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नौकरी फर्जी, भरोसा असली बनाने खातों में डालते रहे रुपए: 19 युवाओं से 1.5 करोड़ की ठगी, नियुक्ति से ट्रेनिंग तक खड़ा किया पूरा ‘सिस्टम’

पोस्ट ऑफिस में नौकरी के नाम पर किसी से 1 लाख तो किसी से 10 लाख तक लिए; फर्जी कर्मचारी आईडी और नियुक्ति पत्र का आरोप, बिना काम 18-19 हजार रुपए देकर नहीं होने दिया शक

बुरहानपुर। बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाया। पोस्ट ऑफिस में ग्रामीण डाक सेवक की भर्ती बताई। पद खाली होने की कहानी सुनाई। खुद को ब्रांच पोस्टमास्टर और ऑपरेटर बताया। नौकरी पक्की कराने के नाम पर लाखों रुपए की ‘सिक्योरिटी’ जमा कराई। बैंक खाते खुलवाए। नियुक्ति पत्र थमाया। ट्रेनिंग लेटर दिया और फिर बिना कोई काम कराए खातों में हर महीने 18 से 19 हजार रुपए तक डालकर ऐसा भरोसा बनाया कि युवाओं को लंबे समय तक शक ही नहीं हुआ।

जब ट्रेनिंग नहीं हुई, वास्तविक ड्यूटी नहीं मिली और बिना काम किए खाते में रकम आती रही तो सवाल उठने लगे। इसके बाद भर्ती रद्द होने की कहानी सामने आई। जमा रकम ब्याज सहित लौटाने के लिए पहले तीन महीने का समय मांगा गया, फिर 2025 में बजट आने और मई-जून में भुगतान का भरोसा दिया गया। आखिरकार मोबाइल बंद हुए और युवाओं को समझ आया कि जिस नौकरी के लिए उन्होंने लाखों रुपए दिए थे, उसके नाम पर उनके साथ कथित तौर पर बड़ा खेल हो चुका है।

यह कहानी बुरहानपुर के नेपानगर में सामने आए उस मामले की है, जिसमें पुलिस के अनुसार करीब 19 युवाओं से लगभग 1.5 करोड़ रुपए की ठगी हुई है। इस पूरे मामले में चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। तीन आरोपी अब गिरफ्तार हो चुके हैं। लंबे समय से फरार धीरज चौधरी ने मंगलवार को कोर्ट में सरेंडर किया। पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की और बाद में जेल भेज दिया। इससे पहले रईस खान और अनिल भाटे गिरफ्तार किए जा चुके हैं। चौथा आरोपी रामकृष्ण कास्डे अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

ठगी सिर्फ नौकरी के झांसे तक नहीं रुकी, असली जैसी भर्ती प्रक्रिया खड़ी करने का आरोप

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि 19 युवा आखिर लंबे समय तक आरोपियों के झांसे में कैसे रहे? पीड़ितों की शिकायत और पुलिस से सामने आई जानकारी को जोड़ें तो आरोप है कि युवाओं के सामने केवल नौकरी का प्रस्ताव नहीं रखा गया, बल्कि भर्ती को विश्वसनीय दिखाने के लिए एक पूरी प्रक्रिया खड़ी की गई। पहले पोस्ट ऑफिस में पद खाली होने की जानकारी दी गई। फिर सिक्योरिटी के नाम पर रकम जमा कराई गई। इसके बाद इंडियन पोस्ट पेमेंट बैंक में खाते खुलवाए गए। नियुक्ति पत्र दिया गया। ट्रेनिंग का लेटर थमाया गया। खंडवा हेड ऑफिस में ट्रेनिंग होने की बात कही गई। दूसरे लोगों से बातचीत कराकर विश्वास बढ़ाया गया और बाद में खातों में रकम भी जमा की गई। यानी शिकायत के मुताबिक, हर उस स्तर पर भरोसा पैदा करने की कोशिश की गई, जहां किसी बेरोजगार युवा को यह लगे कि उसकी सरकारी नौकरी की प्रक्रिया वास्तव में आगे बढ़ रही है।

ठगी का कथित मॉडल

नौकरी का सपना → लाखों की सिक्योरिटी → बैंक खाता → नियुक्ति पत्र → ट्रेनिंग लेटर → बिना काम खाते में रकम → भर्ती रद्द → पैसे लौटाने का वादा → मोबाइल बंद

10वीं पास युवाओं को बताया- ग्रामीण डाक सेवा में निकली है भर्ती

शिकायत के अनुसार पूरा घटनाक्रम 1 जनवरी 2022 से 20 अक्टूबर 2023 के बीच का बताया गया है। युवाओं को जानकारी दी गई कि ग्रामीण डाक सेवा में ऑफलाइन भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई है। नेपानगर पोस्ट ऑफिस में बीपीएम का पद खाली होने की बात भी कही गई। आरोप है कि रईस खान ने युवाओं से संपर्क कर बताया कि 10वीं पास बेरोजगार युवाओं के लिए ग्रामीण डाक सेवा में नौकरी का अवसर है। सरकारी नौकरी की उम्मीद में कई युवा तैयार हो गए। इसके बाद शुरू हुआ रकम जमा कराने का सिलसिला।

नाम ‘सिक्योरिटी’ का, रकम लाखों में; किसी ने 1 लाख तो किसी ने 10 लाख दिए

नेपानगर थाना प्रभारी शहाबुद्दीन कुरैशी के अनुसार, नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 19 युवाओं से अलग-अलग रकम ली गई। किसी से एक लाख रुपए, किसी से दो लाख और किसी से पांच से दस लाख रुपए तक लेने का आरोप है। युवाओं को बताया गया कि यह रकम सिक्योरिटी के तौर पर ली जा रही है और तीन साल बाद ब्याज सहित वापस कर दी जाएगी। यही भरोसा युवाओं के लिए जाल बन गया। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में करीब 1.5 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है।

सिर्फ जुबानी भरोसा नहीं; कर्मचारी होने का भ्रम पैदा करने का भी आरोप

पुलिस के मुताबिक, आरोपी खंडवा पोस्ट ऑफिस में काम कर चुके थे। आरोप है कि इसी जानकारी और अनुभव का इस्तेमाल युवाओं का भरोसा जीतने में किया गया। पुलिस के अनुसार फर्जी कर्मचारी आईडी भी तैयार की गई थी। यह तथ्य जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि मामला केवल किसी व्यक्ति द्वारा नौकरी दिलाने का मौखिक दावा करने तक सीमित नहीं रहा। आरोप है कि ऐसी परिस्थितियां और दस्तावेज तैयार किए गए, जिनसे सामने वाले को प्रक्रिया वास्तविक लग सके। पुलिस अब इससे जुड़े साक्ष्य जुटा रही है।

2 नवंबर को नियुक्ति पत्र, 5 नवंबर को ट्रेनिंग लेटर

युवाओं ने जब नौकरी की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद नियुक्ति पत्र मांगा तो शिकायत के अनुसार 2 नवंबर 2023 को रईस ने हाथ से नियुक्ति पत्र दिया। इसके महज तीन दिन बाद 5 नवंबर 2023 को ट्रेनिंग लेटर दिया गया। युवाओं को बताया गया कि उनकी ट्रेनिंग खंडवा हेड ऑफिस में होगी। उनकी धीरज चौधरी से भी बातचीत कराई गई। अब युवाओं के पास कथित नियुक्ति पत्र था, ट्रेनिंग का लेटर था, बैंक खाता था और नौकरी की प्रक्रिया आगे बढ़ने का भरोसा भी। लेकिन जिस ट्रेनिंग का इंतजार था, वह शुरू नहीं हुई।

यहीं कहानी ने लिया सबसे बड़ा मोड़: काम नहीं कराया, खाते में आते रहे रुपए

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यहीं सामने आता है। युवाओं को वास्तविक रूप से काम नहीं मिला। ट्रेनिंग भी नहीं हुई। इसके बावजूद उनके खातों में रकम आने लगी। बताया गया कि कुछ समय तक हर महीने करीब 18 से 19 हजार रुपए तक दिए गए। शिकायत में तीन महीने तक करीब 20 हजार रुपए के आसपास रकम खातों में डालने की बात भी सामने आई है। यही वह हिस्सा था जिसने कथित भर्ती को लंबे समय तक विश्वसनीय बनाए रखा। सामान्य तौर पर नौकरी नहीं मिलने पर व्यक्ति तुरंत सवाल करता, लेकिन यहां खाते में रकम पहुंचने से युवाओं के सामने यह भ्रम बना रहा कि उनकी भर्ती प्रक्रिया वास्तविक हो सकती है। लेकिन दूसरी ओर सवाल भी बड़ा था—जब ट्रेनिंग नहीं हुई, ड्यूटी नहीं मिली और कोई काम नहीं कराया गया तो पैसा किस बात का आ रहा था? इसी सवाल ने आखिरकार संदेह पैदा किया।

जब सवाल बढ़े तो नई कहानी- ‘भर्ती कैंसिल हो गई’

युवाओं ने ट्रेनिंग और नौकरी को लेकर सवाल करना शुरू किया तो उन्हें बताया गया कि भर्ती रद्द हो गई है। साथ ही भरोसा दिया गया कि नौकरी के लिए जमा की गई रकम तीन महीने में ब्याज सहित वापस कर दी जाएगी। युवाओं ने इंतजार किया। लेकिन तीन महीने गुजरने के बाद भी लाखों रुपए वापस नहीं मिले। इसके बाद पीड़ितों ने रईस से अपनी रकम मांगना शुरू किया। शिकायत के मुताबिक वे उसके घर के कई चक्कर लगाते रहे। हर बार रकम मिलने की उम्मीद आगे खिसकती गई।

तीन महीने का वादा टूटा तो कहा- 2025 में बजट आएगा, मई-जून में पैसा मिलेगा

रकम वापस मांगने पहुंचे युवाओं को बाद में एक और आश्वासन मिला। बताया गया कि 2025 में बजट आने के बाद मई-जून में उनका पैसा लौटा दिया जाएगा। सवाल यह था कि युवाओं से कथित सिक्योरिटी के रूप में ली गई रकम की वापसी किसी बजट से क्यों जुड़ी थी? शिकायत के मुताबिक इसके बावजूद युवाओं ने इंतजार किया। बाद में आरोपियों के मोबाइल बंद होने लगे। यहीं से मामला नौकरी मिलने या भर्ती रद्द होने के विवाद से निकलकर कथित धोखाधड़ी की ओर बढ़ गया। पीड़ित पुलिस के पास पहुंचे।

गुड़ी के मोईनुद्दीन ने अन्य पीड़ितों के साथ की शिकायत

खंडवा जिले की पंधाना तहसील के गुड़ी निवासी मोईनुद्दीन पिता जैनुद्दीन सिद्दीकी ने अन्य पीड़ितों के साथ नेपानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। इनमें— रईस पिता सलीम खान, निवासी वार्ड नंबर-8 नेपानगर, धीरज पिता अशोक चौधरी, निवासी खंडवा, रामकृष्ण कास्डे, निवासी खालवा जिला खंडवा, और अनिल भाटे, निवासी जसवाड़ी जिला खंडवा शामिल हैं। केस करीब नौ महीने पहले दर्ज हुआ था।

दो गिरफ्तार हुए, धीरज फरार रहा; अब कोर्ट में सरेंडर के बाद पहुंचा जेल

मामले में पुलिस ने पहले रईस खान और अनिल भाटे को गिरफ्तार किया। धीरज चौधरी लंबे समय से फरार चल रहा था। मंगलवार को उसने कोर्ट में सरेंडर किया। इसके बाद नेपानगर पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया। रिमांड के दौरान पुलिस ने उससे मामले को लेकर पूछताछ की। पूछताछ पूरी होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। अब पुलिस के सामने चौथे आरोपी रामकृष्ण कास्डे को पकड़ने की चुनौती है। उसकी तलाश जारी है।

इन 5 सवालों के जवाब जांच के लिए अहम

पहला: 19 युवाओं से कथित रूप से ली गई करीब 1.5 करोड़ रुपए की रकम आखिर गई कहां?

दूसरा: युवाओं के खातों में 18 से 20 हजार रुपए तक की रकम किस खाते से और किसके निर्देश पर डाली जा रही थी?

तीसरा: नियुक्ति पत्र, ट्रेनिंग लेटर और कथित कर्मचारी आईडी किसने तैयार की और इन्हें तैयार करने में किन दस्तावेजों या जानकारी का इस्तेमाल हुआ?

चौथा: यदि आरोपियों का पहले डाक विभाग से कामकाजी जुड़ाव रहा था, तो क्या उसी अनुभव और विभागीय प्रक्रिया की जानकारी का इस्तेमाल कथित ठगी को विश्वसनीय बनाने में किया गया?

पांचवां: क्या यह मामला केवल सामने आए 19 युवाओं तक सीमित है या इसी तरीके से अन्य लोगों से भी रकम ली गई?  इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच और जुटाए जा रहे साक्ष्यों से स्पष्ट होंगे।

ठगी की परतें: हर शक के बाद सामने आया नया भरोसा

पूरे घटनाक्रम को देखें तो शिकायत में एक पैटर्न दिखाई देता है। नौकरी पर भरोसा नहीं? पोस्ट ऑफिस में पद खाली होने की बात। रकम देने में डर? सिक्योरिटी बताकर तीन साल बाद ब्याज सहित वापसी का वादा। भर्ती का प्रमाण मांगा? नियुक्ति पत्र। आगे क्या होगा पूछा? ट्रेनिंग लेटर। ट्रेनिंग नहीं हुई तो शक? खाते में रकम। भर्ती पर सवाल उठा? भर्ती रद्द होने की बात। पैसा वापस मांगा? तीन महीने में ब्याज सहित वापसी का वादा। तीन महीने बीते? 2025 के बजट और मई-जून का नया भरोसा। फिर रकम मांगी? शिकायत के मुताबिक मोबाइल बंद। यही सिलसिला इस मामले को साधारण नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने के आरोप से अलग बनाता है।

सरकारी नौकरी की चाह को बनाया कथित ठगी का हथियार

इस मामले में पुलिस जांच अभी जारी है और अदालत में आरोपों का अंतिम परीक्षण होना बाकी है। लेकिन शिकायत और अब तक पुलिस से सामने आई जानकारी बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ा सबक जरूर है। सरकारी भर्ती में यदि कोई व्यक्ति नौकरी पक्की कराने, सिक्योरिटी जमा करने या व्यक्तिगत रूप से लाखों रुपए देने की मांग करे तो संबंधित विभाग की आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। नेपानगर के इस मामले में आरोप है कि युवाओं को केवल नौकरी का सपना नहीं दिखाया गया, बल्कि उस सपने को सच जैसा दिखाने के लिए कथित नियुक्ति पत्र, ट्रेनिंग लेटर, कर्मचारी आईडी, बैंक खाते और खातों में नियमित रकम तक का सहारा लिया गया। अब तीन आरोपी जेल पहुंच चुके हैं, चौथे की तलाश जारी है। लेकिन इस कथित 1.5 करोड़ रुपए के नौकरी घोटाले की पूरी तस्वीर तब साफ होगी, जब पुलिस रकम के लेन-देन, दस्तावेजों के स्रोत और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ लेगी।

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