बुरहानपुर। जनजातीय विभाग के छात्रावासों में बदइंतजामी का गंभीर मामला सामने आया है। सीनियर आदिवासी छात्रावास में गुरुवार रात बच्चों को परोसी गई खिचड़ी में इल्लियां निकलने के बाद छात्रों का सब्र टूट गया। शिकायतों पर सुनवाई नहीं होने से नाराज बच्चे करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए। बच्चों की शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और देर रात छात्रावास में जांच कराई गई। प्रथमदृष्टया लापरवाही और अनियमितताएं सामने आने पर छात्रावास अधीक्षक सम्राट सोनवणे को निलंबित कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि गुरुवार रात करीब 8 बजे छात्रावास के बच्चों को भोजन में खिचड़ी और कढ़ी परोसी गई थी। खिचड़ी में इल्लियां दिखाई देने और भोजन की गुणवत्ता खराब होने पर बच्चों ने विरोध जताया। छात्रावास स्तर पर समाधान नहीं मिलने के बाद बच्चे पैदल ही कलेक्ट्रेट पहुंच गए और अधिकारियों को पूरी स्थिति बताई।
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सीईओ ने तत्काल भेजी जांच टीम
मामले की जानकारी मिलते ही जिला पंचायत सीईओ सृजन वर्मा ने डिप्टी कलेक्टर भागीरथ वाखला को जांच के निर्देश दिए। डिप्टी कलेक्टर खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम के साथ रात में ही छात्रावास पहुंचे और भोजन, रसोई तथा उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की। जांच के दौरान खिचड़ी की गुणवत्ता ठीक नहीं मिली, जबकि कढ़ी में पानी की मात्रा अधिक पाई गई। मसाले सीलबंद पैकेट के बजाय खुले खरीदे गए थे। किचन में साफ-सफाई का अभाव था और फ्रिज भी खाली मिला। छात्रावास में नियमित रसोइया तक नहीं होने की बात सामने आई। व्यवस्थाओं की यह स्थिति देखकर डिप्टी कलेक्टर ने अधीक्षक को जमकर फटकार लगाई।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने लिए सैंपल
खाद्य एवं औषधि प्रशासन अधिकारी कमलेश डावर ने बताया कि मौके से खाद्य सामग्री के नमूने लिए गए हैं। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। लैब रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। डिप्टी कलेक्टर भागीरथ वाखला के अनुसार, जांच में लापरवाही सामने आने के बाद जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त ने छात्रावास अधीक्षक सम्राट सोनवणे को निलंबित कर दिया है।
उत्कृष्ट बालक छात्रावास के अधीक्षक को अतिरिक्त प्रभार
जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त भरत जांचपुरे ने बताया कि लापरवाही और अनियमितताओं की शिकायतों के आधार पर अधीक्षक सम्राट सोनवणे को निलंबित किया गया है। फिलहाल उत्कृष्ट बालक छात्रावास के अधीक्षक सुरेश करोड़ा को सीनियर आदिवासी छात्रावास का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जल्द ही नए अधीक्षक की पदस्थापना की जाएगी। मामले की विभागीय जांच भी कराई जाएगी।
सवाल—अगर बच्चे कलेक्ट्रेट नहीं पहुंचते तो क्या होती कार्रवाई?
यह घटना जिले में संचालित जनजातीय छात्रावासों और आश्रमों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बच्चों को अपनी शिकायत सुनाने के लिए रात में दो किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट जाना पड़ा। जिला पंचायत सीईओ की तत्परता से इस मामले में तत्काल जांच और कार्रवाई हो गई, लेकिन जिले के दूरदराज क्षेत्रों में संचालित उन छात्रावासों की स्थिति भी जांच का विषय है, जहां बच्चे अधिकारियों तक अपनी शिकायत नहीं पहुंचा पाते।
जिलेभर के छात्रावासों का नियमित निरीक्षण और भोजन की अचानक गुणवत्ता जांच नहीं होने से ऐसी लापरवाही को बढ़ावा मिल रहा है। अब आवश्यकता है कि प्रशासन एक छात्रावास तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय जिले के सभी जनजातीय छात्रावासों और आश्रमों में भोजन, स्वच्छता, रसोइये तथा मूलभूत सुविधाओं की व्यापक जांच कराए।



