बुरहानपुर। खंडवा-मालेगांव नकली नोट कांड में गठित एसआईटी की टीम बुधवार दोपहर बुरहानपुर पहुंची। एक टीम ने इतवारा स्थित जिला अस्पताल के सस्पेंडेड डॉक्टर प्रतीक नवलखे के दो दिन पहले ही सील किए गए मकान की सील खोलकर जांच की। टीम ने हरीरपुरा में पेठिया मदरसे मौलाना जुबेर अंसारी और तीसरे आरोपी नजीर अंसारी के घर भी बाद में टीम पहुंची, लेकिन तीनों ही जगह से कुछ नहीं मिला। हालांकि परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं और अफसरों ने जांच की बात कही है।
गौरतलब है कि नकली नोट कांड मामले में पुलिस ने हरीरपुरा निवासी इमाम जुबेर अंसारी, नजीर अंसारी को मालेगांव में 10 लाख रूपए के नकली नोटों के साथ पकड़ा था। जांच में पेठिया जिला खंडवा में दबिश देने पर जुबेर अंसारी के कमरे से 19.87 लाख के नकली नोट और बरामद हुए थे। पूछताछ में बुरहानपुर के निलंबित डॉ. प्रतीक नवलखे का नाम सामने आया था। परिजन के अनुसार वह सीधी जिले में पदस्थ है। डॉक्टर का नाम सामने आने पर दो दिन पहले ही बुरहानपुर पुलिस ने इतवारा स्थित डॉक्टर का पैतृक मकान सील कर दिया था। खंडवा पुलिस, मालेगांव पुलिस की एसआईटी गठित की गई। इस एसआईटी ने बुधवार को बुरहानपुर पहुंचकर आरोपियों के मकानों की सर्चिंग की और बयान दर्ज किए। एसआईटी में खंडवा के डीएसपी अनिल सिंह चौहान, जावर थाना प्रभारी श्याम सिंह के अलावा महाराष्ट्र के मालेगांव से आए पुलिस अफसर शामिल रहे।
तीनों आरोपियों के घर पहुंची टीम, उमड़ी लोगों की भीड़
जांच के लिए तीनों आरोपियों जुबेर अंसारी, नजीर अंसारी और डॉ. प्रतीक नवलखे के घर टीम पहुंची, लेकिन यहां टीम को कुछ खास नहीं मिला। बाहर निकलकर अफसरों ने कुछ बताने से भी इनकार कर दिया, हालांकि उनका कहना था कि मामले की जांच अभी जारी है। वहीं तीनों आरोपियों के परिजन के बयान पुलिस ने दर्ज किए हैं। इस दौरान काफी लोगों की भीड़ भी उमड़ पड़ी।
जेल में हुई थी डॉक्टर से मुलाकात
सूत्रों के अनुसार नकली नोट के साथ पकड़े गए इमाम जुबेर अंसारी ने खुलासा किया है कि उसकी मुलाकात डॉ. प्रतीक नवलखे से हुई थी और वह उसके साथ मिलकर नकली नोट का कारोबार कर रहा था। डॉक्टर पर बुरहानपुर में धोखाधड़ी सहित अन्य 3 मामले दर्ज हैं जबकि दो मामले जलगांव जिला महाराष्ट्र में नकली नोट से संबंधित है, यही वजह है कि डॉक्टर नवलखे का नाम इस मामले में सामने आया। वहीं उनके पिता सुरेश नवलखे ने कहा- पुलिस ने शंका के आधार पर जांच की है। हालांकि ऐसा कुछ नहीं है। हमने पुलिस को जांच में सहयोग किया है। अब तक इस मामले में कुल चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया जा चुका है।
डॉ. प्रतीक नवलखे ने कईं लोगों को बांटा था नगद पैसा
बुरहानपुर में रहते समय डॉ. प्रतीक नवलखे जिला अस्पताल के आरएमओ थे। इस पद पर रहते हुए उन्होंने कईं लोगों को नगद रूपए बांटे थे। अस्पताल का कबाड़ बेचे जाने के मामले में उनकी भूमिका उभरकर सामने आई थी। बाद में केस दर्ज होने पर जांच हुई तो करीब 12 करोड़ से अधिक की राशि का घोटाला निकला था। जिन लोगों को डॉक्टर प्रतीक नवलखे ने पैसा दिया था उसमें से कुछ लोगों ने जांच के समय रूपया पुलिस को जमा कराकर अपनी जान छुड़ा ली थी, लेकिन एक बार फिर डॉक्टर पुलिस की जद में आ गया है। ऐसे में जिन लोगों ने पैसा लिया था वह भी अब फिर से जांच के दायरे में आ सकते हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस उनसे भी पूछताछ कर सकती है, क्योंकि अब मामला नकली नोट से जुड़ा हुआ है।