बुरहानपुर। मध्यप्रदेश की सियासत में आदिवासी समाज को लेकर बयानबाज़ी थमने का नाम नहीं ले रही। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के छिंदवाड़ा में दिए बयान – गर्व से कहो, हम हिन्दू नहीं आदिवासी हैं – पर अब नेपानगर विधायक मंजू दादू ने तीखा पलटवार किया है। दादू ने साफ कहा कि आदिवासी समाज को हिन्दू धर्म से अलग दिखाने की कोशिश राजनीति का हिस्सा है और यह बेहद निंदनीय है।
विधायक मंजू दादू ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा – विपक्ष की आदत बन चुकी है कि वह समाज को बांटने वाले बयान देता रहे। इससे पहले प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने महिलाओं पर अमर्यादित टिप्पणी की थी, अब नेता प्रतिपक्ष आदिवासियों को हिन्दू समाज से अलग करने का प्रयास कर रहे हैं। यह सब कांग्रेस की राजनीतिक मानसिकता को दर्शाता है कि कैसे समाज को तोड़ना है और लोगों को भड़काना है।
हम हमेशा से प्रकृति पूजक, अनादिकाल से हिन्दू
दादू ने अपने आदिवासी समाज की परंपराओं का उदाहरण देते हुए कहा – मैं भी आदिवासी हूं। बचपन से देखती आई हूं कि गणेश जी की प्रतिमा बैठाई जाती है, विसर्जन होता है, माताजी की स्थापना होती है। हमारे पूर्वज जब बोवनी करते थे, तो धरती मां की पूजा करते थे। ताप्ती नदी के किनारे बसे हमारे समाज ने हमेशा ताप्ती मैया की पूजा की है। यह सारी परंपराएं इस बात का प्रमाण हैं कि हम आज से नहीं, बल्कि अनादिकाल से हिन्दू हैं।
राजनीतिक फायदे के लिए समाज को तोड़ने की साजिश
विधायक दादू ने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा – उनकी सोच पर दया आती है। केवल राजनीतिक फायदे के लिए हमें तोड़ने और भटकाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन सच यह है कि आदिवासी समाज हिन्दू धर्म का अभिन्न हिस्सा रहा है और रहेगा। कांग्रेस नेताओं की बयानबाज़ी हमारे समाज को भ्रमित नहीं कर सकती।
भाजपा ने पकड़ा मुद्दा, कांग्रेस बैकफुट पर
मध्यप्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक हमेशा निर्णायक भूमिका में रहा है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं के बयान और उस पर भाजपा विधायकों की तीखी प्रतिक्रिया ने सियासी पारा और चढ़ा दिया है। जानकार मानते हैं कि विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही दोनों पार्टियां आदिवासी समाज को साधने की कोशिश में हैं। लेकिन बयानबाज़ी के इस दौर में कांग्रेस कहीं न कहीं बैकफुट पर नज़र आ रही है।