बुरहानपुर। जिले के निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के बीच अब गरकल अस्पताल पर बड़ी कार्रवाई हुई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय ने निरीक्षण में एक के बाद एक गंभीर कमियां मिलने पर अस्पताल के पंजीयन और लाइसेंस के नवीनीकरण को नामंजूर करते हुए पंजीयन-लाइसेंस निरस्त कर दिया है। आदेश में यहां तक स्पष्ट कर दिया गया कि नया पंजीयन और लाइसेंस मिलने तक अस्पताल किसी मरीज का उपचार नहीं करेगा और न ही किसी मरीज को भर्ती करेगा। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। विभाग ने कागज पर लाइसेंस निरस्त कर दिया, जबकि अस्पताल का संचालन जारी होने की बात सामने आ रही है। अस्पताल संचालक विजय गरकल का कहना है कि उन्हें इस कार्रवाई से संबंधित नोटिस अब तक मिला ही नहीं है।
यानी एक तरफ सीएमएचओ कार्यालय का 18 अगस्त का लिखित आदेश और दूसरी तरफ अस्पताल संचालक का नोटिस नहीं मिलने का दावा। ऐसे में सीधा सवाल खड़ा होता है—जब बिना नवीन पंजीयन और लाइसेंस इलाज तक नहीं करने के निर्देश हैं तो अस्पताल का संचालन कैसे जारी है?
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मल्टीस्पेशलिटी का दावा, लेकिन 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं मिले
गरकल अस्पताल प्रबंधन ने अस्पताल के पंजीयन और लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग के समक्ष आवेदन किया था। इसके बाद विभाग की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण में जो स्थिति सामने आई, उसने मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर ही सवाल खड़े कर दिए। सीएमएचओ डॉ. आर.के. वर्मा के आदेश के मुताबिक मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल चलाने के लिए आवश्यक ऐसे विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं पाए गए, जो अस्पताल में 24 घंटे अपनी सेवाएं दे सकें। यानी जिस स्तर की चिकित्सा सुविधा के नाम पर अस्पताल का संचालन किया जा रहा था, उसी के लिए जरूरी विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता निरीक्षण में पूरी नहीं मिली।
पैथोलॉजी चल रही थी, पैथोलॉजिस्ट नहीं मिला
जांच में सबसे महत्वपूर्ण कमियों में अस्पताल की पैथोलॉजी भी शामिल रही। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पैथोलॉजी बिना पैथोलॉजिस्ट के संचालित पाई गई। यहीं नहीं, अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू वार्ड भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिला। आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर जैसी संवेदनशील चिकित्सा इकाइयों में मानकों की कमी सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि विभाग ने कमियों को गंभीर मानते हुए लाइसेंस नवीनीकरण की अनुमति नहीं दी।
नगर निगम की अनुमति से लेकर बायोमेडिकल वेस्ट तक कमियां
निरीक्षण में केवल डॉक्टर, पैथोलॉजी, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर ही सवालों में नहीं आए। सीएमएचओ कार्यालय के पत्र के अनुसार नगर निगम से आवश्यक अनुमतियां भी नियमानुसार नहीं पाई गईं। बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था भी निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं मिली। इसके अलावा अस्पताल में उपलब्ध मानव संसाधन भी नियमों के मुताबिक नहीं पाया गया। इस तरह स्वास्थ्य विभाग की जांच में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से लेकर लैब, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, स्थानीय निकाय की अनुमति, मेडिकल वेस्ट और मानव संसाधन तक कई स्तर पर खामियां दर्ज की गईं।
विभाग ने कहा—नवीनीकरण संभव नहीं, पंजीयन-लाइसेंस निरस्त
इन कमियों के आधार पर सीएमएचओ कार्यालय ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के पंजीयन एवं लाइसेंस का नवीनीकरण करना संभव नहीं है। इसके बाद पंजीयन और लाइसेंस निरस्त करने का आदेश जारी किया गया। हालांकि विभाग ने अस्पताल प्रबंधन के लिए रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। आदेश के मुताबिक अस्पताल सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के बाद नवीन पंजीयन और लाइसेंस के लिए फिर आवेदन कर सकता है। लेकिन जब तक नया पंजीयन और लाइसेंस नहीं मिलता, तब तक अस्पताल में उपचार और मरीजों की भर्ती पर स्पष्ट रोक है।
सबसे बड़ा सवाल—आदेश जारी हुआ तो पालन किसने कराया?
यहीं से पूरे मामले का दूसरा और अधिक गंभीर पहलू सामने आता है। सीएमएचओ कार्यालय का आदेश 18 अगस्त का है। इसमें साफ लिखा गया है कि नवीन पंजीयन एवं लाइसेंस प्राप्त किए बिना अस्पताल में किसी भी मरीज का उपचार नहीं किया जाए और न ही किसी मरीज को भर्ती किया जाए। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन जारी होने की बात सामने आ रही है। अगर आदेश की विधिवत तामील अस्पताल प्रबंधन को हो चुकी है और इसके बाद भी मरीजों का इलाज या भर्ती की जा रही है तो यह आदेश के पालन से जुड़ा गंभीर मामला बनता है। दूसरी ओर, यदि अस्पताल संचालक का नोटिस नहीं मिलने का दावा सही है तो सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी उठता है कि इतना महत्वपूर्ण आदेश जारी होने के बाद उसकी तामील और अनुपालन सुनिश्चित क्यों नहीं हुआ?
संचालक विजय गरकल बोले—हमें अभी कोई नोटिस नहीं मिला
अस्पताल संचालक डॉ. विजय गरकल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से पंजीयन और लाइसेंस निरस्त किए जाने के संबंध में उन्हें अभी तक कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। अस्पताल का संचालन जारी है। इस बयान ने मामले को और पेचीदा कर दिया है। विभाग के पास आदेश है और अस्पताल प्रबंधन नोटिस नहीं मिलने की बात कह रहा है। अब प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि आदेश अस्पताल प्रबंधन को कब तामील कराया गया, आदेश के बाद मौके पर जांच हुई या नहीं और वर्तमान में मरीजों का उपचार अथवा भर्ती किस वैधानिक स्थिति में की जा रही है।
गुड, अमन और अब गरकल… निजी अस्पतालों पर लगातार एक्शन
जिले में निजी अस्पतालों पर पिछले कुछ दिनों से लगातार कार्रवाई हो रही है। पहले अमरावती रोड स्थित गुड अस्पताल पर कमियां और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद कार्रवाई करते हुए उसे सील किया गया। इसके बाद नेपानगर में अमन अस्पताल पर कार्रवाई हुई और उसे भी सील किया गया। अब तीसरा बड़ा मामला गरकल अस्पताल का सामने आया है, जहां निरीक्षण में कई कमियां मिलने के बाद पंजीयन और लाइसेंस निरस्त करने का आदेश जारी हुआ है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने जिले की निजी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर अस्पतालों में मानकों की जांच पहले कितनी नियमित हो रही थी? यदि विशेषज्ञ डॉक्टर, पैथोलॉजिस्ट, आईसीयू-ओटी, बायोमेडिकल वेस्ट और मानव संसाधन जैसे बुनियादी मानक पूरे नहीं थे तो ये कमियां कब से चली आ रही थीं?
कार्रवाई सिर्फ आदेश तक या जमीन पर भी?
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई का असली असर तभी माना जाएगा जब आदेशों का जमीन पर भी सख्ती से पालन हो। गरकल अस्पताल के मामले में अब निगाह इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग आगे क्या कदम उठाता है। क्योंकि आदेश की भाषा बिल्कुल स्पष्ट है—नवीन पंजीयन और लाइसेंस मिलने से पहले न मरीज का उपचार किया जा सकता है और न उसे भर्ती किया जा सकता है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है— लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद अस्पताल का संचालन जारी है तो जिम्मेदार विभाग की अगली कार्रवाई क्या होगी?



