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इमरजेंसी कोई दुर्घटना नहीं, वह कांग्रेस की मानसिकता का परिणाम थी -भार्गव

इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव का बुरहानपुर में तीखा हमला, मीसाबंदियों का सम्मान राजस्थान भवन में गरजे भार्गव, बोले – इंदिरा गांधी को सत्ता का अहंकार था, लोकतंत्र की हत्या की गई थी बुरहानपुर। 25 जून 1975 – भारत के लोकतंत्र का वह दिन जिसे इतिहास में काले अध्याय के रूप में लिखा गया। और इसी […]

बुरहानपुर। 25 जून 1975 – भारत के लोकतंत्र का वह दिन जिसे इतिहास में काले अध्याय के रूप में लिखा गया। और इसी दिन की 50वीं बरसी पर बुरहानपुर के राजस्थान भवन में आयोजित मीसाबंदियों के सम्मान कार्यक्रम में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कांग्रेस पर तीखे शब्दबाण चलाते हुए कहा – इमरजेंसी कोई दुर्घटना नहीं थी, वह कांग्रेस की राजनीतिक आदत और मानसिकता का परिणाम थी।
Sadaiv Newsप्रेस कॉन्फ्रेंस में भार्गव ने कहा –आज के कांग्रेस नेता कहते हैं कि संविधान खतरे में है और राहुल गांधी हर जगह संविधान की किताब लेकर घूमते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि संविधान सबसे ज़्यादा खतरे में तब था, जब कांग्रेस ने बिना कैबिनेट की बैठक बुलाए आपातकाल थोप दिया था।
उन्होंने कहा कि 42वें संविधान संशोधन, प्रेस पर सेंसरशिप और हजारों लोगों की गिरफ्तारी लोकतंत्र की हत्या के उदाहरण हैं। भार्गव ने दो टूक कहा इंदिरा गांधी को सत्ता का ऐसा नशा चढ़ा था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को पांव तले रौंद दिया गया।
लिखो तो जेल, चुप रहो तो भी जेल
कार्यक्रम के दौरान महापौर श्री भार्गव ने इमरजेंसी काल में मीडिया की स्थिति को लेकर भी अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा – तब ऐसा दौर था जब अखबारों में ‘लोकतंत्र जिंदाबाद’ लिखने पर भी पत्रकार जेल चले जाते थे। लिखो तो जेल, अच्छा लिखो तो भी जेल और न लिखो तो भी जेल – यही उस दौर की तस्वीर थी। उन्होंने इसे मीडिया जगत का सबसे काला दौर करार दिया।
भार्गव ने कहा – हमारी आने वाली पीढ़ी को जानना चाहिए कि किन लोगों ने बोलने की आज़ादी के लिए जेल काटी थी। लोकतंत्र कोई तंत्र नहीं, यह तप से पैदा हुआ है।
मीसाबंदियों का सम्मान, लोकतंत्र के रक्षकों को नमन
इस अवसर पर 1975 के दौरान मीसा कानून (Maintenance of Internal Security Act) में बंद किए गए लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया गया। मंच पर उपस्थित विधायक अर्चना चिटनिस, नेपानगर विधायक मंजू दादू, महापौर माधुरी अतुल पटेल और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने ने इन वीरों को संविधान के सच्चे प्रहरी बताते हुए सम्मानित किया। इस दौरान मीसाबंदी अधिवक्ता अरुण शेंडे, ज्ञानेश्वर मोरे, पूर्व महापौर अतुल पटेल, दिलीप श्रॉफ सहित अन्य मौजूद रहे।
कांग्रेस शासन में महिलाएं सूरज ढलने का इंतज़ार करती थीं
भार्गव ने कांग्रेस शासन की नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा – उस दौर में महिलाएं अंधेरा होने का इंतज़ार करती थीं, क्योंकि घरों में शौचालय नहीं थे। चूल्हों पर फूंकनी से फेफड़े जलाकर रोटियां बनाई जाती थीं। आज मोदी सरकार ने 12 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन देकर महिला गरिमा की रक्षा की है।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा – अगर कांग्रेस इसे भी ‘अघोषित इमरजेंसी’ कहती है तो उसे पहले तय करना चाहिए कि उसे विकास से परेशानी है या लोकतंत्र से?

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