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42 डिग्री तापमान में बारिश, ओले भी गिरे, खेतों में कटी पड़ी गेहूं, मक्का, चना फसल को नुकसान

शनिवार दोपहर अचानक बदला मौसम का मिजाज आधे घंटे तक हुई बारिश, तेज हवाएं भी चलीं, किसानों को सता रही फसलों की चिंता बुरहानपुर। 42 डिग्री तापमान के बीच अचानक मौसम का मिजाज बदलने पर जिले के किसान चिंतित हैं। खेतों में गेहूं, चना, मक्का की फसल कटकर पड़ी है। किसान उसे बाजार

On: April 12, 2025 7:49 PM
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  • शनिवार दोपहर अचानक बदला मौसम का मिजाज

  • आधे घंटे तक हुई बारिश, तेज हवाएं भी चलीं, किसानों को सता रही फसलों की चिंता

बुरहानपुर। 42 डिग्री तापमान के बीच अचानक मौसम का मिजाज बदलने पर जिले के किसान चिंतित हैं। खेतों में गेहूं, चना, मक्का की फसल कटकर पड़ी है। किसान उसे बाजार तक ले जाने के काम में जुटे हुए हैं। इसी बीच अचानक तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने किसानों ने चिंता बढ़ा दी। मंडी में रखा मक्का फसल भी गिली हो गई है। चने के आकार के ओले भी गिरे हैं। 41 डिग्री तापमान में कुदरत का करिश्मा देखने को मिला। इस दौरान ओले भी गिरने से नुकसान की आशंका अधिक बढ़ गई।
Sadaiv Newsदरअसल जिले में शनिवार दोपहर 2 बजे से अचानक मौसम का मिजाज बदला और कुछ देर में बारिश होने लगी। इसके साथ ही तेज हवाएं भी चली। बारिश और तेज हवाएं चलने से गेहूं, चना और मक्का फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका अधिक है, क्योकि यह फसल खेत में कटकर पड़ी है।
कहीं आधा तो कहीं पौन घंटे हुइ बारिश
शनिवार दोपहर बुरहानपुर शहर में करीब पौन घंटे तक बारिश हुई तो वहीं नेपानगर और इससे सटे ग्रामीण अंबाड़ा, सारोला सहित अन्य गांवों में भी आधे से पौन घंटे तक पानी बरसा है। इसी तरह खकनार क्षेत्र के गांवों में भी बारिश हुई फिलहाल अधिकतम तापमान 41 से 42 और न्यूनतम 24 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा था, लेकिन बारिश के मौसम में ठंडक घुल गई जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है। तेज हवाओं के साथ बारिश की मोटी बूंदें गिरी। शहर की सड़कें तर हो गई। बारिश से गेहूं, चना, मक्का को नुकसान पहुंचने की संभावना है, क्योंकि दोपहर में जहां बारिश हुई तो वहीं मानसून की तरह काफी देर तक तेज हवाएं भी चलीं।
नुकसान का अभी आकलन नहीं, केला को हवा से नुकसान
कृषि वैज्ञानिक डॉ. कार्तिकेय सिंह के अनुसार बारिश के कारण किसी फसल को नुकसान नहीं है, लेकिन जो फसलें खेतों में कटकर पड़ी है वह गिली होने से जरूर नुकसानी के दायरे में आ सकती है। तेज हवाएं चलने से केला फसल को जरूर नुकसान पहुंचने की आशंका है, लेकिन नुकसान का अभी आकलन करना मुश्किल है। कल तक पता चल पाएगा कि तेज हवाओं से कहां कहां नुकसान हुआ है। इन दिनों अधिकांश किसानों ने फसलें निकाल ली है जो फसल खेत में कटकर पड़ी है वही गीली हुई होगी।
और इधर…..

खकनार में बेमौसम तबाही: हजारों क्विंटल मक्का भीगा, लाखों का नुकसान! 

खकनार। शनिवार दोपहर खकनार तहसील के ग्रामीण इलाकों में आसमान से कहर बरपा। तेज आंधी और मूसलधार बारिश ने खेत से लेकर मंडियों तक को झकझोर दिया। हजारों क्विंटल मक्का भीग गया, हल्दी सड़ने के कगार पर, और व्यापारियों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा।
डोईफोडिया क्षेत्र में करीब एक घंटे तक तूफानी बारिश हुई, जिससे कई किसान खेतों में पड़ा मक्का नहीं बचा सके। व्यापारी शुभम चौकसे ने बताया, गाड़ी में भरने से पहले ही हमारा 1600 क्विंटल माल भीग गया। व्यापारी सोमेश शिवहरे का कहना है, 2000 क्विंटल मक्का पूरी तरह भीग गया, यह सीधा नुकसान है।
किसानों की चिंता बढ़ी – अब कौन खरीदेगा भीगा मक्का?
किसान भुरु चौकसे ने बताया, आधा माल बेच दिया था, लेकिन आधा खेत में पड़ा रह गया। अब भीगे माल की कीमत आधी रह जाएगी। वर्तमान में सूखा मक्का 2100 रु. क्विंटल चल रहा है, लेकिन बारिश ने बाजार भाव की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
हल्दी भी नहीं बची – जहां जगह मिली, वहां सुखा रहे थे
व्यापारी दिनेश भाई और मनोज भाई ने कहा, हल्दी को खुली जगह में सुखा रहे थे, लेकिन अचानक बारिश में सब भीग गया। अब न सड़ने से बचेगी, न बाजार में दाम मिलेगा। केवल फसल ही नहीं, पशुओं का आहार तक भीग गया। ग्रामीणों के अनुसार, चारों ओर सिर्फ नुकसान की गिनती हो रही है। खेतों में मेहनत करने वाले हाथ अब माथा पकड़कर बैठे हैं।

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