बुरहानपुर। जिले की कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और आमजन की समस्याओं के समाधान का केंद्र माने जाने वाला कलेक्ट्रेट परिसर खुद एक बुनियादी समस्या से वर्षों से जूझ रहा है। सोमवार को हुई हल्की बारिश के बाद परिसर में फिर पानी जमा हो गया। जहां रोजाना लोग अपनी शिकायतें लेकर समाधान की उम्मीद में पहुंचते हैं, वहीं प्रशासन अपने ही कार्यालय परिसर की जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर पा रहा है।
बारिश के बाद परिसर के कई हिस्सों में पानी भरने से आने-जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मंगलवार को जनसुनवाई होनी है। ऐसे में जिलेभर से किसान, महिलाएं, बुजुर्ग, दिव्यांगजन और ग्रामीण अपनी शिकायतें लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे, लेकिन उन्हें सबसे पहले परिसर में जमा बारिश के पानी से होकर गुजरना पड़ेगा।
हर साल बारिश में वही तस्वीर
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। कलेक्टर कार्यालय के निर्माण के समय से ही परिसर में जलभराव की स्थिति बनती रही है। थोड़ी सी बारिश होते ही पानी निकासी के बजाय परिसर में ही जमा हो जाता है। इसके बावजूद जिम्मेदारों ने अब तक ऐसा कोई ठोस इंतजाम नहीं किया, जिससे इस समस्या से स्थायी राहत मिल सके।
जनसुनवाई से पहले व्यवस्था पर सवाल
कलेक्ट्रेट में हर मंगलवार को जनसुनवाई आयोजित होती है, जहां जिलेभर से लोग अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए आते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जिस परिसर में आमजन की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, वहीं प्रशासन अपनी ही समस्या को वर्षों से अनदेखा करता आ रहा है। जलभराव के कारण सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को होती है।
जल निकासी व्यवस्था की पोल खुली
बारिश का मौसम अभी शुरू ही हुआ है। ऐसे में हल्की बारिश में कलेक्ट्रेट परिसर में पानी भरना जल निकासी व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है। यदि शुरुआती बारिश में यह स्थिति है तो तेज बारिश के दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है। लोगों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिसर में ही व्यवस्था ऐसी है, तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान की गति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
लोग बोले- पहले अपना परिसर तो सुधारें
कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले लोगों का कहना है कि प्रशासन जिलेभर में व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश देता है, लेकिन अपने ही परिसर में वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या को दूर नहीं कर पाया। लोगों ने मांग की है कि कलेक्ट्रेट परिसर में तत्काल जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि जनसुनवाई और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए आने वाले नागरिकों को परेशानी न हो।
बारिश के हर दौर में कलेक्ट्रेट परिसर का तालाब में बदल जाना अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का साफ उदाहरण बन गया है। समय रहते सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह समस्या आमजन के लिए और बड़ी मुसीबत बन सकती है।