बुरहानपुर। नेपानगर में पुलिस की वाहन चेकिंग ने एक ऐसे मामले का पर्दाफाश किया है, जिसने हाल में जिले में बैंकों में हुए चोरी के असफल प्रयासों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस को देखते ही आर्टिका कार में सवार चार संदिग्ध वाहन छोड़कर भाग निकले। पुलिस ने कार की तलाशी ली तो अंदर से हैवी बोल्ट कटर, लोहे की रॉड, टामियां, पेचकस, तीन धारदार चाकू, काला फेस मास्क, काला बैग और फर्जी नंबर प्लेट सहित संदिग्ध सामान मिला। सबसे चौंकाने वाली बात कार की पहचान को लेकर सामने आई। जिस गाड़ी पर महाराष्ट्र का MH 37 G-8399 नंबर लगा था, जांच में वह नंबर प्लेट फर्जी निकली। कार का वास्तविक नंबर MP 09-ZY 9747 है और वाहन इंदौर पासिंग का बताया गया है।
कार में मिले औजार और संदिग्धों के पुलिस को देखकर भागने के घटनाक्रम के आधार पर पुलिस को आशंका है कि वे डकैती, लूट या नकबजनी जैसी किसी वारदात की तैयारी में हो सकते थे। अब पुलिस यह भी खंगाल रही है कि कहीं इस मामले के तार हाल में बैंकों में हुए चोरी के असफल प्रयासों से तो नहीं जुड़े हैं।
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चेकिंग पॉइंट देखा और कार वहीं छोड़ दी
एसपी आशुतोष बागरी के निर्देश पर जिले में संदिग्ध वाहनों की चेकिंग का अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत नेपानगर थाना पुलिस मनोज टॉकिज के पास वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक आर्टिका कार वहां पहुंची। सामने पुलिस की चेकिंग देखकर कार में सवार चारों संदिग्ध वाहन छोड़कर मौके से भाग निकले। चार लोगों का इस तरह कार छोड़कर भागना ही पुलिस के लिए पहला बड़ा संदेह था। पुलिस ने तुरंत वाहन को अपने कब्जे में लिया और उसकी तलाशी शुरू की। कार के भीतर मिला सामान देखकर मामला और गंभीर हो गया।
बोल्ट कटर, रॉड, टामियां… आखिर किस काम की थी तैयारी?
नेपानगर थाना प्रभारी शहाबुद्दीन कुरैशी के मुताबिक कार से दो फर्जी नंबर प्लेट, दो पेचकस, एक हैवी बोल्ट कटर, दो लोहे की रॉड, टामियां, तीन धारदार चाकू, काला फेस मास्क, ताला, काला बैग और फास्टैग कार्ड बरामद हुआ है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल है—एक कार में एक साथ बोल्ट कटर, लोहे की रॉड, टामियां, चाकू और फेस मास्क क्यों रखे गए थे? बरामद औजारों की प्रकृति को देखते हुए पुलिस नकबजनी और संपत्ति संबंधी अपराध की तैयारी के एंगल से जांच कर रही है। वहीं चाकुओं की बरामदगी के कारण लूट या डकैती की आशंका के पहलू को भी जांच में शामिल किया गया है। हालांकि चारों फरार संदिग्धों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही उनके वास्तविक इरादों की पुष्टि हो सकेगी।
गाड़ी इंदौर की, नंबर महाराष्ट्र का; पहचान छिपाने की कोशिश?
जांच आगे बढ़ी तो कार की नंबर प्लेट ने एक और रहस्य खड़ा कर दिया। कार पर महाराष्ट्र का MH 37 G-8399 नंबर लगा था। पुलिस ने वाहन की जानकारी निकाली तो नंबर प्लेट फर्जी पाई गई। कार का वास्तविक रजिस्ट्रेशन MP 09-ZY 9747 सामने आया। यानी गाड़ी इंदौर पासिंग और सड़क पर पहचान महाराष्ट्र की। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वास्तविक नंबर छिपाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या किसी वारदात के बाद वाहन की पहचान छिपाकर भागने की तैयारी थी? या कार पहले से किसी अपराध में इस्तेमाल हुई है? फर्जी महाराष्ट्र नंबर प्लेट मिलने के कारण पुलिस संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन को भी खंगाल रही है। फिलहाल किसी अंतरराज्यीय गिरोह से संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
कार मालिक तक पहुंची पुलिस, अब खुलेगी अगली कड़ी
पुलिस ने वाहन के वास्तविक नंबर के आधार पर इंदौर से उसके मालिक की जानकारी जुटा ली है। कार मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। यह पूछताछ मामले की महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है। पुलिस को पता लगाना है कि कार अभी किसके कब्जे में थी? मालिक ने वाहन किसी को दिया था या बेच दिया था? कार चोरी तो नहीं हुई? यदि किसी अन्य व्यक्ति को दी गई थी तो वह इन चार संदिग्धों तक कैसे पहुंची? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद पुलिस फरार लोगों की पहचान तक पहुंच सकती है।
बैंक में सेंध की कोशिश… अब कार में मिले वही काम आने वाले औजार
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण जांच एंगल हाल में बैंकों में हुए चोरी के असफल प्रयास हैं। 16 अगस्त की रात निंबोला थाना क्षेत्र की शुगर फैक्ट्री परिसर स्थित सहकारी बैंक में चोरी का प्रयास सामने आया था। शाहपुर क्षेत्र की एक बैंक में भी चोरी के असफल प्रयास की घटना की जांच चल रही है। अब कुछ ही दिनों बाद एक संदिग्ध कार से बोल्ट कटर, लोहे की रॉड, पेचकस और टामियां जैसे सामान मिलने के बाद पुलिस दोनों घटनाक्रमों के बीच संभावित कनेक्शन तलाश रही है। क्या बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करने वाला गिरोह यही था? क्या चारों किसी अगली वारदात की रेकी या तैयारी में थे? या इनका बैंक मामलों से कोई संबंध ही नहीं है? इन सवालों का जवाब फरार संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद ही मिल सकेगा।
फास्टैग और CCTV बन सकते हैं पुलिस के अहम सुराग
संदिग्ध कार पुलिस के कब्जे में होने से जांच के कई रास्ते खुले हैं। वाहन से मिला फास्टैग कार्ड कार के मूवमेंट की कड़ी जोड़ने में महत्वपूर्ण हो सकता है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए भी आरोपियों की पहचान और उनके आने-जाने का रास्ता तलाश सकती है। यदि कार ने टोल प्लाजा पार किए हैं तो उसकी आवाजाही से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि वाहन नेपानगर पहुंचने से पहले कहां-कहां गया था। वहीं मनोज टॉकिज और आसपास लगे कैमरों से चारों फरार संदिग्धों की तस्वीर या उनके भागने की दिशा मिलने की संभावना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
एक नहीं, कई सवाल छोड़ गई लावारिस कार
मामले में कार तो पुलिस के हाथ लग गई, लेकिन उसमें सवार चारों लोग फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इसलिए बरामद सामान से पैदा हुए सवालों का जवाब अभी बाकी है।
- फर्जी नंबर प्लेट क्यों लगाई गई?
- कार में तीन चाकू और फेस मास्क क्यों थे?
- हैवी बोल्ट कटर और लोहे की रॉड किस काम के लिए रखी गई थीं?
- चारों लोग नेपानगर में क्या कर रहे थे?
- और पुलिस को देखते ही कार छोड़कर भागने की जरूरत क्यों पड़ी?
सबसे अहम सवाल—क्या हाल में बैंकों में हुई सेंधमारी की कोशिशों से इनका कोई कनेक्शन है?
कई धाराओं में केस, चारों की तलाश तेज
पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 312, 112, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5) और मोटर व्हीकल एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अब जांच तीन प्रमुख बिंदुओं पर टिक गई है—कार में सवार चारों संदिग्ध कौन थे, फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वे कहां से आए थे और कार में नकबजनी में इस्तेमाल हो सकने वाले औजार लेकर उनका निशाना क्या था? पुलिस के हाथ कार और सामान लग चुका है। अब चारों संदिग्धों की गिरफ्तारी ही बताएगी कि वाहन चेकिंग से केवल संदिग्ध गतिविधि पकड़ी गई या पुलिस की सतर्कता ने वास्तव में किसी बड़ी वारदात को होने से पहले रोक दिया।



