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84 नोटिस के बाद भी नहीं जागा निगम, बारिश में भरभराकर गिरा जर्जर मकान

नागझिरी में खाली पड़ा मकान गिरा, बड़ा हादसा टला; रहवासियों ने कहा—अगर कोई रहता तो जान भी जा सकती थी

बुरहानपुर। शहर में जर्जर मकानों को लेकर नगर निगम की लापरवाही एक बार फिर उजागर हो गई। बारिश शुरू होते ही निगम हर साल जर्जर मकान मालिकों को नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर लेता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इसी लापरवाही का नतीजा शुक्रवार रात नागझिरी क्षेत्र में देखने को मिला, जहां तेज बारिश के दौरान एक खाली पड़ा जर्जर मकान अचानक भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि हादसे के समय मकान में कोई मौजूद नहीं था, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी।

मकान गिरने के बाद उसका मलबा आसपास फैल गया। शनिवार सुबह घटना की जानकारी लगते ही मकान मालिक और क्षेत्र के लोग मौके पर जमा हो गए। लोगों ने बताया कि मकान लंबे समय से जर्जर हालत में था। बारिश के दौरान दीवारें कमजोर हो गईं और मकान अचानक ढह गया। रहवासियों का कहना है कि यह घटना नगर निगम के लिए चेतावनी है, क्योंकि शहर में ऐसे कई मकान अब भी खड़े हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।

हर साल नोटिस, कार्रवाई अधूरी

नगर निगम की ओर से इस साल शहर के 84 जर्जर मकान मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि नोटिस के बाद कार्रवाई कितनी हुई? निगम की टीम ने कुछ स्थानों पर दबाव बनाकर दो-तीन जर्जर मकान तुड़वाए, लेकिन अधिकांश मकान अब भी जस की तस स्थिति में खड़े हैं। कई मकान ऐसे हैं, जिनकी दीवारें कमजोर हो चुकी हैं और बारिश में उनके गिरने का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम केवल कागजी कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है। नोटिस जारी करने के बाद न तो लगातार मॉनिटरिंग होती है और न ही समयसीमा तय कर कार्रवाई की जाती है। नतीजा यह है कि बारिश आते ही शहर के पुराने और जर्जर मकान लोगों के लिए खतरा बन जाते हैं।

खाली था मकान, इसलिए बच गई जान

नागझिरी में जिस मकान के गिरने की घटना हुई, वह खाली पड़ा था। इसी वजह से कोई जनहानि नहीं हुई। रहवासियों ने कहा कि अगर मकान में कोई व्यक्ति या परिवार रह रहा होता, तो हादसा गंभीर हो सकता था। मलबा गिरने से आसपास के लोगों में भी दहशत का माहौल बन गया।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि बारिश के दिनों में जर्जर मकानों के आसपास से गुजरना भी जोखिम भरा हो जाता है। कई मकान सड़क किनारे और घनी बस्तियों में बने हुए हैं। ऐसे में यदि कोई मकान अचानक गिरता है, तो राहगीर, वाहन चालक या पड़ोसी भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

इस घटना के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। जब निगम ने खुद 84 जर्जर मकानों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए हैं, तो फिर कार्रवाई इतनी धीमी क्यों है? क्या निगम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? लोगों का कहना है कि नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि खतरनाक मकानों को खाली कराकर समय पर हटाना भी निगम की जिम्मेदारी है।

शहर में कई पुराने मकान ऐसे हैं, जहां किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच विवाद, आर्थिक परेशानी या अनदेखी के कारण मकान टूट नहीं पा रहे हैं। लेकिन इस स्थिति में भी प्रशासन और नगर निगम को जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सख्त कदम उठाने चाहिए।

आयुक्त बोले—84 नोटिस जारी किए, लापरवाही पर कार्रवाई होगी

नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि निगम की ओर से 84 लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से तीन-चार मकानों को तुड़वाया गया है। कई जगह किरायेदारों की समस्या भी सामने आती है। फिर भी प्रयास किया जा रहा है कि जर्जर मकानों को खाली करवाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि लोग लापरवाही बरतेंगे, तो कार्रवाई की जाएगी।

हादसा टला, लेकिन खतरा अब भी बाकी

नागझिरी की घटना में भले ही कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह हादसा शहर के लिए बड़ी चेतावनी है। बारिश का दौर जारी है और शहर में कई जर्जर मकान अब भी खड़े हैं। यदि समय रहते निगम ने केवल नोटिस तक सीमित रहने के बजाय मैदानी कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

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