बुरहानपुर। सोमवार दोपहर नेपानगर की न्यू कॉलोनी अचानक गोलियों की आवाज से गूंज उठी। दरवाजे खुले, लोग घरों से बाहर भागे। सबकी नजरें एक ही जगह जा टिकीं—वन विभाग के वनपाल कृष्ण कुमार बर्मन का घर। अंदर बर्मन खून से लथपथ पड़े थे। उन्होंने अपनी लाइसेंसी बंदूक से पेट में गोली मार ली थी। परिजन और पड़ोसी उन्हें घबराहट में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए बुरहानपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
दरअसल 16 सितंबर को लोकायुक्त इंदौर की टीम ने बर्मन को 3 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। यह शिकायत अंबा गांव निवासी सदाशिव डावर ने की थी। उस दिन से ही बर्मन का जीवन जैसे बदल गया। आरोपों की बदनामी और विभागीय दबाव ने उनकी नींद और चैन छीन लिया। रिश्तेदारों का कहना है कि वे बेहद तनाव में थे और बार-बार कहते थे मुझे साजिश के तहत फंसाया गया है।
सुसाइड नोट– नाम, दर्द और आरोप
घटना स्थल से पुलिस को मिला सुसाइड नोट सबको चौंका गया। बर्मन ने साफ लिखा कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया और उनकी छवि को बदनाम करने की कोशिश की गई। नोट में पांच नाम दर्ज हैं– रेंजर शंकर सिंह चौहान, वनपाल नारायण, शिकायतकर्ता सदाशिव डावर, दिलीप बामन्या और नवल (कियोस्क सेंटर बोरी) । बर्मन ने लिखा इन लोगों ने मिलकर मुझे प्रताड़ित किया, लोकायुक्त से फंसवाया। मैं मानसिक दबाव सह नहीं पा रहा हूं। इसलिए यह कदम उठा रहा हूं।
जांच के बाद ही सच सामने आएगा
घटना के बाद पुलिस और वन विभाग के अधिकारी हरकत में आ गए। नेपानगर के एसडीओ विक्रम सुलिया ने कहा– वनपाल ने अपने घर पर गोली मारी है। वे किसी मामले में खुद को फंसाया हुआ बता रहे थे। जांच के बाद ही सच्चाई साफ होगी। थाना प्रभारी ज्ञानू जायसवाल ने बताया– बर्मन ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली मारी है। प्राथमिक इलाज के बाद जिला अस्पताल भेजा गया है। अब हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं।
परिवार और मोहल्ले में मातम– हमारे लिए इज्जतदार इंसान थे
घटना के बाद मोहल्ले में सन्नाटा छा गया। परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। रिश्तेदारों का कहना है कृष्णकुमार बेहद सीधे और इज्जतदार इंसान थे। लेकिन रिश्वत कांड की बदनामी ने उन्हें तोड़ दिया। उन्होंने बार-बार कहा कि उन्हें फंसाया गया है, पर किसी ने उनकी नहीं सुनी।
सवालों के घेरे में सिस्टम
अब बड़ा सवाल यही है– अगर बर्मन सचमुच निर्दोष थे तो उन्हें क्यों फंसाया गया? अगर दोषी थे, तो इतना दबाव क्यों कि उन्होंने खुद पर गोली चला ली? यह घटना न सिर्फ एक अफसर की जिंदगी पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पूरे सिस्टम के भीतर छिपे दबाव, राजनीति और भ्रष्टाचार को भी उजागर करती है। बर्मन का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस और लोकायुक्त दोनों ही मामले की जांच कर रहे हैं। लेकिन नेपानगर की सड़कों और गलियों में लोग एक ही चर्चा कर रहे हैं क्या तीन हजार की रिश्वत के लिए एक जिंदगी बर्बाद हो गई?