बुरहानपुर। वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में विधवा वरिष्ठ नागरिकों को अधिकरणों से राहत नहीं मिल सकी है। एक ओर वरिष्ठ नागरिक अपीलीय अधिकरण यानी कलेक्टर बुरहानपुर ने सूफिया बेगम की करोड़ों रुपए मूल्य की जमीन के दानपत्र को शून्य घोषित करने संबंधी अपील निरस्त कर दी, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नागरिक अधिकरण यानी अनुविभागीय अधिकारी बुरहानपुर ने कलावती देवी का मकान और करोड़ों की जमीन से जुड़े दानपत्रों को शून्य घोषित करने का दावा भी खारिज कर दिया।
दोनों मामलों में संबंधित वरिष्ठ नागरिकों की ओर से अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल पैरवी कर रहे हैं। अधिवक्ता ने कहा कि अब दोनों मामलों में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
सूफिया बेगम की अपील 24 जून को निरस्त
अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक सूफिया बेगम ने करोड़ों रुपए मूल्य की जमीन के दानपत्र को शून्य घोषित करने की मांग की थी। यह मामला पहले वरिष्ठ नागरिक अधिकरण में चला था। दावा निरस्त होने के बाद उन्होंने अपीलीय अधिकरण यानी कलेक्टर बुरहानपुर के समक्ष अपील प्रस्तुत की थी। इस अपील को 24 जून 2026 को निरस्त कर दिया गया।
सूफिया बेगम ने अपने अमेरिकावासी जेठ पर जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। अधिवक्ता मनोज अग्रवाल के अनुसार, अपीलीय अधिकरण के आदेश के विरुद्ध अब हाईकोर्ट में रिट याचिका प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही अपीलीय अधिकरण के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर करने की भी तैयारी की जा रही है।
कलावती देवी का दावा भी खारिज
दूसरे मामले में विधवा वरिष्ठ नागरिक कलावती देवी ने अपने रहते मकान और जमीन से जुड़े दानपत्रों को शून्य घोषित करने का दावा वरिष्ठ नागरिक अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया था। उनका आरोप है कि इंदौर निवासी बेटे ने मकान और जमीन हड़प ली। इस मामले में वरिष्ठ नागरिक अधिकरण, अनुविभागीय अधिकारी बुरहानपुर ने 22 जून 2026 को आदेश पारित किया, जिसे 29 जून 2026 को घोषित किया गया। आदेश में उनका दावा निरस्त कर दिया गया।
अधिवक्ता मनोज अग्रवाल ने बताया कि कलावती देवी के मामले में भी आदेश के विरुद्ध अपील की जाएगी। इसके साथ ही अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के विरुद्ध अवमानना याचिका प्रस्तुत करने पर भी तैयारी चल रही है।
हाईकोर्ट में पहले से आदेश सुरक्षित
अधिवक्ता अग्रवाल ने बताया कि सूफिया बेगम के मामले में वरिष्ठ नागरिक अधिकरण के पीठासीन अधिकारी अजमेर सिंह गौड़ के विरुद्ध पहले ही मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अवमानना याचिका प्रस्तुत की गई थी। इस याचिका पर 8 मई 2026 को सुनवाई हो चुकी है और हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा है। करीब दो माह से आदेश घोषित होना लंबित है। इसी बीच अपीलीय अधिकरण और अधिकरण द्वारा दोनों मामलों में नए आदेश पारित किए गए हैं।
अधिवक्ता बोले- बड़े न्यायालय इसलिए बने हैं
अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में यदि किसी आदेश में तथ्यात्मक या कानूनी त्रुटि रह जाती है तो उसके सुधार के लिए उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय जैसे बड़े न्यायालय मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति से जुड़े मामलों में ऐसे न्यायिक सिद्धांत स्थापित किए जा चुके हैं जिनके अनुसार यदि संपत्ति प्राप्त करने वाले व्यक्ति द्वारा वरिष्ठ नागरिक की देखभाल और संरक्षण की भावना समाप्त हो जाती है, तो परिस्थितियों के अनुसार दानपत्र निरस्त कर संपत्ति वापस वरिष्ठ नागरिक को दिलाई जा सकती है। उनका कहना है कि इन्हीं कानूनी आधारों पर आगे की लड़ाई उच्च न्यायालय में लड़ी जाएगी।
न्याय के लिए भटक रहीं दोनों महिलाएं
इन दोनों मामलों ने वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति सुरक्षा और देखभाल से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है। एक ओर सूफिया बेगम अपने जेठ के खिलाफ जमीन हड़पने का आरोप लगा रही हैं, वहीं दूसरी ओर कलावती देवी ने अपने बेटे पर मकान और जमीन से वंचित करने का आरोप लगाया है। दोनों महिलाएं अब अधिकरणों से राहत नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
नोट: यह समाचार संबंधित पक्ष और उनके अधिवक्ता द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। अंतिम स्थिति न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकरण के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।