बुरहानपुर। नवल नगर का नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित इन दिनों अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। कारखाने को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए हर साल करीब 6 लाख मीट्रिक टन गन्ने की आवश्यकता होती है, लेकिन इस साल उत्पादन इतना घटा है कि अनुमानित क्रशिंग 1 से डेढ़ लाख टन ही रह जाएगी।
दरअसल कारखाने का संचालन पिछले तीन वर्षों से शासन कर रहा है। किसानों का आरोप है कि उन्हें गन्ना फसल के विरुद्ध पर्याप्त अग्रिम राशि नहीं मिली। इससे किसानों ने गन्ना लगाने के बजाय दूसरी फसलों की ओर रुख कर लिया।
खाद की आपूर्ति पर भी सवाल
कारखाने के पास इफको खाद की एजेंसी होने के बावजूद किसानों को समय पर रासायनिक खाद उपलब्ध नहीं कराई गई। खाद की कमी का सीधा असर गन्ने की बुआई और उत्पादन पर पड़ा। यही वजह है कि गन्ने की खेती में लगातार गिरावट आ रही है।
बंद होने का खतरा
कारखाने से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो नवलसिंह शक्कर कारखाना भी प्रदेश की अन्य सहकारी संस्थाओं की तरह बंद होने की कगार पर पहुँच सकता है। इससे हजारों किसानों और कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित होगा।
किसानों से अपील
कारखाने की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती किशोरी देवी शिवकुमार सिंह ने किसानों से भावुक अपील की गन्ना ही एकमात्र ऐसी फसल है जो आंधी-तूफान का सामना कर सकती है और इसके दाम भी निश्चित रहते हैं। किसान भाई गन्ना बोकर न केवल अपनी आय सुरक्षित कर सकते हैं बल्कि कारखाने को भी बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कारखाना संस्थापक अध्यक्ष शिवकुमार सिंहजी के सपनों का प्रतीक है। इसलिए किसान अधिक से अधिक गन्ना लगाकर इन सपनों को साकार करने में सहयोग करें।
किसानों के लिए संदेश
पूर्व अध्यक्ष ने साफ किया कि किसानों को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि किसान गन्ना उत्पादन बढ़ाएँगे तो कारखाना न केवल पुनः लाभ में आ सकता है बल्कि किसानों की आजीविका भी मजबूत होगी।