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बयान पर घमासान- जब जंगल कट रहे थे, नेता प्रतिपक्ष कहां थे?

हम जल, जंगल, जमीन बचाने के लिए खड़े थे और खड़े रहेंगे नेता प्रतिपक्ष के बयान से तिलमिलाया आदिवासी समाज, जागृत आदिवासी दलित संगठन ने दिया करारा जवाब बुरहानपुर। वन, भूमि और अधिकारों के संरक्षण के लिए वर्षों से संघर्षरत जागृत आदिवासी दलित संगठन ने कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान पर […]

बुरहानपुर। वन, भूमि और अधिकारों के संरक्षण के लिए वर्षों से संघर्षरत जागृत आदिवासी दलित संगठन ने कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। धूलकोट में कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान सिंघार द्वारा संगठन और कार्यकर्ताओं पर की गई टिप्पणी से आदिवासी समाज में जबरदस्त आक्रोश है। शनिवार को संगठन के प्रतिनिधि मंडल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अंतरसिंह बर्डे से मुलाकात की और आक्रोश जताते हुए विरोध दर्ज किया।
Sadaiv Newsजब जंगल कट रहे थे, तब हम खड़े थे…
संगठन की महिला कार्यकर्ता आशा बाई ने तीखा पलटवार करते हुए कहा —हमने कभी राजनीति नहीं की, हम जंगल बचाने के लिए लड़े हैं, लकड़ी तस्करों से लड़े हैं। लेकिन अब अगर हमारे संघर्ष को बदनाम करने की कोशिश हुई, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि जब वन कटाई चरम पर थी, आदिवासी महिलाओं और युवाओं पर दमन हो रहा था, तब कोई भी राजनेता साथ नहीं था।
वन अधिकार कानून का मजाक उड़ाना आदिवासियों का अपमान
संगठन ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को याद रखना चाहिए कि वन अधिकार कानून 2006, उन्हीं की सरकार द्वारा संसद में पारित किया गया था। आज जब हम उसी कानून के तहत अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, तो हमें माफियाओं के साथ जोड़ना शर्मनाक है। प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी समुदाय ने हमेशा संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखी है और जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया है।
हमने सड़कों पर अन्याय का मुकाबला किया है
संगठन के नेताओं ने कहा कि आदिवासियों ने कभी वोट की राजनीति नहीं की। हमने पेड़ों को कटने से बचाया, नदियों को सूखने से रोका, जमीन पर कब्जों के खिलाफ आवाज उठाई… अब अगर इसी पर सवाल उठेगा, तो हम हर मंच से जवाब देंगे।
बयान वापसी की मांग, नहीं तो बड़ा आंदोलन
प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि अगर नेता प्रतिपक्ष सार्वजनिक रूप से अपने बयान को लेकर माफी नहीं मांगते, तो संगठन प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन और आंदोलन करेगा। जागृत आदिवासी दलित संगठन ने साफ किया कि उनका मकसद किसी पार्टी विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा और वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन के लिए है।

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