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जन्माष्टमी कार्यक्रम में नियम तोड़कर पहुंचे बाहरी पुरुष, प्रशासन हरकत में
बुरहानपुर। शहर के महाविद्यालयीन अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास का जन्माष्टमी कार्यक्रम अब विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। वीडियो में छात्राओं के बीच बाहरी पुरुष डांस करते और रिकॉर्डिंग बनाते दिख रहे हैं। जबकि नियम साफ कहते हैं कि किसी भी बालिका छात्रावास में बाहरी पुरुषों का प्रवेश पूर्णतः वर्जित है।
दरअसल जन्माष्टमी उत्सव के नाम पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रावास की अधीक्षक सीमा करोड़ा ने टीम को प्रवेश दिया। यही वीडियो अब सवालों की बौछार कर रहा है। अधीक्षक का तर्क— कॉलेज की लड़कियों को ट्रेनिंग देने बुलाया था। क्लब के सारे मेंबर शिष्ट पुरुष थे और मेरी अनुमति से आए थे। कोई भी वाहियात व्यक्ति नहीं था। लेकिन, वीडियो में जो दृश्य कैद हुए हैं वे बालिकाओं की सुरक्षा और गोपनीयता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं।
नियमों की अनदेखी या लापरवाही?
बालिका छात्रावासों में सांस्कृतिक कार्यक्रम हो सकते हैं, लेकिन महिला प्रशिक्षकों को ही अनुमति दी जाती है। बाहरी पुरुषों को प्रवेश न देने के पीछे उद्देश्य यही है कि छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो। उनके निजी अधिकार और गोपनीयता प्रभावित न हों। सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का उल्लंघन न हो इस घटना से साफ है कि या तो नियमों की अनदेखी हुई या प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही।
प्रशासन हुआ सख्त
मामला सामने आने पर सहायक आयुक्त जनजातीय विभाग भरत जांचपुरे ने कहा— मामला मेरे संज्ञान में आया है। अधीक्षक को कल ही नोटिस जारी किया जाएगा और जांच की जाएगी।
अभिभावकों में चिंता
वीडियो वायरल होते ही अभिभावकों के बीच बेचैनी बढ़ गई है। उनका सवाल है कि— जहां बेटियों को सुरक्षित माहौल देना चाहिए, वहां नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ऐसे में छात्रावास में रहने वाली बेटियों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?
सुरक्षा पर लापरवाही, प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल
बालिका छात्रावासों का उद्देश्य छात्राओं को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। बाहरी पुरुषों का प्रवेश न केवल छात्राओं की गोपनीयता को खतरे में डालता है, बल्कि उनकी मानसिक शांति पर भी असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ सामाजिक मान्यताओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की सीधी अनदेखी हैं।
बालिकाओं की सुरक्षा पर फिर सवाल
यह मामला केवल एक छात्रावास का नहीं है। सवाल यह है कि जब नियम इतने स्पष्ट हैं तो उनके पालन में लापरवाही क्यों? बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़े इस प्रकरण ने जिला प्रशासन और छात्रावास व्यवस्था दोनों पर ही अविश्वास की स्थिति खड़ी कर दी है।