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श्मशान तक ‘अंतिम सफर’ भी मुश्किल: 2 से 4 फीट पानी-कीचड़ से होकर गुजरती शवयात्रा, वर्षों से पक्के रास्ते का इंतजार

- डेम क्षेत्र के भीतर श्मशान, बारिश में रास्ता गायब; लकड़ी लेकर पहुंची पिकअप के चारों पहिए पानी में डूबे, ग्रामीण बोले-वर्षों से गुहार लगा रहे, अब पक्का रास्ता चाहिए

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बुरहानपुर। खकनार ब्लॉक के ग्राम साजनी में बारिश के दिनों में अंतिम संस्कार करना भी ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। श्मशान घाट तक जाने के लिए पक्का रास्ता नहीं है। कच्चा रास्ता बारिश में कीचड़ और गड्ढों में बदल जाता है। ऊपर से श्मशान डेम क्षेत्र के भीतर होने के कारण ग्रामीणों के मुताबिक आसपास 2 से 4 फीट तक पानी भर जाता है। हालात ऐसे होते हैं कि रास्ता तक दिखाई देना बंद हो जाता है और इसी पानी-कीचड़ से होकर अंतिम यात्रा निकालनी पड़ती है।

Sadaiv News
साजनी श्मशान घाट की बदहाल स्थिति

ग्रामीणों का सवाल है कि जिस रास्ते से गांव की अंतिम यात्रा गुजरती है, वह वर्षों बाद भी सुरक्षित क्यों नहीं बन पाया? समस्या को लेकर सरपंच, सचिव और प्रशासन तक कई बार गुहार लगाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।

पिकअप के चारों पहिए पानी में डूबे, फिर भी पहुंचानी पड़ी अंतिम संस्कार की लकड़ी

श्मशान की बदहाली का अंदाजा हाल की एक घटना से लगाया जा सकता है। ग्रामीणों के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी लेकर जा रही पिकअप को पानी से होकर गुजरना पड़ा। इस दौरान वाहन के चारों पहिए पानी में डूब गए। इसके बावजूद किसी तरह लकड़ी श्मशान तक पहुंचाई गई। बारिश तेज होने पर परेशानी और बढ़ जाती है। पानी भरने से कच्चा रास्ता नजर नहीं आता। कहां गड्ढा है और कहां समतल जमीन, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। ऐसे में शव लेकर चल रहे लोगों के फिसलने और चोटिल होने का खतरा भी बना रहता है।

ग्रामीण बोले- हर बारिश में वही परेशानी, आखिर कब मिलेगा स्थायी समाधान?

ग्रामीण विनोद कुमार का कहना है कि बारिश में श्मशान तक पहुंचना किसी युद्ध से कम नहीं है। समस्या नई नहीं, बल्कि वर्षों से बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। अब ग्रामीण केवल अस्थायी सुधार नहीं चाहते। उनकी मांग है कि श्मशान तक ऐसा पक्का और सुरक्षित रास्ता बनाया जाए, जिस पर बारिश के दौरान भी अंतिम यात्रा आसानी से निकल सके।

बड़ा सवाल- डेम क्षेत्र में ही क्यों रहे श्मशान?

ग्रामीणों ने श्मशान के स्थान को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब डेम क्षेत्र में पानी भरना स्वाभाविक है तो श्मशान को किसी सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर विकसित करने के विकल्प पर भी विचार होना चाहिए। यदि स्थान परिवर्तन संभव नहीं है तो मौजूदा श्मशान तक सुरक्षित पहुंच मार्ग और प्रभावी जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए।

मामला कलेक्टर तक पहुंचा, अब आरसीसी निर्माण की तैयारी

ग्रामीणों की परेशानी का मामला अब कलेक्टर के संज्ञान में पहुंचा है। नेपानगर एसडीएम सृजन श्रीवास्तव के अनुसार कलेक्टर के संज्ञान में मामला आने के बाद नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों को मौके पर भेजकर निरीक्षण कराया गया है। एसडीएम ने बताया कि श्मशान के आसपास आरसीसी निर्माण कराया जाएगा, जिससे पानी की निकासी हो सके और श्मशान में पानी जमा न हो।

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