराब पिलाई और गला घोंटकर हत्या कर दी। पहचान छिपाने के लिए शव पर पेट्रोल डालकर जला दिया और पुलिस को भ्रमित करने के लिए अपना आधार कार्ड शव की जेब में रख दिया। हत्या का मकसद व्यक्ति प्रितेश गुप्ता को फंसाने और उससे चल रहे पैसों के विवाद का बदला लेना था।

महीनों की मेहनत, हजारों डेटा की जांच और फिर मिली सफलता

सबसे बड़ी चुनौती थी मृतक की वास्तविक पहचान। प्रआर भरत देशमुख ने इसमें निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों की पूरा वर्ष गुमशुदा रिपोर्टों की पड़ताल की। जीआरपी, आरपीएफ और कई थानों में जाकर जानकारी जुटाई। सीसीटीएनएस में हजारों एंट्री मैच कीं। मृतक के शरीर पर बने टीटू और अन्य शारीरिक संकेतों की जांच की। अंततः मुकुंदवाड़ी, संभाजीनगर के कैलाश सावले (उम्र 33) के रूप में पहचान हुई। डीएनए रिपोर्ट ने इसे प्रमाणित किया। हत्या की गुत्थी सुलझ गई, पर मुख्य आरोपी हुसन सिंह अब भी फरार था।

1.5 साल तक राज्यों में छिपता रहा हुसन — मगर पुलिस की पकड़ से नहीं बच सका

लालबाग पुलिस ने आरोपी की तलाश में कई बार आगरा, झांसी, राजस्थान और महाराष्ट्र में सर्च ऑपरेशन चलाए। टेक्निकल टीम ने मोबाइल नंबर, आईएमईआई, बी-पार्टी कॉल डिटेल, सोशल मीडिया गतिविधियां, लोकेशन पैटर्न को महीनों तक ट्रैक किया। आखिरकार, आरोपी की लोकेशन आगरा के रायमा मंदिर के पास मिली। लालबाग पुलिस टीम, यूपी एटीएस की मदद से वहां पहुंची और हुसन सिंह को दबोच लिया।

कौन है हुसन सिंह? — पुलिस के लिए सिरदर्द और अपराध जगत का प्रशिक्षित खिलाड़ी

यह आरोपी 10 पेरा स्पेशल फोर्सेस में 6 वर्ष नौकरी कर चुका है। सेना से स्वैच्छिक रिटायरमेंट के बाद यह अपराध की दुनिया में उतर गया। इसके नाम कई गंभीर केस दर्ज हैं। जिनमें हत्या का प्रयास– धारा 307, डकैती – धारा 395, लूट – धारा 394, आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट (एकाधिक प्रकरण), और बुरहानपुर की धारा 302, 201, 120B, 34 वाली हत्या। कुल मिलाकर हुसन सिंह एक प्रोफेशनल, प्रशिक्षित और बेहद खतरनाक अपराधी है।

पुलिस टीम की भूमिका: डेढ़ साल के ऑपरेशन की रीढ़ बनी ये टीम

थाना लालबाग निरीक्षक अमित सिंह जादौन (ऑपरेशन लीड), उप निरीक्षक जयपाल राठौर, प्रआर अजय वारूले, प्रआर भरत देशमुख (पहचान सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका), आरक्षक शैलेन्द्र, साइबर टीम  दुर्गेश, सत्यपाल, ललित, शक्ति, उत्तर प्रदेश एटीएस निरीक्षक यतीन्द्र शर्मा एवं टीम।

पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र पाटीदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंतर सिंह कनेश, नगर पुलिस अधीक्षक गौरव पाटिल के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई।

spot_img
spot_img
spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles