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कोर्ट का फैसला: पुलिस पर तीर-गोफन से हमला करने वाले 5 दोषियों को 4-4 साल की सजा

नेपानगर जंगल में गिरफ्तारी के लिए गई पुलिस टीम पर किया था हमला, टीआई को लगी थी तीर और पत्थरों की गंभीर चोटें बुरहानपुर। 2021 में जंगल में पुलिस टीम पर हुए तीर-गोफन हमले के चर्चित मामले में जिला सत्र न्यायालय ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो महिलाओं सहित 5 आरोपियों को दोषी […]

  • नेपानगर जंगल में गिरफ्तारी के लिए गई पुलिस टीम पर किया था हमला, टीआई को लगी थी तीर और पत्थरों की गंभीर चोटें

बुरहानपुर। 2021 में जंगल में पुलिस टीम पर हुए तीर-गोफन हमले के चर्चित मामले में जिला सत्र न्यायालय ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो महिलाओं सहित 5 आरोपियों को दोषी करार देते हुए चार-चार साल के सश्रम कारावास और 18 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। मामला उस वक्त सुर्खियों में आया था जब टीआई समेत कई पुलिसकर्मियों को हमलावरों ने घेर कर लहूलुहान कर दिया था।
दरअसल 12 सितंबर 2021 को बुरहानपुर एसपी के निर्देश पर नेपानगर टीआई एपी सिंह की अगुवाई में पुलिस टीम फरार आरोपी गीना और नूरिया को पकड़ने चिड़ियानी के जंगल में पहुंची थी। जैसे ही टीम ने टपरे में घेराबंदी की, आरोपी गीना ने जोर से चिल्लाकर साथियों को उकसाया – पुलिस आ गई, मारो इनको। चंद ही पलों में जंगल के टपरों से 20–25 महिला-पुरुष हाथों में पत्थर, तीर, गोफन और लकड़ियाँ लेकर निकल आए।
हमलावरों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ हमला किया। टीआई एपी सिंह को दाएं कंधे पर तीर लगा, जबकि पत्थरों से कमर और पैरों में गंभीर चोटें आईं। प्रधान आरक्षक अजय उपाध्याय को भी कमर के नीचे पत्थर लगे। हमले के बीच पुलिस ने आत्मरक्षा में 4 राउंड हवाई फायर किए। भीड़ भाग निकली, लेकिन पुलिसकर्मी जंगल में जान बचाकर छिपने पर मजबूर हो गए।
वायरलेस तक छिन गया, मदद मांगी कंट्रोल रूम से
इस दौरान प्रधान आरक्षक पवन देशमुख का वायरलेस सेट हमले के दौरान गिर गया। टीआई ने किसी तरह घायल अवस्था में कंट्रोल रूम को हमले की सूचना दी। मामला बेहद गंभीर होने के चलते तत्काल केस दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
कोर्ट ने सुनाया सख्त फैसला
बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय ने गीना, सुबली बाई, नूरिया उर्फ आकाश, सुंदरी बाई और जड़िया उर्फ जडु को दोषी करार दिया। सरकार की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी कैलाशनाथ गौतम व सुनील कुरील ने प्रभावी पैरवी की।
सजा का विवरण इस प्रकार है:
• धारा 148 IPC: 1 साल सश्रम कारावास, ₹500 जुर्माना
• धारा 353 IPC: 2 साल सश्रम कारावास, ₹500 जुर्माना
• धारा 333/149 IPC (दो बार): 4 साल सश्रम कारावास, ₹2000 जुर्माना प्रत्येक बार
सरकार ने माना था ‘चिन्हित अपराध’
घटना के बाद इसे पुलिस विभाग ने ‘चिन्हित अपराध’ की सूची में शामिल किया था। फरियादी स्वयं टीआई एपी सिंह थे। संपूर्ण विवेचना के बाद मजबूत चार्जशीट पेश की गई। कोर्ट के फैसले से पुलिस महकमे में संतोष की लहर है।
क्या बोले अभियोजन अधिकारी
सहायक अभियोजन अधिकारी कैलाशनाथ गौतम ने कहा— यह फैसला पुलिस पर हमले जैसे गंभीर मामलों में सख्त संदेश है। कानून के हाथ लंबे हैं, न्याय हुआ है।

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