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निगमायुक्त ने आरोपी आबिद नवाब को किया सस्पेंड, सौ से ज्यादा करदाताओं से ठगी की आशंका
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कांग्रेस पार्षद फहीम हाशमी की शिकायत से खुला मामला, अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच
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परिषद की बैठक में उठा था मुद्दा, निगमायुक्त ने तब कहा था “एक्शन लेंगे”, अब ली गई पहली बड़ी कार्रवाई
बुरहानपुर। नगर निगम में सिस्टम के अंदर से ही फर्जीवाड़ा कर जनता के टैक्स का पैसा हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। नगर निगम में प्रभारी सहायक राजस्व निरीक्षक आबिद नवाब ने फर्जी संपत्ति कर आईडी बनाकर सैकड़ों करदाताओं से नकद टैक्स वसूला, और रकम खुद रख ली।
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब कांग्रेस पार्षद फहीम हाशमी ने मामले को निगम परिषद की बैठक में उठाया। शुरुआती जांच में मामला सही पाए जाने पर निगमायुक्त संदीप श्रीवास्तव ने आरोपी को तत्काल सस्पेंड करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
फर्जी टैक्स आईडी बनाकर जनता को ठगा
मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि आबिद नवाब ने ई-नगर पालिका पोर्टल की नकल कर नकली टैक्स डिमांड लेटर बनाए, जिन पर बाकायदा नगर निगम का लोगो और मुहर लगी थी। करदाताओं को लगा वे असली डॉक्यूमेंट्स हैं, और उन्होंने राशि बिना सवाल दिए जमा कर दी।
लेकिन सच तब सामने आया जब एक करदाता ने पहले 3,700 रु. टैक्स दिया, और कुछ ही दिन बाद उसी संपत्ति पर 37,000 रु. का असली टैक्स डिमांड आया। जब जांच हुई तो पता चला कि पहला डिमांड फर्जी था, और उसकी राशि भी नगर निगम के खजाने में जमा नहीं थी।
पार्षद ने खोजे एक नहीं, कई मामले
कांग्रेस पार्षद फहीम हाशमी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए और भी करदाताओं से संपर्क किया। जांच में सामने आया कि ऐसे कई करदाता हैं, जिनसे नकली आईडी के जरिए टैक्स की वसूली की गई है। कांग्रेस पार्षद फहीम हाशमी ने कहा इस घोटाले में सिर्फ एक इंस्पेक्टर नहीं, कुछ और अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। बिना अंदर की मिलीभगत के इतनी बड़ी ठगी संभव नहीं।
बिना अनुमोदन, बिना जानकारी — सीधे जनता को ठगा
सूत्रों की मानें तो आबिद नवाब ने जिन डिमांड लेटर्स का उपयोग किया, उन्हें किसी सक्षम अधिकारी से न अनुमोदन मिला, न जानकारी दी गई। निगमायुक्त ने भी माना है कि इस मामले में सिस्टम बायपास किया गया।
तत्काल सस्पेंड कर दिया
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सहायक राजस्व निरीक्षक आबिद नवाब ने बिना अनुमति के फर्जी आईडी जारी की। उसे तत्काल सस्पेंड कर दिया गया है। विभागीय जांच जारी है, रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई होगी।
— संदीप श्रीवास्तव, आयुक्त, नगर निगम
परिषद बैठक में भी उठा था मुद्दा, कार्रवाई में हुई देरी
इस पूरे मामले की शुरुआत नगर निगम की पिछली परिषद बैठक से हुई थी। विपक्षी पार्षदों, विशेषकर कांग्रेस के पार्षदों ने फर्जी टैक्स वसूली के आरोप लगाए थे। निगमायुक्त ने जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन तत्काल एक्शन नहीं लिया गया। अब जब मामला सार्वजनिक हुआ और मीडिया की नज़र पड़ी, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया।
घोटाले में और नाम जुड़ने की संभावना
नगर निगम के सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल आबिद नवाब तक सीमित नहीं है। टैक्स डिमांड सिस्टम, फील्ड सर्वे, और खजाना शाखा में भी कुछ नाम जांच के दायरे में हैं। कई टैक्स डिमांड बिना किसी रसीद के वसूल किए गए।
सवाल ये भी है कि…
• फर्जी दस्तावेज़ों की छपाई कहां से हुई?
• वसूली की रकम कहां गई?
• निगम की ऑनलाइन सिस्टम में फर्जीवाड़े की एंट्री कैसे हुई?