बुरहानपुर। बहादरपुर सहकारी सूत मिल के श्रमिकों का संघर्ष आखिर अब नतीजे की ओर बढ़ता दिख रहा है। मजदूरों के वेतन और ग्रैच्युटी के भुगतान को लेकर कलेक्टर कार्यालय में अहम बैठक हुई। बैठक में विधायक अर्चना चिटनीस और कलेक्टर हर्ष सिंह मौजूद रहे।
जिला प्रशासन को सूत मिल के 743 श्रमिकों की सूची अलग-अलग शासकीय कार्यालयों से प्राप्त हुई है। इस सूची की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए गए। सूची का मिलान करने पर 59 श्रमिकों की पुष्टि नहीं हो सकी। विधायक चिटनीस ने अधिकारियों को साफ कहा कि जब तक अभिलेखों से पूरी तरह जांच न हो जाए, तब तक शासन को सूची न भेजी जाए।
परिसमापक और कोषालय को जिम्मेदारी
विधायक श्रीमती चिटनीस ने परिसमापक और जिला कोषालय अधिकारी को निर्देश दिए कि सभी नामों की भुगतान राशि का पुनर्मिलान कर रिपोर्ट अगली बैठक में पेश करें। उन्होंने कहा – हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, किसी भी श्रमिक को उसका हक मिलने से रोका नहीं जाएगा।
विधानसभा में लगातार उठता रहा मुद्दा
यह पहला मौका नहीं है जब यह मुद्दा उठा। दिसंबर 2024 और जुलाई 2025 में भी विधायक अर्चना चिटनिस ने विधानसभा में सवाल खड़े किए थे। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में आश्वासन दिया था कि प्रदेश की सभी बंद मिलों के मजदूरों को उनका वाजिब हक ब्याज सहित दिलाया जाएगा। बुरहानपुर की बहादरपुर सूत मिल भी इस दायरे में है।
अन्य मिलों के मजदूरों को मिला हक
चिटनीस ने याद दिलाया कि सरकार ने पहले भी मालवा मिल, हुकुमचंद मिल, विनोद मिल, अवंतिका सूत मिल और हीरा मिल जैसे बड़े नामों के मजदूरों को उनका बकाया चुकाया है। उसी संवेदनशीलता से बहादरपुर मिल के श्रमिकों के लिए भी फैसला होगा।
25 साल का संघर्ष
अर्चना चिटनीस ने भावुक होकर कहा हम इस मुद्दे को पिछले 25 वर्षों से उठा रहे हैं। हर मंच पर आवाज बुलंद की, हर सरकार से गुहार लगाई। हमारा संकल्प है कि बहादरपुर सूत मिल का कोई भी मजदूर–कर्मचारी अपने हक से वंचित न रहे।