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विधानसभा में फिर गूंजी बहादरपुर सूत मिल की आवाज: अर्चना चिटनिस ने उठाया 25 वर्षों से बकाया वेतन का मुद्दा

सरकार ने जल्द राहत का भरोसा दिया

बुरहानपुर। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन बुरहानपुर की जनता की वर्षों पुरानी पीड़ा एक बार फिर सदन में गूंज उठी। विधायक और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने बहादरपुर सहकारी सूत मिल मर्यादित के श्रमिकों और कर्मचारियों को देय वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य भुगतान के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।
Sadaiv Newsउन्होंने सदन में कहा, 25 वर्षों से मेहनतकश मजदूरों को उनका हक नहीं मिला। मिल बंद हुए एक युग बीत गया, लेकिन न्याय अब भी अधूरा है।
743 मजदूरों का पीएफ नंबर मिला, बाकी दस्तावेजों की गणना जारी: मंत्री काश्यप का जवाब
इस पर जवाब देते हुए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि मिल के परिसमापक द्वारा कर्मचारी यूनियनों के सहयोग से देयताओं की गणना का काम प्रगति पर है। अब तक 743 श्रमिकों के पीएफ खाता नंबर प्राप्त हो चुके हैं। कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत राशि-पत्रकों का नियमानुसार परीक्षण किया जा रहा है।
हालांकि, पूर्व परिसमापक से आवश्यक रिकॉर्ड और प्रमाणित सूची ना मिलने के कारण देरी हो रही है। वर्तमान परिसमापक ने इंदौर के क्षेत्रीय भविष्य निधि कार्यालय और पूर्व परिसमापक को पत्र भी लिखा है।
1998 में बंद हुई थी बहादरपुर मिल, 200 श्रमिकों की हो चुकी है मृत्यु
अर्चना चिटनिस ने सदन में भावुक स्वर में कहा, फरवरी 1998, दिग्विजयसिंह कांग्रेस सरकार के शासन में जब यह मिल बंद हुई, उस दिन को बहादरपुर और बुरहानपुर के श्रमिक आज भी ‘काले दिन’ के रूप में याद करते हैं। अब तक लगभग 200 श्रमिक इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन उनकी मेहनत की कमाई अब भी सरकार के खातों में दबी पड़ी है।
देयता अब 56 करोड़ से अधिक, समय-सीमा तय करने की मांग
चिटनिस ने बताया कि मार्च 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार श्रमिकों की कुल देयता ब्याज सहित 56.55 करोड़ से अधिक हो चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस प्रक्रिया में स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की, ताकि श्रमिकों को उम्मीद की नई किरण मिल सके।
मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा: मजदूरों को मिलेगा हक – ब्याज सहित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में कहा कि, हम प्रदेश की सभी बंद मिलों के श्रमिकों को उनका हक दिलाकर रहेंगे – वह भी पूरे ब्याज के साथ। बहादरपुर सूत मिल के श्रमिक भी इसमें शामिल हैं। शीघ्र बैठक बुलाकर कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पृष्ठभूमि:
मिल बंद: फरवरी 1998 (कांग्रेस शासनकाल)
परिसमापक नियुक्ति: अक्टूबर 1999
देयता (1999): 1.51 करोड़ रु.
देयता (मार्च 2024 तक ब्याज सहित): 56.55 करोड़ रु.
मजदूरों की मृत्यु: लगभग 200
वर्तमान परिसमापक: महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, बुरहानपुर
चिटनिस का संकल्प
हमने मालवा, हुकुमचंद, हीरा, अवंतिका मिल जैसे उदाहरण प्रस्तुत किए हैं जहाँ श्रमिकों को पूरा भुगतान किया गया। अब बुरहानपुर की बारी है। जब तक श्रमिकों को न्याय नहीं मिलता, हम यह आवाज बंद नहीं होने देंगे।

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