Homeबुरहानपुरजल संकट: प्यास के लिए मौत का...

जल संकट: प्यास के लिए मौत का रास्ता, 150 फीट गहरी पहाड़ी उतरकर गंदा पानी ला रहे आदिवासी

जामठी के पलस पानी और रामलाल फलिया की दर्दनाक तस्वीर; 50 परिवारों के 200 लोग नल-जल योजना से वंचित

  • 15 दिन में जिले से दूसरी बार सामने आई पानी संकट की भयावह हकीकत

बुरहानपुर। जिले में नल-जल योजना के तहत घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के दावों के बीच आदिवासी अंचल की एक और संवेदनशील तस्वीर सामने आई है। यह तस्वीर सिर्फ पानी की कमी नहीं, बल्कि उन गरीब आदिवासी परिवारों की मजबूरी दिखाती है, जो आज भी प्यास बुझाने के लिए रोज अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। ग्राम पंचायत मालवीर के अंतर्गत आने वाले जामठी गांव के पलस पानी और रामलाल आदिवासी फलिया के लोग करीब 2 किलोमीटर दूर और लगभग 150 फीट गहरी पहाड़ी ढलान उतरकर पानी लाने को मजबूर हैं।

Sadaiv News
स्वच्छ पानी के लिए रोज जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।

बुजुर्ग महिला रूपलीबाई और सुरमीबाई के अनुसार दोनों फलियों में करीब 50 परिवारों के 200 लोग रहते हैं, लेकिन उन्हें अब तक नल-जल योजना का लाभ नहीं मिला। पानी के लिए महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग दुर्गम पहाड़ी रास्ते से गुजरते हैं। रास्ता इतना खतरनाक है कि कई लोग पानी भरते समय गिरकर घायल भी हो चुके हैं। इसके बावजूद मजबूरी ऐसी है कि हर दिन यही जोखिम उठाना पड़ता है।

जोखिम के बाद भी नसीब नहीं होता स्वच्छ पानी
Sadaiv News
बुरहानपुर में आदिवासी परिवारों की प्यास से जंग

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जानलेवा रास्ता पार करने के बाद भी ग्रामीणों को साफ पानी नहीं मिलता। छोटी नदी और झिरियों से मिलने वाला मटमैला व बदबूदार पानी ही उनकी प्यास बुझाने का सहारा है। यही पानी पीने, नहाने, कपड़े धोने और घर के अन्य कामों में उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गंदा पानी पीने से बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

शिकायतों के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
Sadaiv News
नल-जल योजना के दावों पर सवाल

ग्रामीण रैमसिंग ने बताया कि इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत मालवीर के सरपंच और सचिव को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। लोगों का कहना है कि योजनाओं के दावे कागजों में भले मजबूत दिखाई देते हों, लेकिन दूरस्थ आदिवासी फलियों तक बुनियादी सुविधाएं आज भी नहीं पहुंच पाई हैं।

15 दिन में दूसरी तस्वीर, दावों पर गंभीर सवाल

कुछ दिन पहले धुलकोट क्षेत्र से भी ऐसी ही तस्वीर सामने आई थी, जहां लोग गहरे गड्ढे में उतरकर पानी भरते दिखाई दिए थे। अब जामठी के पलस पानी और रामलाल फलिया की तस्वीरों ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले को नल-जल योजना में बेहतर कार्य के लिए सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन आदिवासी बस्तियों से सामने आ रही ये तस्वीरें बताती हैं कि जमीनी हकीकत अब भी अधूरी है।

अब प्रशासन से उम्मीद

ग्रामीणों की मांग है कि शासन-प्रशासन तत्काल इन फलियों तक स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करे। यह मामला केवल पानी की समस्या नहीं, बल्कि जीवन, स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा सवाल है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन तस्वीरों को सिर्फ शिकायत मानता है या आदिवासी परिवारों की पीड़ा समझकर स्थायी समाधान करता है।

ये भी पढ़े- 20 फीट गहरे कुएं में उतरकर पानी भर रहे थे बच्चे, वीडियो वायरल हुआ तो दौड़ा प्रशासन

spot_img
spot_img
spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles