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जंगलराज- माधुरी बैन जैसे बाहरी तत्वों की भूमिका की जांच हो

माधुरी बैन पर जंगल उजाड़ने का आरोप! समिति की सीधी मांग – जिले में हो बैन जंगल बचाओ समिति ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, माधुरी बैन पर लगाया अतिक्रमण बढ़ाने का आरोप कहा – जिले में बर्बाद हो रही खेती, सूख रहे कुएं, बिगड़ रही कानून व्यवस्था… जंगल कटेंगे तो जीवन कहां

On: July 2, 2025 5:04 PM
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  • माधुरी बैन पर जंगल उजाड़ने का आरोप! समिति की सीधी मांग – जिले में हो बैन

  • जंगल बचाओ समिति ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, माधुरी बैन पर लगाया अतिक्रमण बढ़ाने का आरोप

  • कहा – जिले में बर्बाद हो रही खेती, सूख रहे कुएं, बिगड़ रही कानून व्यवस्था… जंगल कटेंगे तो जीवन कहां बचेगा?

बुरहानपुर। एक ओर सरकार पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले में वन कटाई, अतिक्रमण और जल संकट ने आमजन का जीना मुश्किल कर दिया है। इन्हीं चिंताओं को लेकर जंगल बचाओ समिति, बुरहानपुर ने रैली निकालकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन एडीएम वीर सिंह चौहान को सौंपा। इस दौरान सोहन सैनी, संजय विजयवर्गीय, विनोद पाटिल, पूर्व विधायक ठा. सुरेन्द्र सिंह सहित सैकड़ो आदिवासी मौजूद रहे।
ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि वन अधिकार अधिनियम 2005-06 के तहत अधिकांश पात्रों को पट्टे दिए जा चुके हैं और शेष निरस्त दावों की दोबारा जांच में कोई पात्र नहीं मिला। बावजूद इसके कुछ तत्वों द्वारा अतिक्रमण को बढ़ावा दिया जा रहा है। माधुरी बैन जैसे बाहरी तत्वों की भूमिका की जांच हो। साथ ही जंगलों में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
‘माधुरी बैन’ पर सीधा निशाना: बाहरी लोग जंगलों का कर रहे दोहन
समिति का आरोप है कि माधुरी बैन, जो खुद को पर्यावरण और आदिवासी हितैषी बताती हैं, वास्तव में अवैध अतिक्रमण को संरक्षण दे रही हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि 2017-18 से उनकी सक्रियता के बाद वनों की अवैध कटाई में जबरदस्त वृद्धि हुई है। उनके नाम पर प्रशासन पर लगातार प्रदर्शन, ज्ञापन, प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से दबाव बनाया जाता है, जिससे अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई रुकती रही।
खेती पर असर: 90% कुएं सूखे, 1000 फीट गहराई तक नहीं मिला पानी
बुरहानपुर, जो कभी दूध उत्पादन और कृषि में अग्रणी था, अब जल संकट और खराब फसल का शिकार है। ग्रामीणों का दावा है कि पहले 500 फीट में पानी मिलता था, अब 1000 फीट खुदाई पर भी बोरिंग खाली निकल रही है। सिवल, डाभिया, बदनापुर, घाघरला सहित 50 गांवों में खेती चौपट हो गई है। हवा, आंधी और ओलों के कहर से वार्षिक नुकसान करोड़ों में पहुंच चुका है।
जंगल की कटाई के साथ अपराध भी पनपे
जिले में अवैध वन कटाई केवल पर्यावरण को ही नुकसान नहीं पहुँचा रही, बल्कि अब यह कानून व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। जंगल बचाओ समिति द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि जंगलों पर कब्जा करने वाले अब सीधे तौर पर अपराध में भी लिप्त हो चुके हैं। ज्ञापन के अनुसार, जब से वनों में अतिक्रमण बढ़ा है, तभी से कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती दी जा रही है।
इन घटनाओं ने हिला दी सुरक्षा व्यवस्था
• नेपानगर थाने पर हमला: अतिक्रमणकारियों ने थाने पर धावा बोलकर अपराधियों को छुड़ा लिया, जो पुलिस और प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है।
• बाकड़ी वन चौकी से बंदूकों की लूट: वनों की रक्षा के लिए तैनात वन अमले को निशाना बनाते हुए सरकारी हथियार छीन लिए गए।
• सिवल गांव में हथियारबंद रैली: ग्रामीणों के अनुसार, हथियारों से लैस लोग रैली निकालकर पूरे गांव में दहशत का माहौल बना रहे हैं।
• मंगला एक्सप्रेस लूट की कोशिश: ट्रेनों तक को निशाना बनाने से बाज नहीं आ रहे ये असामाजिक तत्व। रेलवे सुरक्षा पर भी सवाल उठे हैं।
• नर्मदा-झाबुआ बैंक की वेन लूटने की साजिश: वित्तीय संस्थानों तक को निशाना बनाया जा रहा है, जो दर्शाता है कि यह सिर्फ जमीन पर कब्जे की नहीं, संगठित अपराध की शुरुआत है।
जंगल के नाम पर अराजकता नहीं चलेगी
ज्ञापन में समिति ने साफ कहा है कि यदि अवैध अतिक्रमण और उससे जुड़े अपराधों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो बुरहानपुर की शांति पूरी तरह खत्म हो सकती है। अतिक्रमण अब केवल भूमि तक सीमित नहीं है, यह अब जंगल की आड़ में कानून का खुलेआम अपमान बन चुका है।
जंगल बचाओ समिति की सीधी मांगें:
1. माधुरी बैन की जांच हो और जिले में प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए।
2. वन क्षेत्रों से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही तुरंत शुरू की जाए।
3. जिले की पर्यावरणीय व्यवस्था बहाल करने के लिए दीर्घकालिक नीति बनाई जाए।
जंगल कटे तो सब कटेगा: जनता की चेतावनी, अब और नहीं
ग्रामीणों की एक ही पुकार है — अब हम चुप नहीं बैठेंगे। जंगल बचेंगे तो पानी बचेगा, खेत बचेगा, जीवन बचेगा। बुरहानपुर की धरती, जो हरियाली की पहचान थी, अब सूखती जा रही है। अगर अब भी समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां सिर्फ भूख और प्यास पाएंगी।

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