बुरहानपुर। शहर से सटे उखड़गांव स्थित ऐतिहासिक नागदेव मंदिर में गुरुवार को ऋषि पंचमी महापर्व पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। करीब 400 साल पुराने इस मंदिर में आस्था का आलम यह है कि देशभर से 10 हजार से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंचे। दुर्गम रास्ते और नदी पार करने की मुश्किलों के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
मंदिर से जुड़े अनिल चौधरी ने बताया कि यहां मान्यता है—जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह पूरी होती है। शादी की मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु नाग-नागिन का जोड़ा छोड़ते हैं। मकान बनने पर चांदी का छत्र चढ़ाया जाता है। कोई चांदी का झूला चढ़ाता है तो कोई चरण। एक भक्त ने बताया—पिछले साल मेरे पैर का ऑपरेशन हुआ था। मैंने मन्नत मानी थी कि ठीक होने पर चांदी के चरण चढ़ाऊंगा। आज मैं अपनी मन्नत पूरी करने यहां आया हूँ।
मिट्टी के पिंड के सामने नारियल चढ़ाकर मांगी जाती है मन्नत
श्रद्धालु मिट्टी से बने विशाल नागदेव पिंड के सामने नारियल चढ़ाकर मन्नत मानते हैं। जब मन्नत पूरी हो जाती है तो वे वापस आकर सांप का जोड़ा छोड़ते हैं। मंदिर की सेवा भावसार समाज देखता है। सुबह से ही निराहार व्रत रखकर लाल चोला धारण किए पुजारी कैलाश भागवत और अरुण सूर्यवंशी ने सामूहिक प्रार्थना व महाआरती की। श्रद्धालुओं का कहना है कि महाआरती के समय वातावरण इतना आध्यात्मिक हो जाता है कि नागदेव स्वयं विशाल पिंड पर प्रकट होते हैं।
भक्तों की आस्था और सुरक्षा
मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को एक छोटी नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के मौसम में उतावली नदी का बहाव तेज हो जाता है। इसलिए प्रशासन हर साल सुरक्षा के खास इंतजाम करता है। खास बात यह है कि यहां पर कभी भी किसी भक्त को सर्पदंश जैसी घटना नहीं हुई।
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
इस बार हैदराबाद, अहमदाबाद, सूरत, नागपुर, भोपाल, इंदौर, औरंगाबाद, अमरावती, खंडवा, नेपानगर, रावेर, भुसावल, जलगांव सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर अब सकल पंच गुजराती मोड समाज और भवसार समाज के परिवारों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है।